कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सचिन पायलट ने मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर निर्वाचन आयोग पर निशाना साधते हुएशनिवार को कहा कि इस प्रक्रिया को लेकर आयोग के रवैये से लोगों के मन में चिंता है।
पायलट ने आरोप लगाया कि फील्ड स्टाफ पर अनावश्यक दबाव और जल्दबाजी में समयसीमा तय करने से पता चलता है कि प्रक्रिया में कुछ गड़बड़ है। राजस्थान के पूर्व उपमुख्यमंत्री ने यहां संवाददाताओं सेकहा, एसआईआर देश में पहले भी कई बार हुआ है। लेकिन कोई चर्चा नहीं होती थी, लोगों के मन में कोई आशंका नहींरहती थी। पहली बार निर्वाचन आयोग का जो रवैया रहा है। उससे लोगों के मन में चिंता है।
पायलट ने आरोप लगाया कि बिहार में नाम हटाये गये और वर्तमान प्रक्रिया में शामिल अधिकारी भारी दबाव में हैं। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा, क्योंकि बिहार में लोगों के नाम काटे गए। कई राज्यों में लोग तनाव में हैं, और कुछ तो इस दबाव के कारण आत्महत्या भी कर रहे हैं। यह इस बात का स्पष्ट संकेत है कि कुछ गड़बड़ हो रही है।
पूर्व उपमुख्यमंत्री ने कहा कि निर्वाचन आयोग को निष्पक्ष संस्था के रूप में काम करना चाहिए क्योंकि मतदाता सूची के शुद्धिकरण का काम निर्वाचन आयोग का है, किसी राजनीतिक दल का काम नहीं है।
पायलट ने कहा कि कांग्रेस देश भर में अभियान चला रही है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई भी नागरिक अपने मतदान के अधिकार से वंचित न हो। उन्होंने कहा, हम यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि गरीब लोग, दलित, आदिवासी और बुजुर्ग जागरुकता की कमी के कारण या किसी के द्वारा उनका नाम हटाने की मंशा के कारण मतदान के अपने संवैधानिक अधिकार से वंचित न हों।
कांग्रेस नेता ने कहा, निर्वाचन आयोग को निष्पक्षता से काम करना चाहिए और यदि विचारधारा, सरकार तथा नेता के दबाव में काम करोगे तो यह जनता और कांग्रेस पार्टी को स्वीकार नहीं होगा।
