हरदोई ( उत्तरप्रदेश)
यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस के राष्ट्रव्यापी आह्वान पर बैंक कर्मियों ने 5 दिवसीय बैंकिंग सप्ताह लागू करने की मांग को लेकर बैंक ऑफ इंडिया के जोनल ऑफिस के गेट पर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में विभिन्न सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के अधिकारी एवं कर्मचारी बड़ी संख्या में शामिल हुए और सरकार तथा डिपार्टमेंट ऑफ फाइनेंशियल सर्विसेज से इस महत्वपूर्ण मांग पर तत्काल निर्णय लेने की मांग की।
प्रदर्शनकारियों ने 5 दिवसीय बैंकिंग सप्ताह लागू करो, आईबीए की सहमति का सम्मान करो, टालमटोल बंद करो जैसे नारों के साथ अपना आक्रोश व्यक्त किया।
प्रदर्शनकारियों को सम्बोधित करते हुए यूएफबीयू के स्थानीय संयोजक एवं एआईबीईए नेता राकेश पाण्डेय ने कहा कि 5 दिवसीय बैंकिंग सप्ताह कोई नई या अचानक उठाई गई मांग नहीं है। बैंक प्रबंधन की प्रतिनिधि संस्था इंडियन बैंकर्स एसोसिएशन और बैंकिंग उद्योग के श्रमिक संगठनों के बीच इस मुद्दे पर विधिक/द्विपक्षीय सहमति बन चुकी है। इसके बावजूद सरकार और उसका डिपार्टमेंट ऑफ फाइनेंशियल सर्विसेज इस मामले को अनावश्यक रूप से लंबित रखे हुए है।
उन्होंने कहा कि जब बैंक प्रबंधन और कर्मचारी संगठनों के बीच सहमति बन चुकी है तो सरकार द्वारा निर्णय को टालने का कोई औचित्य नहीं है। बैंक कर्मियों को यह समझ से परे है कि वर्षों से चली आ रही इस मांग पर सहमति के बावजूद अंतिम निर्णय लेने में इतनी देरी क्यों की जा रही है।
राकेश पाण्डेय ने कहा कि सहमति हो चुकी है तो आदेश कब होगा? यह सवाल अब देशभर के बैंक कर्मियों का सवाल बन चुका है। सरकार को बैंकिंग उद्योग की वास्तविक जरूरतों और कर्मचारियों की जायज मांग को समझते हुए तत्काल 5 दिवसीय बैंकिंग सप्ताह लागू करना चाहिए।
यूएफबीयू के कार्यवाहक चेयरमैन एवं एनसीबीई नेता क्षितिज पाठक ने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा लगातार ऊर्जा संरक्षण और ऊर्जा बचत का आह्वान किया जाता रहा है। ऐसे में बैंकिंग क्षेत्र में भी ऊर्जा की बचत के लिए 5 दिवसीय बैंकिंग सप्ताह महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।
उन्होंने कहा कि सप्ताह में दो दिन अवकाश होने से बिजली की खपत, ईंधन की खपत तथा बैंक कर्मचारियों एवं ग्राहकों के आवागमन में होने वाले पेट्रोल-डीजल के खर्च में कमी आएगी। इससे न केवल ऊर्जा की बचत होगी बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान मिलेगा।
उन्होंने कहा कि आज बैंकिंग सेवाओं का बड़ा हिस्सा डिजिटल माध्यमों से उपलब्ध है। ग्राहक सप्ताह के सातों दिन विभिन्न डिजिटल बैंकिंग सुविधाओं का उपयोग कर रहे हैं। ऐसे में आधुनिक बैंकिंग व्यवस्था के अनुरूप कार्य-संस्कृति में परिवर्तन समय की आवश्यकता है।
यूएफबीयू के अधिकारी संवर्ग के घटक संगठन एबाक के नेता अनूप सिंह ने कहा कि सरकार को बैंक प्रबंधन और बैंक कर्मचारी संगठनों के बीच बनी सहमति का सम्मान करना चाहिए। किसी मुद्दे पर बातचीत के माध्यम से सहमति बनने के बाद उसे अनिश्चितकाल तक लंबित रखना औद्योगिक संबंधों की भावना के अनुरूप नहीं है।
उन्होंने कहा कि बैंक कर्मी लगातार देश की अर्थव्यवस्था को गति देने, सरकारी योजनाओं को लागू करने, वित्तीय समावेशन को आगे बढ़ाने तथा करोड़ों ग्राहकों को बैंकिंग सेवाएं उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इसलिए उनकी जायज मांगों की अनदेखी नहीं की जानी चाहिए।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि सरकार टालमटोल बंद करे और 5 दिवसीय बैंकिंग सप्ताह लागू करने की प्रक्रिया तत्काल पूरी करे। यदि मांग पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो बैंक कर्मचारी अपने आंदोलन को और व्यापक बनाने के लिए बाध्य होंगे।
विरोध प्रदर्शन में पंजाब नेशनल बैंक, बैंक ऑफ इंडिया, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, केनरा बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, इंडियन बैंक तथा स्टेट बैंक ऑफ इंडिया सहित विभिन्न सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की शाखाओं के अधिकारी एवं कर्मचारी बड़ी संख्या में शामिल हुए।
प्रदर्शन के दौरान बैंक कर्मियों ने एकजुट होकर कहा कि 5 दिवसीय बैंकिंग सप्ताह केवल कर्मचारियों की सुविधा का विषय नहीं बल्कि आधुनिक, ऊर्जा-कुशल और संतुलित बैंकिंग व्यवस्था की आवश्यकता है।
यूएफबीयू नेताओं ने कहा कि बैंक कर्मचारी संगठनों ने सरकार को पर्याप्त समय दिया है। अब इस मुद्दे पर अनिश्चितकालीन प्रतीक्षा स्वीकार नहीं की जाएगी। आईबीए और बैंक यूनियनों के बीच बनी सहमति को लागू कराने के लिए देशभर में चरणबद्ध आंदोलन जारी रहेगा।
नेताओं ने केंद्र सरकार और डीएफएस से मांग की कि 5 दिवसीय बैंकिंग सप्ताह लागू करने की औपचारिक घोषणा शीघ्र की जाए, ताकि बैंकिंग उद्योग में लंबे समय से लंबित इस मुद्दे का सम्मानजनक समाधान हो सके।
यूएफबीयू ने स्पष्ट किया कि जब तक 5 दिवसीय बैंकिंग सप्ताह लागू नहीं होता, बैंक कर्मियों का संघर्ष और आंदोलन जारी रहेगा।
प्रदर्शनकारी बैंक कर्मियों में वेद प्रकाश पांडेय, अजय मेहरोत्रा, पवन मिश्रा, वरुण सिंह, आनन्द वर्मा, आदर्श बाजपेई, सुभाष पाण्डेय, आयुष बिष्ट, गौरव महाजन, आनन्द शुक्ला, अमित कुमार पाण्डेय, कौशलेन्द्र शुक्ला, मोहम्मद फरजान, सिद्धार्थ, अभिषेक श्रीवास्तव, योगेश,धीरेन्द्र कुमार, देवेंद्र भारद्वाज, आदित्य कुमार, अनामिका सिंह, अभिलाषा गौरवी शुक्ला, दीपशिखा, मोनिका राणा, पायल, मेघा कार्की, शिखा नौटियाल, प्रशांत, विपिन गुप्ता, वरुण रावत, हरिओम द्विवेदी, योगेश सनवाल, नाज़िया, केसन, संदीप कुमार मौजूद रहे।
