उत्तर प्रदेश के बरेली के सेटेलाइट बस अड्डे पर एक 3 साल का मासूम बच्चा रोता हुआ मिला. बच्चा इतना छोटा था कि वह अपना नाम और घर का पता तक नहीं बता पा रहा था. बस अड्डे पर मौजूद लोग उसकी हालत देखकर परेशान हो गए, लेकिन कोई समझ नहीं पा रहा था कि उसकी मदद कैसे करें. इस दौरान वहां ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों की नजर उस बच्चे पर पड़ी.
हेड कांस्टेबल योगेश कुमार ने तुरंत बच्चे को गोद में उठाया और उसे प्यार से शांत करने की कोशिश की. उन्होंने उसे टॉफी और केले दिए ताकि वह थोड़ा सहज महसूस कर सके. धीरे-धीरे बच्चा रोना बंद कर दिया और पुलिसकर्मियों से घुल-मिल गया. योगेश कुमार और उनकी टीम ने बच्चे से पूछने की कोशिश की कि वह कहां से आया है।लेकिन वह इतना छोटा था कि कुछ भी ठीक से नहीं बता पा रहा था. ऐसे में पुलिसकर्मियों ने ठान लिया कि वे उसके माता-पिता को ढूंढ कर ही दम लेंगे.
आस-पास के लोगों से शुरू की पूछताछ
बच्चे की पहचान करने के लिए पुलिस ने सबसे पहले आस-पास के लोगों से पूछताछ शुरू की, लेकिन कोई भी उसे पहचान नहीं सका. ऐसे में पुलिस ने बस अड्डे पर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालनी शुरू की ताकि पता चल सके कि बच्चा किसके साथ आया था और कहीं वह अपने परिवार से बिछड़ तो नहीं गया. इसके अलावा पुलिस टीम ने बस अड्डे पर खड़े ऑटो चालकों, यात्रियों और दुकानदारों से भी पूछताछ की. काफी कोशिशों के बाद पुलिस को एक अहम सुराग मिला. एक यात्री ने बताया कि उसने बच्चे को कुछ देर पहले एक महिला के साथ देखा था, जो घबराई हुई थी और इधर-उधर किसी को ढूंढ रही थी.
मां-बाप की तलाश में जुटी पुलिस
महिला के बारे में पता चलने के बाद पुलिस ने तेजी से जांच शुरू की. साथ ही आसपास के थानों में गुमशुदगी की कोई रिपोर्ट दर्ज है या नहीं, इसकी जानकारी ली. ऐसे में आखिरकार, पुलिस को पता चला कि बच्चे का परिवार थाना इज्जतनगर के मुड़िया अहमदनगर गांव का रहने वाला है. पुलिस ने तुरंत उस परिवार से संपर्क किया और उन्हें सूचना दी कि उनका बच्चा सुरक्षित है. बच्चे के माता-पिता यह खबर सुनकर रो पड़े और तुरंत पुलिस चौकी पहुंचे.
मां-बाप को देखते ही बच्चे की खुशी का ठिकाना नहीं रहा
पुलिस ने जैसे ही बच्चे को उसके माता-पिता को सौंपा, बच्चे ने दौड़कर अपनी मां को पकड़ लिया. मां भी अपने लाल को देखकर फूट-फूटकर रो पड़ी. बच्चे के पिता ने भी उसे गले से लगा लिया और कहा कि पुलिस ने जो किया, उसके लिए वे जिंदगीभर शुक्रगुजार रहेंगे. उन्होंने कहा कि अगर पुलिस समय पर उनके बच्चे को नहीं खोजती, तो न जाने क्या होता, यह सोचकर ही उनके रोंगटे खड़े हो जाते हैं.
पुलिस की सराहनीय पहल
बच्चे के परिवार ने हेड कांस्टेबल योगेश कुमार और उनकी टीम का आभार जताया. उन्होंने कहा कि पुलिस की यह पहल बहुत ही सराहनीय है. इस घटना ने यह साबित कर दिया कि पुलिस न केवल अपराध रोकने का काम करती है, बल्कि समाज की सुरक्षा और मदद के लिए हमेशा तैयार रहती है. वहीं बच्चे को उसके परिवार से मिलाने के बाद पुलिस टीम के सभी सदस्य भी खुश थे. उन्होंने कहा कि यह उनकी ड्यूटी का हिस्सा है और जब वे किसी जरूरतमंद की मदद कर पाते हैं, तो उन्हें संतोष मिलता है.