रेल सुरक्षा: सुधार की पटरियों पर कब चढ़ेगा सिस्टम?
भारत की रेल पटरियां देश की धमनियां कही जाती हैं, जो प्रतिदिन करोड़ों लोगों को उनके गंतव्य तक पहुंचाती हैं, जो अर्थव्यवस्था का इंजन चलाती हैं, जो इस विशाल देश की सामाजिक-सांस्कृतिक एकता का प्रतीक हैं लेकिन जब इन्हीं पटरियों पर बार-बार मौत की चीखें गूंजती हैं तो सवाल केवल हादसों का नहीं रहता बल्कि उस पूरे तंत्र की आत्मा पर उठता है, जिसने सुरक्षा को केवल एक चुनावी घोषणापत्र सरीखा बनाकर रख दिया है.....
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