UP:भूकंप के झटके,नेपाल-चीन में भूकंप के केंद्र, 5.4 तीव्रता रही, लखनऊ, बरेली-मुरादाबाद में घरों के पंखे हिले तो लोग भागे

UP:भूकंप के झटके,नेपाल-चीन में भूकंप के केंद्र, 5.4 तीव्रता रही, लखनऊ, बरेली-मुरादाबाद में घरों के पंखे हिले तो लोग भागे

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ समेत दिल्ली-एनसीआर में भूकंप के झटके महसूस किए गए। भूकंप का केंद्र नेपाल चीन बॉर्डर के पास बताया जा रहा है। 5.4 की तीव्रता से भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं। फिलहाल किसी भी जनहानि की अभी तक की सूचना नहीं मिली है।

30 सेकेंड तक झटके लगते रहे, लोग घबराए

लखनऊ, बरेली, मुरादाबाद, पीलीभीत, अयोध्या, गोरखपुर समेत तकरीबन सभी शहरों में लोगों ने 30 सेकेंड तक झटके महसूस किए हैं। कई शहरों में लोग घबराकर घरों से बाहर निकल आए। दफ्तर की छतों पर जाकर सुरक्षित हुए। ये झटके मंगलवार करीब 2.30 बजे महसूस किए गए हैं।

भूकंप की तीव्रता 5.4 आंकी गई है। इसका एपिसेंटर नेपाल में था। भूकंप का केंद्र नेपाल के कालिका से 12 किमी दूर था। इसका असर नेपाल के अलावा भारत और चीन पर भी पड़ा है। दिल्ली-एनसीआर में दोपहर 2:28 बजे 30 सेकेंड तक भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं। इससे पहले नवंबर में तीन बार भूकंप के झटके महसूस किए जा चुके हैं। मंगलवार को आए भूकंप के झटके मुरादाबाद के अलावा अमरोहा, बिजनौर, संभल और आसपास के जिलों में भी महसूस किए गए हैं।

इससे पहले 8 नवंबर की रात आया था भूकंप

इससे पहले UP में 8 नवंबर की रात भूकंप महसूस किए गए थे। पड़ोसी देश नेपाल में आए भूकंप से यूपी के कई शहरों में तेज झटके महसूस किए गए। पहली बार रात 8:52 बजे भूकंप आया। इसकी तीव्रता 4.9 रही है। दूसरी बार, रात 1:57 बजे भूकंप आया। इसकी तीव्रता 6.3 थी। इसके झटके गोरखपुर, लखनऊ, कानपुर, बरेली, वाराणसी, प्रयागराज, गाजियाबाद, मुरादाबाद समेत कई जिलों में महसूस हुए। नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी के अनुसार, दोनों ही बार भूकंप का एपिसेंटर पड़ोसी देश नेपाल रहा है। रात 1.57 पर आए भूकंप का केंद्र नेपाल के मणिपुर में जमीन से 10 किमी नीचे रहा है।

अगस्त में भी झटके महसूस हुए थे

यूपी में 20 अगस्त की रात 1.12 बजे भूकंप आया था। भूकंप के झटके लखनऊ, सीतापुर, बहराइच, कानपुर, प्रयागराज, वाराणसी गोरखपुर में महसूस किए गए थे। रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 5.2 मापी है। भूकंप का केंद्र लखनऊ से 139 किलोमीटर दूर उत्तर-उत्तर पूर्व में नेपाल और बहराइच सीमा पर भेरी में रहा। गहराई जमीन से 82 किलोमीटर नीचे थी।

भू-वैज्ञानिकों का कहना है कि भूकंप का खतरा हर जगह अलग-अलग होता है। इस खतरे के हिसाब से देश या प्रदेश को चार हिस्सों में बांटा गया है। जोन-2, जोन-3, जोन-4 और जोन-5 नाम दिया गया है। सबसे कम खतरे वाला जोन-2 है। सबसे ज्यादा खतरे वाला जोन-5 है।

जोन- 4 : सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, बागपत, बिजनौर, मेरठ, गाजियाबाद, गौतमबुद्ध नगर, रामपुर, मुरादाबाद, बुलंदशहर, श्रावस्ती, बलरामपुर, सिद्धार्थनगर, महाराजगंज, कुशीनगर, पीलीभीत, सहारनपुर, लखीमपुर खीरी, बदायूं, बहराइच, गोंडा, मथुरा, अलीगढ़, बरेली, बस्ती, संतकबीरनगर, देवरिया और बलिया जिला भूकंप के हाईरिस्क में रहते हैं। यानी यहां सबसे ज्यादा खतरा है।

जोन- 3: सोनभद्र, चंदौली, गाजीपुर, वाराणसी, जौनपुर, आजमगढ़, गोरखपुर, सुल्तानपुर, रायबरेली, अयोध्या, उन्नाव, लखनऊ, बाराबंकी, सीतापुर, हरदोई, कन्नौज, मैनपुरी, फिरोजाबाद, एटा, फर्रुखाबाद, मिर्जापुर। यह जोन-3 में हैं।

जोन-2: ललितपुर, झांसी, महोबा, बांदा, कौशांबी, प्रयागराज के अलावा आगरा, इटावा, औरैया, कानपुर नगर, फतेहपुर, प्रतापगढ़ भूकंप के जोन-2 में है।​​​​​​​

क्यों आता है भूकंप?

भूगर्भ वैज्ञानिकों के मुताबिक, भूकंप की असली वजह टेक्टोनिकल प्लेटों में तेज हलचल होती है। इसके अलावा उल्का प्रभाव और ज्वालामुखी विस्फोट, माइन टेस्टिंग और न्यूक्लियर टेस्टिंग की वजह से भी भूकंप आते हैं। रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता मापी जाती है। इस स्केल पर 2.0 या 3.0 की तीव्रता का भूकंप हल्का होता है, जबकि 6 की तीव्रता का मतलब शक्तिशाली भूकंप होता है।

ऐसे लगाते हैं भूकंप की तीव्रता का अंदाजा

भूकंप की तीव्रता का अंदाजा उसके केंद्र (एपिसेंटर) से निकलने वाली ऊर्जा की तरंगों से लगाया जाता है। सैकड़ों किलोमीटर तक फैली इस लहर से कंपन होता है। धरती में दरारें तक पड़ जाती हैं। भूकंप का केंद्र कम गहराई पर हो तो इससे बाहर निकलने वाली ऊर्जा सतह के काफी करीब होती है, जिससे बड़ी तबाही होती है।


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