जापान अपने युवाओं से क्यों कर रहा ज्यादा शराब पीने की अपील चलाया जा रहा कैंपेन

जापान अपने युवाओं से क्यों कर रहा ज्यादा शराब पीने की अपील चलाया जा रहा कैंपेन

शराब पीना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है लेकिन शराब पिलाना राजस्व के लिए फायदेमंद होता है। यकीन नहीं होता तो आप भारत में ही तमाम राज्यों के बजट उठा कर देख लीजिए कि उनकी कमाई का कितना हिस्सा शराब की  बिक्री से आता है। जिन राज्यों में नाम के लिए शराबबंदी है वहां बिक रही शराब से राजनीति और सरकारी तंत्र में कितने हाथ गर्म होते हैं वो भी किसी से छिपा नहीं हैं। दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के यहां शराब घोटाले में सीबीआई रेड ने देश की सियासत को गर्म कर दिया है। लेकिन आज बात भारत की नहीं बल्कि एक ऐसे देश की करेंगे जहां राजस्व को बढ़ाने के लिए शराब की प्रतियोगिता ही रख दी गई। ये देश है दिल्ली से पांच हजार किलोमीटर दूर जापान की। जापान सरकार ने अपने नागरिकों को शराब पिलाने के लिए एक प्रतियोगिता की शुरुआत की है। इसके साथ ही लोगों से शराब की खपत बढ़ाने के लिए आइडिया भी मांगा गया है। ऐसा इसलिए की वहां के युवा अपने बुजुर्गों की तुलना में कम शराब पी रहे हैं। जिससे जापान में शराब से होने वाली आमदनी घट गई है। इसलिए वहां की सरकार अपने नागरिकों से ज्यादा शराब पीने की अपील कर रही है। ताकी उससे मिलने वाले टैक्स में बढ़ोतरी हो और जापान की अर्थव्यवस्था को फायदा पहुंचे। 


एक रिपोर्ट के मुताबिक जापान के युवा बुजुर्गों की तुलना में कम शराब पी रहे हैं। इसके बाद जापान की नेशनल टैक्स एजेंसी ने युवाओं को शराब पीलाने के लिए साकेविवा नाम से एक प्रतियोगिता की शुरुआत की। जापान सरकार को उम्मीद है कि प्रतियोगिता के बाद ऐसा प्लान तैयार होगा जिससे शराब पीने वाले युवाओं की संख्या जापान में बढ़ेगी। जापान की शराब से होने वाली आय में भी बढ़ोतरी होगी। 


जापान को शराब को बढ़ावा देने की आवश्यकता क्यों पड़ी


इस प्रतियोगिता में 20-39 साल के लोग हिस्सा ले सकेंगे। जिन्हें ये बताना होगा कि वो किस तरह युवाओं में शराब की खपत को बढ़ा सकते हैं। बिक्री में आई गिरावट की वजह से जापान में शराब का कारोबार लगातार सिकुड़ता जा रहा है। नेशनल टैक्स एजेंसी का कहना है कि कोरोना के दौरान लोगों में शराब की लत कम हुई। एक रिपोर्ट के अनुसार 1995 की तुलना में लोगों में बहुत कम लोग शराब पी रहे हैं। 1995 में जापान में एक साल में एक व्यक्ति औसतन 100 लीटर शराब पीता था। लेकिन 2020 में ये आंकड़ा 75 लीटर तक रह गया। 1980 में देश की कुल कमाई का 5 % हिस्सा शराब बिक्री से आता था। लेकिन 2020 में ये घटकर 1.7 % ही रह गया है। मतलब ये कि जापान को कई साल से लगातार बड़ा घाटा उठाना पड़ रहा है। 


कोविड-19 के बाद आई गिरावट 


दो दशकों (2000-2020) के डेटा से पता चलता है कि जापान में शराब पर एकत्र कर की मात्रा और बिक्री (खपत) की मात्रा में कमी आई है। 2000 में शराब पर एकत्र कर 1758800 मिलियन येन था और बिक्री या खपत की मात्रा 9519513 केएल थी। हालांकि 2020 में सरकार ने शराब पर 1068100 मिलियन येन कर एकत्र किया जबकि खपत 7827698 केएल थी। पीने वाले बीयर के बजाय कम कीमत वाली शराब जैसे स्पार्कलिंग शराब चुहाई और बीयर जैसे उत्पादों को पसंद करते हैं। कोविड -19 महामारी  घरेलू शराब की खपत में गिरावट आई और लॉकडाउन के कारण रेस्तरां में भी खपत प्रभावित हुए। शराब कम खपत होने की एक बड़ी वजह जापान की तेजी से बूढ़ी होती आबादी भी है। क्योंकि विश्व बैंक की एक रिपोर्ट के मुताबिक जापान में एक तिहाई आबादी यानी 29 फीसदी लोग 65 साल या उससे ऊपर की है। यही वजह है कि जापान की सरकार युवाओं को शराब पीने का न्यौता दे रही है और उनसे शराब की खपत के लिए सुझाव भी मांग रही है। 


सेक वीवा का लक्ष्य क्या है?


इस कैंपेन का नाम है द साके वीवा जापान की राष्ट्रीय कर एजेंसी की और से चलाई जा रही इस प्रतियोगिता में  20-से 39 साल के लोगों को एक अजीब काम करना है। इन लोगों को ऐसे आइडिया और प्रस्ताव लेकर आने को कहा गया है जिससे जापान में शराब की लोकप्रियता फिर से वापस आ पाए। यह प्रतियोगिता 9 सितंबर तक चलेगी। जापान में शराब की खपत वर्ष 1995 में 100 लीटर सालाना थी लेकिन 2020 में यह गिरकर 75 लीटर पर आ गई है। यानी 1995 के तुलना में जापान के लोग 2020 में बहुत कम शराब पी रहे हैं। 


जापानी स्वास्थ्य मंत्रालय खुश नहीं 


जापान के भीतर भी सरकार के इस फैसले की आलोचना हो रही है। जापानी स्वास्थ्य मंत्रालय भी कर एजेंसी के इस फैसले से खुश नहीं है। प्रतियोगिता की घोषणा युवा अर्थव्यवस्था में शराब की लत से उत्पादकता पर पड़ने वाले दीर्घकालिक परिणामों के प्रति भी सरकार को चेतावनी दे रहे हैं। 

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