यमुना जल समझौताः सफल होते भागीरथी प्रयास

यमुना जल समझौताः सफल होते भागीरथी प्रयास

राजस्थान में कहावत है कि  जल थोड़ो नेह घणो तो दूसरी औैर घी  मांग्या मऴे पण  पाणी मांग्या नहीं मऴे। यानी राजस्थान में पानी भले ही कम हो पर नेह अर्थात स्नेह खूब है तो दूसरी और राजस्थान में घी आसानी से मिल जाता है पर पानी बहुत कम मिल पाता है। यह आज के नहीं सदियों से चले आ रहे हालात है। मृग मरिचिका की तरह पानी की तलाश में लंबी दूरिया तय करनी पड़ती थी पर आज हालात तेजी से बदल रहे हैं। पानी को लेकर समग्र प्रयास किये जा रहे है। राजस्थान नहर ने जहां पश्चिमी राजस्थान की तकदीर ही बदल दी है वहीं नदियों को जोड़ने या अतरिक्त पानी को संजोने के समग्र प्रयास किये जा रहे हैं। राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने मुख्यमंत्री का पद संभालते ही पानी को लेकर भागीरथी प्रयास शुरु किये और उन प्रयासों ने रंग लाना शुरु कर दिया है। यमुना जल समझौते के साथ ही राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के राजस्थानवासियों के लिए पानी की समस्या के समाधान के लिए किये जा रहे भागीरथी प्रयासों की कड़ी में एक और मनका जुड़ गया है। देश के लिए यह कोई नई बात नहीं है कि राजस्थान पानी की कमी से जूझता प्रदेश है। यहां पर पेयजल सहित पानी की निर्भरता बरसाती पानी को लेकर ही रही है। अत्यधिक दोहन के चलते जहां पानी उपलब्ध भी है तो वहां पर जलस्तर तेजी से नीचे जाता जा रहा है ऐसे में पानी को लेकर समग्र, समन्वित और योजनाबद्ध प्रयास किया जाना जरुरी हो जाता है।

केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह की उपस्थिति में राजस्थान और हरियाणा के बीच यमुना जल समझौते पर मेमोरण्डम ऑफ एग्रीमेंट एमओए के हस्तांतरण के साथ ही राजस्थान में यमुना जल के 32 साल पुराने सपने के साकार होने की राह प्रशस्त हो गई है। राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के प्रयासों का ही परिणाम है कि राजस्थान और हरियाणा के बीच ऐतिहासिक समझौता संपन्न हुआ है। राजस्थान और हरियाणा सरकार के बीच समझौते से खासतौर से शेखावटी के तीन जिले चुरु, झुन्झुनू और सीकर तक यमुना का जल पहुंच सकेगा। इससे इन जिलों की पेयजल और सिंचाई की समस्या का समाधान संभव हो सकेगा। दरअसल 12 मई, 1994 को उपरी यमुना जल बेसिन समझौता हुआ और इसके अनुसार राजस्थान को 10.4 प्रतिशत पानी मिलना था। पर 32 साल बीत जाने के बाद भी यह समझौता धरातल पर उतरने की स्थिति में नहीं आ सका। 29 जून, 2026 को नई दिल्ली के कर्तव्य भवन में केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह की उपस्थिति में केन्द्रीय जल संसाधन मंत्री सीआर पाटिल, हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की उपस्थिति पर ऐतिहासिक समझौते का परस्पर हस्तांतरण होना अपने आपमें महत्वपूर्ण हो जाता है।

लंबे समय से राजनीतिक आरोप प्रत्यारोपों के बीच राजस्थान में भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में नई सरकार के गठन के साथ ही राजस्थान में पानी की समस्या को दूर करने के लिए भागीरथी प्रयास शुरु कर दिए गए। उसी का परिणाम है कि पहले पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना ईआरसीपी पर बात बनी और उसके बाद रामजल सेतु लिंक प्रोजेक्ट धरातल पर आना शुरु हुआ। अब यमुना जल समझौते के साथ ही भजनलाल शर्मा के सही मायने में मरुधरा में पानी लाने के भागीरथी प्रयास आकार लेने लगे हैं। भजनलाल शर्मा की पानी को लेकर गंभीरता को इसी से समझा जा सकता है कि पिछले दिनों गंगा दशहरे से विश्व पर्यावरण दिवस तक वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान समूचे प्रदेश में संचालित किया गया। देखा जाए तो यह दूरदर्शी निर्णय और प्रयास जल संकट से निजात और बर्बाद होते  पानी के सदुपयोग की दिशा में बढ़ता कदम माना जाना चाहिए। दरअसल नदियों के बरबाद होते पानी का सही उपयोग तय करने के लिए 1999 में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई ने राष्ट्रीय नदी जोड़ो परियोजना आरंभ की थी। यह योजना सिरे से चढ़ती उससे पहले ही 2004 में नई  सरकार आते ही इस परियोजना को ठंडें बस्ते में ड़ाल दिया गया। इसके बाद 2012 में सर्वोच्च न्यायालय ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना को जारी रखने के केन्द्र सरकार को निर्देश दिए। राष्ट्रीय  जल विकास प्राधिकरण द्वारा 44605 करोड़ की लागत से केन-बेतवा लिंक परियोजना पर काम किया जा रहा है।

गंगानदी पर करीब एक हजार बांध हैं तो गोदावरी पर 350 के आसपास बांध है। इन बांधों पर पानी को सहेजते हुए नदियों के पानी को अनुपयोगी व बर्बादी का कारण बनने से बचाने के स्थान पर क्षेत्रों में पानी की समस्या का समाधान किया जाता है। जहां तक पार्वती, कालीसिंध, चंबल ईस्टर्न राजस्थान केनाल परियोजना का प्रश्न है। यह राजस्थान और मध्यप्रदेश सरकार व केन्द्र से सहमति नहीं बनने के कारण लंबे समय से आगे नहीं बढ़ पा रही थी। ईआरसीपी 13 जिलों, 9 लोकसभा क्षेत्रों और करीब 83 विधानसभा क्षेत्रों से जुड़ी होने के कारण यह परियोजना राजनीतिक आरोप प्रत्यारोप का कारण भी रही। इस परियोजना क्षेत्र में राज्य के झालावाड़, बारां, कोटा, बूंदी, सवाई माधोपुर, अजमेर, टोंक, जयपुर, दौसा, करौली, अलवर, भरतपुर और धौलपुर जिलों के निवासी लाभान्वित हो सकेंगे। यह कोई छोटा मोटा क्षेत्र नहीं है। 

देखा जाए तो ईआरसीपी परियोजना हो या रामजल सेतु लिंक योजना या फिर 29 जून को राजस्थान व हरियाणा के बीच संपन्न यमुना जल समझौता हो कुल मिलाकर इसे एक मुख्यमंत्री के भागीरथी प्रयास के रुप में देखा जा सकता है। पानी को सहेजना समय की मांग है और विशेषज्ञों का यह मानना है कि भविष्य का विश्वयुद्ध पानी को लेकर हो सकता है तो अमेरिका-ईरान युद्ध के दौरान सबसे अधिक चिंता का विषय यह भी रहा है कि कही आपसी लड़ाई में डीसेलाइन स्थानों पर आक्रमण हो गया तो पीने के पानी का गंभीर संकट हो जाएगा। हांलाकि ऐसा नहीं होना अच्छी बात रही है। खैर यह विषयांतर होगा। पर निश्चित रुप से भजनलाल शर्मा के पानी की समस्या हल करने के भागीरथी प्रयासों को देश के अन्य हिस्सों में भी आकार में लाने के ठोस प्रयास किये जाते हैं तो देश में पानी का संकट एक हद तक दूर किया जा सकेगा।


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