
स्वर्ण ऋण के प्रति बढ़ता भारतीयों का रुझान
किसी भी देश के आर्थिक विकास को गति देने हेतु पूंजी की आवश्यकता रहती है। तेज आर्थिक विकास के चलते यदि किसी देश में वित्तीय बचत की दर कम हो तो उसकी पूर्ति ऋण में बढ़ोत्तरी से की जा सकती है। भारत में ऋण: सकल घरेलू अनुपात अन्य विकसित एवं कुछ विकासशील देशों की तुलना में अभी बहुत कम है। परंतु, हाल ही के समय में भारत का सामान्य नागरिक ऋण के महत्व को समझने लगा है एवं भौतिक संपति के निर्माण में अपनी ब.....
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