दादी-नानी की कहानियां व लोरियां में छिपा सकारात्मक संदेश
पापा की परी या परा हो या दादी-नानी के नाती-पोतें, दादी-नानी की कहानियां या लोरियां आज बीते जमाने की बात हो गई है। दादी-नानी की कहानियां व लोरियों में सकारात्मक संदेश छिपा होता था। यह कोई मनोरंजन का माध्यम ना होकर बच्चों के मानसिक, पारिवारिक व सामाजिक समझ और जिज्ञासु प्रवृति को बढ़ावा देती थी। बच्चों में क्यूरिओसिटी बढ़ाने के साथ ही सार्थक अंत होने से बच्चों को कोई ना कोई संदेश अवश्य मिलता.....
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