नारी शक्ति वंदन अधिनियम: सत्ता में समानता
भारत का लोकतंत्र केवल एक प्रशासनिक ढांचा नहीं, बल्कि समानता, न्याय और जनभागीदारी की सशक्त अभिव्यक्ति है। जब इस व्यवस्था में आधी आबादी—नारी शक्ति—को सार्थक और प्रभावी प्रतिनिधित्व मिलता है, तभी विकास संतुलित और समावेशी बनता है। “नारी शक्ति वंदन अधिनियम” इसी विचार का प्रतीक है, जो केवल संवैधानिक संशोधन नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना और ऐतिहासिक संघर्ष की परिणति है। भारतीय इतिहास इस सत्य का साक्षी है.....
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