Passport, Aadhar, PAN, Voter Card अगर Indian Citizenship का सबूत नहीं हैं तो क्या है भारतीय नागरिकता का प्रमाण?

Passport, Aadhar, PAN, Voter Card अगर Indian Citizenship का सबूत नहीं हैं तो क्या है भारतीय नागरिकता का प्रमाण?

नई दिल्ली में पासपोर्ट सेवा दिवस के अवसर पर विदेश मंत्रालय की ओर से दिए गए एक बयान ने देशभर में नागरिकता से जुड़ी बहस को फिर तेज कर दिया है। मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि पासपोर्ट मुख्य रूप से यात्रा दस्तावेज है और इसे नागरिकता के प्रमाण के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। अधिकारी ने स्पष्ट किया कि पासपोर्ट विदेश में भारतीयों की राष्ट्रीयता की पुष्टि करता है, लेकिन यह नागरिकता का दस्तावेज नहीं है। इस बयान के सामने आते ही सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया और लोग यह पूछने लगे कि यदि पासपोर्ट, आधार कार्ड और मतदाता पहचान पत्र भी नागरिकता का अंतिम प्रमाण नहीं हैं, तो फिर भारत में नागरिकता साबित करने के लिए कौन-सा दस्तावेज मान्य है? 

विदेश मंत्रालय का यह स्पष्टीकरण भले ही पहले के न्यायालयीय निर्णयों के अनुरूप माना जा रहा हो, लेकिन इसका समय काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दरअसल हाल के वर्षों में नागरिकता को लेकर देश में लगातार बहस चल रही है, विशेषकर निर्वाचन आयोग की मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया के संदर्भ में। बिहार में इसी मामले की सुनवाई के दौरान उच्चतम न्यायालय की पीठ ने भी कहा था कि आधार का उपयोग केवल पहचान के प्रमाण के रूप में किया जा सकता है, नागरिकता के प्रमाण के रूप में नहीं।

अब विदेश मंत्रालय के बयान के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने तीखी प्रतिक्रियाएं दीं। एक उपयोगकर्ता ने भारतीय पासपोर्ट की तस्वीर साझा करते हुए पूछा कि जब उसमें राष्ट्रीयता भारतीय लिखी हुई है, तो फिर उसे नागरिकता का प्रमाण क्यों नहीं माना जा रहा? कई अन्य लोगों ने सवाल उठाया कि यदि पासपोर्ट, आधार और मतदाता पहचान पत्र भी पर्याप्त नहीं हैं, तो आखिर नागरिकता सिद्ध करने का आधार क्या होगा। कुछ लोगों ने इस बयान को विचित्र और भ्रम पैदा करने वाला बताया। उनका कहना था कि विदेशों में भारतीय होने की पहचान देने वाला दस्तावेज यदि देश के भीतर ही मान्य नहीं माना जाएगा, तो इससे लोगों में असमंजस और बढ़ेगा। 

इस विवाद के बीच  सरकार की प्रेस सूचना इकाई का वर्ष 2019 का एक पुराना प्रश्नोत्तर भी चर्चा में आ गया। राष्ट्रीय नागरिक पंजी से जुड़े उस प्रश्नोत्तर में कहा गया था कि जन्म तिथि और जन्म स्थान से संबंधित दस्तावेजों के आधार पर नागरिकता साबित की जा सकती है, हालांकि ऐसे स्वीकार्य दस्तावेजों पर अंतिम निर्णय अभी लिया जाना बाकी है। यही कारण है कि अब लोगों के बीच यह भ्रम और गहरा गया है कि आखिर कौन-सा दस्तावेज कानूनी रूप से नागरिकता सिद्ध करने के लिए पर्याप्त माना जाएगा?

इस बीच, विपक्षी दलों ने भी विदेश मंत्रालय के बयान को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। राज्यसभा सदस्य कपिल सिब्बल ने सवाल उठाया कि यदि पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाण नहीं है, तो फिर कौन-सा दस्तावेज है। उन्होंने आशंका जताई कि यदि किसी बूथ स्तर के अधिकारी को किसी व्यक्ति की नागरिकता पर संदेह हो जाए, तो उसे मतदान के अधिकार से भी वंचित किया जा सकता है। तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा ने तंज कसते हुए कहा कि आज के समय में भारतीय नागरिकता का प्रमाण शायद केवल यह रह गया है कि कोई व्यक्ति हिंदू हो और भारतीय जनता पार्टी का मतदाता हो। प्रचारअभियान और चुनाव

शिवसेना उद्धव गुट के नेता आदित्य ठाकरे ने विदेश मंत्रालय के बयान को हास्यास्पद बताते हुए पूछा कि पासपोर्ट जारी करने से पहले पुलिस आखिर किस बात का सत्यापन करती है। उन्होंने यह भी सवाल किया कि क्या भारत गैर भारतीयों को भी यात्रा दस्तावेज के रूप में पासपोर्ट जारी करता है। ठाकरे ने आशंका जताई कि इस तरह के बयान से अन्य देशों के मन में भी संदेह पैदा हो सकता है कि कहीं भारतीय पासपोर्ट गैर भारतीयों को तो नहीं दिया जाता। उन्होंने विदेश नीति को लेकर भी सरकार पर कटाक्ष किया और कहा कि इस प्रकार के बयान से देश की छवि प्रभावित हो सकती है।

कांग्रेस की केरल इकाई ने भी व्यंग्यात्मक टिप्पणी करते हुए कहा कि आधार केवल एक कार्ड है, पैन खाना पकाने के लिए है, मतदाता पहचान पत्र केवल दिखाने के लिए है और आयकर विवरणी केवल आय लौटाने के लिए है। पार्टी ने इस पूरे विवाद को लेकर केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए।

उधर, विदेश मंत्रालय ने अपने स्पष्टीकरण में यह भी कहा कि पासपोर्ट जारी करने से पहले विभिन्न  सरकारी एजेंसियों के दस्तावेजों के आधार पर विस्तृत जांच की जाती है। मंत्रालय ने नए चिप आधारित ई पासपोर्ट की विशेषताओं का भी उल्लेख किया, जिनमें जैविक पहचान संबंधी सूचनाएं शामिल हैं। अधिकारियों के अनुसार, इन उपायों का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय पासपोर्ट की स्वीकार्यता बढ़ाना और धोखाधड़ी की आशंका को कम करना है।

हालांकि विदेश मंत्रालय की कानूनी व्याख्या स्पष्ट है, लेकिन इस बयान ने एक बार फिर देश में नागरिकता और पहचान से जुड़े दस्तावेजों की विश्वसनीयता पर व्यापक बहस को जन्म दे दिया है। अब लोगों की नजर इस बात पर टिकी है कि सरकार भविष्य में नागरिकता प्रमाणन को लेकर कोई स्पष्ट नीति या दिशा-निर्देश जारी करती है या नहीं। वैसे हम आपको यह भी बता दें कि दुनिया के कई देशों में पासपोर्ट को नागरिकता के मजबूत प्रमाण के रूप में स्वीकार किया जाता है, हालांकि वहां भी इसे हर परिस्थिति में अंतिम और निर्विवाद प्रमाण नहीं माना जाता। अमेरिका में सरकारी दिशा निर्देशों के अनुसार वैध अमेरिकी पासपोर्ट नागरिकता के प्राथमिक प्रमाणों में शामिल है। कनाडा और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में भी पासपोर्ट नागरिकता का महत्वपूर्ण प्रमाण माना जाता है, लेकिन वहां अलग से नागरिकता प्रमाण पत्र की व्यवस्था भी मौजूद है। ब्रिटेन में भी पासपोर्ट को राष्ट्रीयता का प्रथम दृष्टया प्रमाण माना जाता है। हालांकि अंतरराष्ट्रीय कानून और कई देशों की कानूनी व्यवस्थाओं में यह सिद्धांत प्रचलित है कि पासपोर्ट मुख्य रूप से यात्रा दस्तावेज होता है और नागरिकता का अंतिम निर्णय संबंधित सरकारी अभिलेखों तथा नागरिकता प्रमाण पत्रों के आधार पर किया जा सकता है। कुल मिलाकर देखा जाए तो दुनिया के अधिकतर देश व्यवहारिक स्तर पर पासपोर्ट को नागरिकता के विश्वसनीय प्रमाण के रूप में स्वीकार करते हैं, जबकि बहुत कम देश ऐसे हैं जो भारत की तरह स्पष्ट रूप से यह कहते हैं कि पासपोर्ट केवल यात्रा दस्तावेज है और अपने आप में नागरिकता का अंतिम प्रमाण नहीं माना जा सकता।

बहरहाल, अंत में यह समझना जरूरी है कि फिलहाल भारत में नागरिकता साबित करने के लिए कोई एक सार्वभौमिक दस्तावेज तय नहीं है। कानूनी तौर पर नागरिकता का सबसे मजबूत प्रमाण भारत  सरकार द्वारा जारी नागरिकता प्रमाण पत्र माना जाता है, जो पंजीकरण या भारत की नागरिकता हासिल करने की सरकारी प्रक्रिया के आधार पर नागरिक बने लोगों को दिया जाता है। इसके अलावा जन्म प्रमाण पत्र, माता पिता की नागरिकता से जुड़े दस्तावेज, निवास और वंश संबंधी अभिलेख, पुराने सरकारी रिकॉर्ड, भूमि रिकॉर्ड, स्कूल प्रमाण पत्र तथा नागरिकता प्राप्ति से संबंधित सरकारी दस्तावेज भी महत्वपूर्ण माने जाते हैं। विभिन्न सरकारी स्पष्टीकरणों और न्यायालयीय टिप्पणियों में यह कहा गया है कि आधार, पैन, मतदाता पहचान पत्र और पासपोर्ट मुख्य रूप से पहचान या यात्रा दस्तावेज हैं, लेकिन अपने आप में नागरिकता का अंतिम प्रमाण नहीं माने जाते। हालांकि व्यवहारिक स्तर पर पासपोर्ट और मतदाता पहचान पत्र को कई सरकारी प्रक्रियाओं में भारतीय नागरिक होने के संकेतक के रूप में स्वीकार किया जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि नागरिकता से जुड़े विवाद की स्थिति में व्यक्ति को कई दस्तावेजों का संयुक्त आधार प्रस्तुत करना पड़ सकता है, विशेषकर जन्म तिथि, जन्म स्थान और पारिवारिक पृष्ठभूमि से संबंधित अभिलेख।


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