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देश की राजधानी किसी बुरे सपने से कम नहीं है

देश की राजधानी किसी बुरे सपने से कम नहीं है

देश में वोट बैंक की राजनीतिक के समक्ष पर्यावरण प्रदूषण जैसे मुद्दे हाशिए पर धकेले जाते रहे हैं। राजनीतिक दल इसे समस्या तो मानते हैं किन्तु इसके स्थायी निदान के लिए न तो कोई कार्ययोजना है और न ही इच्छाशक्ति। देश की राजधानी दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी परियोजना क्षेत्र भीषण प्रदूषण की मार झेल रहा है। यही वजह है कि प्रदूषण की भयावहता तमाम क्षेत्रों में तरक्की को मुंह चिढ़ा रही है। सरकारों और राजन.....

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लौहपुरुष सरदार पटेल और एकीकृत भारत की नींव

लौहपुरुष सरदार पटेल और एकीकृत भारत की नींव

राष्ट्रीय एकता के प्रति सरदार पटेल की निष्ठा आजादी के इतने वर्षों बाद भी पूरी तरह प्रासंगिक है। एकता की मिसाल कहे जाने वाले सरदार वल्लभ भाई पटेल गुजरात के नाडियाद में एक किसान परिवार में 31 अक्तूबर 1875 को जन्मे थे, जिन्होंने सदैव देश की एकता को सर्वोपरि माना। सरदार पटेल ने भारत को खण्ड-खण्ड करने की अंग्रेजों की साजिशों को नाकाम करते हुए बड़ी ही कुशलता से आजादी के बाद करीब 550 देशी रियासतों त.....

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नए भारत को सुरक्षा एवं संवेदना वाली नई पुलिस चाहिए

नए भारत को सुरक्षा एवं संवेदना वाली नई पुलिस चाहिए

भारतीय लोकतंत्र में पुलिस व्यवस्था कानून-व्यवस्था की आधारभूत धुरी है, परंतु आम नागरिक के मानस में पुलिस की छवि अभी भी कठोरता, डर और दमन से जुड़ी हुई है। इसे केवल अधिकार जताने वाली शक्ति समझा गया है, संवेदनशीलता, जवाबदेही और मित्र भाव से नहीं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारतीय प्रबंधन संस्थान रायपुर में पुलिस महानिदेशकों और महानिरीक्षकों के 60वें अखिल भारतीय सम्मेलन में इसी जटिलता पर प्रकाश .....

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हुमायूं कबीर, अरशद मदनी और महमूद मदनी के बयान आखिर कैसे भारत का माहौल खराब कर रहे हैं? समझिए विस्तार से

हुमायूं कबीर, अरशद मदनी और महमूद मदनी के बयान आखिर कैसे भारत का माहौल खराब कर रहे हैं? समझिए विस्तार से

भारत एक लोकतांत्रिक देश है। धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र है। सहिष्णु मुल्क है, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का पक्षधर देश है, लेकिन इसका मतलब यह कदापि नहीं है कि राजनेताओं की दंगाई प्रवृत्ति को शह दिया जाए। गुलाम भारत में, आजाद भारत में जो राजनीतिक नौटंकी दिखाई दे रही है, इस जनद्रोही प्रवृत्ति पर अविलंब अंकुश लगना चाहिए।

कहना न होगा कि जिस तरह से मुस्लिम नेता व धर्मगुरु यथा- हुमायूं कबीर, अरशद मदनी.....

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बस्तर में हो रहा है सुनहरा सवेरा...

बस्तर में हो रहा है सुनहरा सवेरा...

जब किसी भी समस्या के समाधान के प्रति नेतृत्व की इच्छा शक्ति सच्चे अर्थों में सक्रिय होती है, तो बड़ी से बड़ी चुनौती भी घुटने टेक देती है। नक्सलवाद के संदर्भ में जो परिणाम आज देश देख रहा है, वह केन्द्र और राज्य सरकारों के संकल्पित प्रयासों का ही फल है। जो बस्तर कभी लाल आतंक का प्रमुख गढ़ माना जाता था, वहां अब स्थायी शांति अपना आधार मज़बूत कर रही है।

हिंसा का खेल खेलने वाले नक्सली चौतरफा .....

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यूएसए और चीन के बाद भारत एशिया की तीसरी प्रमुख सैन्य शक्ति बना

यूएसए और चीन के बाद भारत एशिया की तीसरी प्रमुख सैन्य शक्ति बना

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में भारत अब यूएसए और चीन के बाद एशिया की तीसरी प्रमुख सैन्य शक्ति बन चुका है। यह पाकिस्तान और बांग्लादेश के लिए किसी सदमे की तरह है। वहीं उनके आका देश अमेरिका और चीन के लिए भी एक झटके की तरह है, क्योंकि आने वाले वर्षों में इन्हें भी बारी-बारी पूर्वक पीछे छोड़ेगा। यह बात मैं नहीं बल्कि एशियन पॉवर इंडेक्स 2025 के8 एक वार्षिक सूची बोल रही है जो एशिया में देशों .....

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राहुल बीजेपी के स्टार प्रचारक बृजभूषण शरण सिंह ने नेता विपक्ष पर कसा तगड़ा तंज

राहुल बीजेपी के स्टार प्रचारक बृजभूषण शरण सिंह ने नेता विपक्ष पर कसा तगड़ा तंज

बीजेपी नेता बृजभूषण शरण सिंह ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर हमला बोलते हुए कहा कि राहुल गांधी अब कांग्रेस के प्रचारक नहीं, बल्कि बीजेपी के सुपरस्टार प्रचारक बन गए हैं। बृजभूषण ने एक बयान में कहा, “राहुल गांधी को कांग्रेस का प्रचारक मानने की बजाय अब उन्हें बीजेपी का प्रचारक मानना चाहिए।”

इसके अलावा, बृजभूषण ने चुनावी प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए और कहा, “एक इंसान अलग-अलग जगहों पर वोट क्य.....

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बेटियाँ ऑन द पिच: भारत की बदलती क्रिकेट गाथा

बेटियाँ ऑन द पिच: भारत की बदलती क्रिकेट गाथा

वो पल कुछ अलग था — हवा में उम्मीद थी और आसमान किसी नए इतिहास का साक्षी बन रहा था। हर चौके पर गूंजता उल्लास, हर विकेट पर उभरता गर्व — यह सिर्फ खेल नहीं, बदलाव की आहट थी। भारत की बेटियाँ मैदान पर थीं और देश की आँखों में एक नया आत्मविश्वास चमक रहा था। मुंबई के DY Patil स्टेडियम में जब भारतीय महिला टीम ने विश्वकप ट्रॉफी उठाई, तो लगा — यह जीत सिर्फ मैदान की नहीं, उस सोच की थी जिसने बेटियों को सीमा.....

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रेल सुरक्षा: सुधार की पटरियों पर कब चढ़ेगा सिस्टम?

रेल सुरक्षा: सुधार की पटरियों पर कब चढ़ेगा सिस्टम?

भारत की रेल पटरियां देश की धमनियां कही जाती हैं, जो प्रतिदिन करोड़ों लोगों को उनके गंतव्य तक पहुंचाती हैं, जो अर्थव्यवस्था का इंजन चलाती हैं, जो इस विशाल देश की सामाजिक-सांस्कृतिक एकता का प्रतीक हैं लेकिन जब इन्हीं पटरियों पर बार-बार मौत की चीखें गूंजती हैं तो सवाल केवल हादसों का नहीं रहता बल्कि उस पूरे तंत्र की आत्मा पर उठता है, जिसने सुरक्षा को केवल एक चुनावी घोषणापत्र सरीखा बनाकर रख दिया है.....

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