रायबरेली: उम्र सिर्फ एक संख्या है, इस बात को रायबरेली के रहने वाले 70 वर्षीय राजाराम मौर्य ने सच साबित कर दिखाया है। पढ़ने की अटूट ललक और कुछ कर गुजरने के जज्बे ने राजाराम को इस उम्र में भी सफलता की नई इबारत लिखने पर मजबूर कर दिया। उन्होंने हाईस्कूल की परीक्षा न केवल पास की, बल्कि 86 प्रतिशत अंक हासिल कर युवाओं के लिए एक बड़ी मिसाल पेश की है।
बैंक से रिटायर्ड, लेकिन सीखने की इच्छा बरकरार
रायबरेली शहर के मधुबन निवासी राजाराम मौर्य का करियर बेहद शानदार रहा है। वे पंजाब नेशनल बैंक (PNB) में सीनियर मैनेजर के पद पर कार्यरत थे। वर्ष 2016 में बैंक की सेवा से सेवानिवृत्त होने के बाद भी उनके भीतर का विद्यार्थी जीवित रहा। उनकी जन्मतिथि 11 दिसंबर 1956 है, जिसके अनुसार उनकी वर्तमान आयु 70 वर्ष है।
‘पढ़ने की कोई उम्र नहीं होती’
‘भारत समाचार’ के रिपोर्टर से हुई खास बातचीत में राजाराम मौर्य ने बताया कि पढ़ाई के प्रति उनकी ललक कभी कम नहीं हुई। सेवानिवृत्ति के बाद मिले खाली समय को उन्होंने ज्ञान अर्जित करने में लगाने का फैसला किया और हाईस्कूल की परीक्षा देने की ठानी। उन्होंने साबित कर दिया कि यदि मन में दृढ़ इच्छाशक्ति हो, तो किसी भी पड़ाव पर शिक्षा हासिल की जा सकती है।
हताश छात्रों के लिए प्रेरणा
अक्सर परीक्षा में कम अंक आने या असफलता मिलने पर हताश हो जाने वाले छात्रों के लिए राजाराम मौर्य का उदाहरण एक प्रेरणा है। उनकी यह उपलब्धि समाज को यह संदेश देती है कि सीखने के लिए न तो कोई उम्र सीमा होती है और न ही कोई बाधा। राजाराम की इस मेहनत और लगन की हर तरफ तारीफ हो रही है।
