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जनसंचार का सशक्त माध्यम है हिन्दी पत्रकारिता

जनसंचार का सशक्त माध्यम है हिन्दी पत्रकारिता

पूर्व राष्ट्रपति डा. शंकर दयाल शर्मा ने लोकतंत्र में प्रेस की भूमिका के बारे में कहा था कि प्रेस पर लोकतांत्रिक परम्पराओं की रक्षा करने और शांति व भाईचारा बढ़ाने की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। राष्ट्रीय अखण्डता के संदर्भ में पत्रकारिता की भूमिका की बात करें तो लोकतंत्र के अन्य स्तंभों के मुकाबले प्रेस की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण है, इसका अनुमान इसी से लगाया जा सकता है कि विश्वभर में भारत की प्रतिष्ठ.....

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एमएसपी घोषणा सकारात्मक पहल तो चाकचोबंद खरीद व्यवस्था भी जरुरी

एमएसपी घोषणा सकारात्मक पहल तो चाकचोबंद खरीद व्यवस्था भी जरुरी

केन्द्र सरकार द्वारा खरीफ फसलों की न्यूनतम समर्थन मूल्य की घोषणा खरीफ की बुवाई से पहले ही करने को किसानों के हित में सकारात्मक पहल के रुप में देखा जाना चाहिए। इसमें कोई दो राय नहीं कि नरेन्द्र मोदी सरकार द्वारा एक तो समय पूर्व समर्थन मूल्यों की घोषणा की जा रही है वहीं दूसरी और भविष्य की रणनीति के तहत आवश्यकतानुसार उत्पादन बढाने के लिए किसानों को प्रोत्साहित करने की दिशा में भी कदम बढ़ाये जा रहे ह.....

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राष्ट्रीय पक्षी मोर के जीवन से मानव समुदाय को मिलती हैं विभिन्न प्रेरणाएं, इसका हर पहलू अनुकरणीय

राष्ट्रीय पक्षी मोर के जीवन से मानव समुदाय को मिलती हैं विभिन्न प्रेरणाएं, इसका हर पहलू अनुकरणीय

पक्षी राज मोर या मयूर, जो भारत का राष्ट्रीय पक्षी है, इसे किन कारणों से भारत का राष्ट्रीय पक्षी स्वीकार (आत्मसात) किया गया है, इसके पीछे की एक नितांत धार्मिक कहानी है जो रोचक, ज्ञानबर्द्धक और जिज्ञासा पूर्ण है। स्कन्द पुराण में वर्णित है कि पक्षीराज मोर भगवान शिव और माता पार्वती के पुत्र कार्तिकेय भगवान का वाहन है। कहा जाता है कि कार्तिकेय भगवान मन के बड़े चंचल थे। उन्होंने अपने मन को साधने के लि.....

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क्यों जनता भ्रष्टाचार का अनचाहा भार ढ़ोये?

क्यों जनता भ्रष्टाचार का अनचाहा भार ढ़ोये?

विभिन्न राजनीतिक दलों, विभिन्न प्रांतों की सरकारों, विभिन्न गरीब कल्याण की योजनाओं, न्यायिक क्षेत्र एवं उच्च जांच एजेंसियों में भ्रष्टाचार की बढ़ती स्थितियां गंभीर चिन्ता का विषय है। ऐसा लगता है आज हम जीवन नहीं, राजनीतिक, न्यायिक एवं प्रशासनिक मजबूरियां जी रहे हैं। ऐसा भी लगता है न्याय, राजनीति एवं प्रशासन की सार्थकता एवं साफ-सुथरा उद्देश्य नहीं रहा, स्वार्थपूर्ति का जरिया बन गया है। दिल्ली उच्च .....

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बदलते विश्व में होगी भारत की बड़ी भूमिका, बशर्ते हम पिछलग्गू ना बनें

बदलते विश्व में होगी भारत की बड़ी भूमिका, बशर्ते हम पिछलग्गू ना बनें

बीते हफ्ते जब भारत-पाकिस्तान युद्ध विराम के बारूदी गुबार के बाद जीत हार के दावे और नुकसान के आकलन कर रहे थे और वाशिंगटन में बैठे राष्ट्रपति ट्रंप बार बार सीज फायर कराने का श्रेय लेने की कोशिश कर रहे थे, ठीक उसी समय ब्रुसेल्स में यूरोप और ब्रिटेन इतिहास के एक नये अध्याय पर हस्ताक्षर कर रहे थे। एक ऐसा इतिहास जो खामोशी से एक ध्रुवीय विश्व को बहुध्रुवीय दुनिया की तरफ ले जा रहा था। 19 मई 2025 को ब्रु.....

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यह ग्लेशियर की मौत की शोकसभा नहीं अपितु भावी संकट का है संकेत

यह ग्लेशियर की मौत की शोकसभा नहीं अपितु भावी संकट का है संकेत

अभी दो चार दिन पहले ही भारत, भूटान, नेपाल और चीन के चुनिंदा ग्लेशियलोजिस्टों ने समुद्र तल से करीब 5100 मीटर उंचे याला ग्लेशियर के मौत की अनोखी शोकसभा का आयोजन कर दुनिया के देषो को ग्लोबल वार्मिंग के दुष्प्रभाव के प्रति सावचेत करने का प्रयास किया है। हांलाकि किसी ग्लेशियर की मौत की विधिवत घोषणा और मातम सभा के आयोजन का यह कोई पहला मौका नहीं है। पिछले सात सालों में यह तीसरा मौका है जब ग्लेशियर की म.....

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अमरावती मॉडल देगा दुनिया के देशों को नई दिशा

अमरावती मॉडल देगा दुनिया के देशों को नई दिशा

ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा देने के लिए जहां दुनिया के देशों में टुकड़ो-टुकड़ों में काम हो रहा है वहीं आंध्रप्रदेश की नई राजधानी अमरावती को पूरी तरह से ग्रीन एनर्जी से संचालित शहर बनाने की दिशा में मुख्यमंत्री चन्द्रबाबू नायडू ने काम भी शुरु कर दिया है। अमरावती को पूरी तरह से ग्रीन एनर्जी से संचालित शहर बनाने में करीब करीब 65 हजार करोड़ रुपए की लागत आयेगी और सोलर, पवन और जल विद्युत पर आधारित इस परियोजना .....

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बेहाल वृद्धों के लिये आयोग बनना एक सराहनीय कदम

बेहाल वृद्धों के लिये आयोग बनना एक सराहनीय कदम

केरल योजना बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार, दक्षिणी राज्य पूरे भारत की तुलना में अधिक तेजी से वृद्ध हो रहा है। 1961 में, केरल में 60 वर्ष से अधिक आयु के लोगों की संख्या कुल जनसंख्या का 5.1 प्रतिशत थी, जो राष्ट्रीय औसत 5.6 प्रतिशत से थोड़ा कम थी। हालांकि, 1980 के दशक तक, राज्य ने बाकी राज्यों को पीछे छोड़ दिया। 2001 तक यह हिस्सा बढ़कर 10.5 प्रतिशत हो गया, जबकि राष्ट्रीय औसत 7.5 प्रतिशत था। 2011 में यह .....

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देश में समाप्त होने के कगार पर पहुंचा नक्सलवाद

देश में समाप्त होने के कगार पर पहुंचा नक्सलवाद

पिछले छः दशकों से देश में नासूर बनकर उभरा नक्सलवाद अब समाप्त होने की कगार पर पहुंच गया है। देश के गृहमंत्री अमित शाह ने संसद में घोषणा की है कि 31 मार्च 2026 तक देश में नक्सलवाद को समाप्त कर दिया जाएगा। गृह मंत्री द्वारा की गई यह एक बहुत बड़ी घोषणा है। गत 60 वर्षों से देश नक्सलवाद की समस्या से बुरी तरह पीड़ित रहा है। इस दौरान देश में कई सरकारें आई और चली गई मगर नक्सलवाद का नासूर दिनों-दिन बढ़ता .....

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गांवों में रुपये पैसे की जरुरत पूरी करने में आज भी रिश्तों की डोर अधिक मजबूत

गांवों में रुपये पैसे की जरुरत पूरी करने में आज भी रिश्तों की डोर अधिक मजबूत

नाबार्ड की हाल ही मार्च, 25 में जारी रिपोर्ट से जहां इस बात का संतोष होता है कि ग्रामीण क्षेत्र में संस्थागत ऋण प्रवाह का दायरा बढ़ा हैं वहीं यह भी चिंता चिंताजनक हालात सामने आये हैं कि गैरसंस्थागत स्रोतों से जरुरत के समय कर्ज प्राप्त करने वाले ग्रामीणों में से करीब साढ़े सात फीसदी लोगों को 50 फीसदी से भी अधिक ब्याजदर से कर्ज चुकाना पड़ रहा है। इससे यह साफ हो जाता है कि एक बार गैर संस्थागत स्रोत.....

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