किसका सिक्का चला और कौन चलता बना, एग्जिट पोल के अनुमान पर एक नज़र
पैदाइश बिहार की और जमाना 90 के दशक का जहां बिजली का आना खबर होता था। शाम के वक्त स्कूल से छुट्टी के वक्त बत्ती नहीं तो बहाना ये कि पढाई कैसे करें? वक्त तो इफ़रात में है तो गाना शुरू होता था, जिसकी एक पंक्ति शायद आपको भी याद होगी- समय बिताने के लिए करना है कुछ काम। नतीजे 4 जून को आने है। पता चलेगा कि देश ने अपना मुकद्दर अगले पांच बरस के लिए किसके हाथ सौंप दिया है। लेकिन आज तो तारीख 1 ही .....
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