सभी दोषी नहीं हैं,25,000 शिक्षकों की बर्खास्तगी को बरकरार रखे जाने के SC के फैसले पर बोलीं ममता बनर्जी

सभी दोषी नहीं हैं,25,000 शिक्षकों की बर्खास्तगी को बरकरार रखे जाने के SC के फैसले पर बोलीं ममता बनर्जी

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने गुरुवार को कहा कि वह सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले का समर्थन नहीं कर सकतीं, जिसमें राज्य में करीब 25,000 शिक्षकों की नौकरियों को अमान्य करार दिया गया है। ममता बनर्जी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि एक नागरिक के तौर पर मैं कह रही हूं कि मैं इस फैसले का समर्थन नहीं कर सकती। मुझे उम्मीद है कि इसे तोड़-मरोड़ कर पेश नहीं किया जाएगा। कोर्ट ने कहा है कि इन उम्मीदवारों की नियुक्तियां रद्द की जाती हैं। हालांकि, जो लोग नौकरी पर हैं, उनसे उनके द्वारा किए गए किसी भी भुगतान को वापस करने के लिए कहने की जरूरत नहीं है। 

पश्चिम बंगाल में भर्ती प्रक्रिया से जुड़े एक बड़े घटनाक्रम में सर्वोच्च न्यायालय ने राज्य द्वारा संचालित और राज्य-सहायता प्राप्त स्कूलों में 25,753 शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों की नियुक्तियों को अमान्य करार देने वाले कलकत्ता उच्च न्यायालय के फैसले को बरकरार रखा है। 3 अप्रैल, 2025 को दिए गए सर्वोच्च न्यायालय के फैसले ने पहले के फैसले की पुष्टि करते हुए कहा कि भर्ती प्रक्रिया गंभीर अनियमितताओं से दूषित थी, जिसके कारण इन नियुक्तियों को रद्द कर दिया गया। मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति संजय कुमार की अध्यक्षता वाली पीठ ने निष्कर्ष निकाला कि विचाराधीन भर्ती प्रक्रिया में बुनियादी तौर पर खामियां थीं। 

अपने फैसले में न्यायालय ने कहा कि भर्ती प्रक्रिया में हेराफेरी ने नियुक्तियों की ईमानदारी को इस हद तक प्रभावित किया है कि उन्हें बरकरार नहीं रखा जा सकता। न्यायाधीशों ने इस बात पर जोर दिया कि पूरी चयन प्रक्रिया दूषित और दागी थी, जिससे नियुक्तियां अमान्य हो गईं। न्यायालय का यह निर्णय कलकत्ता उच्च न्यायालय के अप्रैल 2024 के फैसले को पुष्ट करता है, जिसने पश्चिम बंगाल के विभिन्न विद्यालयों में 25,000 से अधिक कर्मचारियों की नियुक्तियों को रद्द कर दिया था। इस निर्णय के तहत, सर्वोच्च न्यायालय ने निर्देश दिया कि विवादास्पद भर्ती प्रक्रिया के दौरान नियुक्त किए गए सभी व्यक्तियों को उनके पदों से हटा दिया जाएगा। 


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