मशरूम की खेती से सालाना दो करोड़ का टर्नओवर:प्रोडक्शन, मार्केटिंग और डिस्ट्रीब्यूशन सब खेतों से

मशरूम की खेती से सालाना दो करोड़ का टर्नओवर:प्रोडक्शन, मार्केटिंग और डिस्ट्रीब्यूशन सब खेतों से

सफलता की ये कहानी है मिर्जापुर के उदय प्रताप की। उदय इन दिनों सैकड़ों ऐसे किसानों के आदर्श बने हुए हैं, जो पारंपरिक खेती से हटकर कुछ अलग करना चाहते हैं। एक सामान्य गांव में पले बढ़े उदय ने पढ़ाई पूरी होने पर नौकरी के लिए बहुत ज्यादा हाथ पैर नहीं मारे। बीएससी एग्रीकल्चर करने के दौरान ही उन्होंने ने डिसाइड कर लिया, नौकरी मांगने की बजाए नौकरी देने वाला बनूंगा।

कारोबार से लेकर नौकरी देने तक का मुकाम हासिल किया मशरूम की खेती करके। आज उदय का मशरूम की खेती से लगभग डेढ़ से दो करोड़ का सालाना का टर्नओवर है। इस कारोबार में उन्होंने 25 लोगों को रोजगार दे रखा है। प्रोडक्शन, मार्केटिंग और डिस्ट्रीब्यूशन तक सभी काम खेतों से ही हो रहे हैं। पूर्वांचल के सात-आठ जिलों के साथ उदय नेपाल तक अपनी मशरूम भेजते हैं।

उदय बताते हैं, मेरी शुरुआती पढ़ाई लिखाई गांव के प्राथमिक स्कूल में हुई। 12वीं करने तक मैं सोचता था कि पढ़ाई का मतलब सिर्फ नौकरी पाना होता है। घर वाले भी यही समझाया करते थे कि बेटा पढ़ लिखकर अच्छी नौकरी करना है, ताकि अच्छा जीवन यापन हो सके। किसान परिवार से जुड़ा हुआ था। इसलिए 12वीं के बाद मैंने मुरादाबाद के कॉलेज में एग्रीकल्चर से बीएससी में एडमिशन लिया। यहां एडमिशन लेने के बाद मेरी विचारधारा बिल्कुल बदल गई। यहां पढ़ाई के दौरान मुझे मशरूम कल्टीवेशन का चैप्टर पढ़ाया गया।

इस चैप्टर ने मेरे जीवन में बहुत बड़ा बदलाव किया। मैंने वहीं से डिसाइड कर लिया कि अब नौकरी नहीं करनी है। इसी क्षेत्र में आगे बढ़कर युवाओं को नौकरी दूंगा। पढ़ाई के दौरान ही मैंने इसकी मार्केटिंग, प्रोडक्शन और वर्किंग पर काम शुरू कर दिया। पढ़ाई पूरी होते ही मैं अपने मिशन में लग गया। परिवार कृषि कार्यों से जुड़ा हुआ था तो किसी ने ज्यादा ऐतराज भी नहीं जताया। सभी मेरे साथ आ गए।

वर्ष 2021 में शुरू की खेती, आज एक क्विंटल रोज का उत्पादन

उदय बताते हैं, अक्टूबर 2021 में मैंने मशरूम की खेती का काम शुरू कर दिया। घर में पहले से ही दलहन और तिलहन की खेती होती थी। मशरूम की खेती को पूरे साल करने के लिए कुछ अलग रणनीति बनानी थी। खेतों में हाल बनवाने थे, इससे घर वाले कुछ असहज हो रहे थे। उन्हें लगता था कि जो पारंपरिक खेती होती है, उससे भी हाथ धो बैठेंगे। लेकिन मेरे समझाने पर वे सभी राजी हो गए। सबसे पहले हमने 1 बीघा जमीन पर 2 चैंबर तैयार किए। दोनों हाल की माप 60×18× 18 है। दोनों हाल 1.17 लाख की लागत से तैयार हुए हैं। दोनों हाल में 5.5 टन के 2 स्पिलिट और 4 विंडो एसी लगाए गए हैं।

किसान क्रेडिट कार्ड से लिया था 17 लाख का लोन

उदय का कहना है,  हाॅल तैयार करने के बाद मैंने प्रोडक्शन का काम शुरू कर दिया। मशरूम की खेती कंपोस्ट में की जाती है। जो 28 से 32 दिन में तैयार हो जाता है। बीज डालने के बाद 16 से 25 डिग्री सेल्सियस तक समय के अनुसार तापमान रखा जाता है। समय के हिसाब से ही एसी का तापमान सेट कर दिया जाता है। 45 दिन में मशरूम बेचने के लिए तैयार हो जाता है। जब कारोबार ठीक ठाक चलने लगा तो मैंंने बैंक से किसान क्रेडिट कार्ड पर 17 लाख का लोन भी लिया था। जिसे अब चुका दिया गया है। 

सालाना दो करोड़ तक ट्रांजेक्शन, नेपाल तक सप्लाई

प्रोडक्शन के बाद बिक्री पर उदय बताते हैंं,  शुरुआती दौर में मशरूम की सप्लाई अपने जिले मिर्जापुर शहर में ही की। धीरे-धीरे जब प्रोडक्शन बढ़ने लगा तो यह अंदाजा लगने लगा कि सिर्फ मिर्जापुर के बाजार से ही काम नहीं चलेगा। इसके लिए मैंने वाराणसी, प्रयागराज, सोनभद्र और आसपास के जिलों के बाजारों में एक्सप्लोर किया। यहां की मंडियों से अच्छा रिस्पॉन्स आने लगा। धीरे-धीरे मंडियों में बंधे हुए दुकानदार हो गए। अब वे रोज ऑर्डर कर देते हैं। हम उन्हें डिमांड के अनुसार मशरूम भेज देते। 40 से 50 किलो मशरूम नेपाल तक सप्लाई होती है। इसके लिए प्रोडक्शन से मार्केटिंग तक के लिए 25 लोगों को रोजगार पर रखा है।

उदय बताते हैं, मशरूम की कीमत बाजार में 300 से 350 रुपए प्रति किलो है। प्रति साल डेढ़ से 2 करोड़ रुपये का मशरूम निकल जाता है। प्रोडक्शन, मार्केटिंग और डिस्ट्रीब्यूशन कास्ट निकालकर मशरूम से साल में 30 से 40 लाख रुपए तक की शुद्ध कमाई हो जाती है। प्लांट में प्रति दिन डेढ़ से 2 किलो मशरूम की तोड़ाई होती है। यहीं से डिब्बे में पैक किया जाता है।

कारोबार बढ़ रहा है, 7 चैम्बर और बनवाऊंगा

उदय कहते हैं, कारोबार लगातार बढ़ रहा है अब चैंबर बढ़ाकर 7 चैम्बर का लक्ष्य तय किया है। हमारी मेहनत का हमको सही दिशा में परिणाम मिल रहा है। धीरे--धीरे इसे अपने ब्रांड के नाम से पैक करवाना शुरू करवा दूंगा। एसी चैंबर में प्रतिदिन करीब एक क्विंटल मशरूम का उत्पादन हो रहा है। बाजार में मांग बढ़ने से मुनाफे में भी बढ़ोतरी हो जाती है। बेचने के लिए भटकना नहीं पड़ता है। शुरुआती दिनों में उन्होंने प्रैक्टिकल ज्ञान के लिए हिमाचल प्रदेश के चम्पा घाट के DMR से 15 दिन की ट्रेनिंग ली थी

युवाओं की घरों में रह कर हो रही है अच्छी कमाई

मशरूम की खेती को लेकर जिला उद्यान अधिकारी मेवाराम ने बताया, किसान सितंबर से लेकर मार्च तक मशरूम की खेती करते हैं। मिर्जापुर में खेती एसी चैंबर में पूरे साल की जा रही है। बताया कि जिले में युवाओं का खेती के तरफ रुझान बढ़ा है। जिले में स्ट्राबेरी, केले और मशरूम की खेती कर लोग अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं। घर पर रह कर उन्हें अच्छी आमदनी प्राप्त हो रही है।

जिला उद्यान अधिकारी ने बताया, आधुनिक खेती करने पर किसानों को हर तरह से सुविधा दी जा रही है। किसानों को 40% सब्सिडी दी जा रही है। प्रोजेक्ट फाइल पास होने पर बैंक से लोन लेने में भी मदद की जा रही है।


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