इंदौर:सिंधी मंदिरों में गुरुग्रंथ साहिब की जगह रामचरितमानस का पाठ,निहंगों के ऐतराज के बाद इंदौर में बड़ा बदलाव

इंदौर:सिंधी मंदिरों में गुरुग्रंथ साहिब की जगह रामचरितमानस का पाठ,निहंगों के ऐतराज के बाद इंदौर में बड़ा बदलाव

इंदौर में सिंधी समाज के मंदिर-आश्रमों में गुरुग्रंथ साहिब की कथित बेअदबी के आरोप के बाद बड़ा बदलाव आया है। यहां अलग-अलग स्थानों से 92 गुरुग्रंथ साहिब हटा दिए हैं, लेकिन आगे क्या होगा? यहां कैसे पूजन-पाठ हाे रहा है, यह जानने के लिए दैनिक भास्कर ने इंदौर के सिंधी मंदिरों में पड़ताल की। जिन स्थानों पर गुरुग्रंथ साहिब विराजित थे, वहां अब दूसरे ग्रंथ रख दिए हैं। कहीं श्रीमद् भागवत महापुराण तो कहीं रामचरित मानस है, कहीं सिद्धांत सागरग्रंथ भी.

स्पॉट : सिंधु नगर का श्रीमोहनधाम

जूनी इंदौर क्षेत्र में है सिंधु कॉलोनी। यहां पर सिंधी समाज का मंदिर है श्री मोहन धाम। पहले ये मंदिर इंदौर के हरसिद्धि क्षेत्र में हुआ करता था। 1982-84 के वक्त ये मंदिर सिंधु कॉलोनी में बना। मंदिर जब हरसिद्धि में था उस वक्त से ही श्री गुरु ग्रंथ साहिब का पूजन-पाठ किया जाता था, लेकिन जब मंदिर सिंधु नगर में बना तब यहां भी श्री गुरु ग्रंथ साहिब का पाठ जारी रखा गया।

इस मंदिर में अंदर घुसते ही दाहिने हाथ पर शिव मंदिर बना है। जहां लोग भगवान की पूजा-अर्चना करते हैं। अंदर की तरफ संतों की मूर्तियां हैं। इसके साथ ही संत की गादी भी यहां है, जहां उनकी चरण पादुका भी रखी है। मंदिर में भगवान की कुछ मूर्तियां भी रखी हैं, जिनका पूजन किया जाता है। यहां के छोटे से हाल में ही समाजजन भगवान का पाठ, भजन करते हैं।

यहां सुबह 8.30 बजे से 10 बजे तक पाठ होता है। ये पाठ रोजाना होता है, फिर चाहे इसमें भक्तों की संख्या कम ही क्यों न हो। यहां काफी वक्त से श्री गुरु ग्रंथ का पाठ किया जा रहा था। समाज की महिलाएं यहां भजन-कीर्तन करती हैं।

मंदिर की देख-रेख करने वाले सिंधी साधु समाज के अध्यक्ष गुरुचरण दास यहां के गादीपति हैं। उनका कहना है कि दादा-परदादा के वक्त से उनके पास श्री गुरुग्रंथ साहिब था। कुछ साल पहले उनके यहां भी निहंग आए थे। बीच-बीच में उन्होंने श्री गुरु ग्रंथ साहिब को हटाया भी था, लेकिन अभी जो स्थिति बनी उसके बाद हमने पूरे सम्मान के साथ श्री गुरु ग्रंथ साहिब को विदा कर ऐतिहासिक गुरुद्वारा इमली साहिब में जमा करा दिया है।

सिद्धांत सागर और रामचरित मानस का पाठ

गुरुचरण दास जी का कहना है कि हमारे यहां गुरु श्रीचंद हमारे आचार्य हैं। यहां सिद्धांत सागर का पाठ किया जाने लगा है। उनका ही वचन लेकर वाक्य लेकर संगत को उसका भावार्थ बताया जाने लगा है। उन्हीं का सत्संग कर रहे हैं। उनके साथ ही रामचरित मानस भी यहां रखा गया है। उनका पाठ भी किया जाता है। रामचरित मानस के दोहे, चौपाई पढ़कर वाक्य लेकर उसका भावार्थ सत्संगियों को सुनाते हैं।

स्पॉट 2 : सिंधी कॉलोनी का स्वामी हरिनारायण धाम

सिंधी कॉलोनी में है स्वामी हरिनारायण धाम। यहां भी काफी समय से श्री गुरुग्रंथ साहिब थे। मगर समाज के साधु-संतों के निर्णय के बाद यहां से भी श्री गुरु ग्रंथ साहिब को गुरुद्वारा इमली साहिब में जमा करा दिया है। मंदिर में प्रवेश के साथ ही प्रभु का स्थान बना है। मंदिर की छत पर कांच की नक्काशी देखने को मिलती है। साथ ही यहां भगवान राधा-कृष्ण, सीता-राम, लक्ष्मण, हनुमान, भगवान गणेश सहित कई मूर्तियां और तस्वीरें यहां रखी हैं।

मंदिर की छत पर कांच की नक्काशी से एक स्लोगन भी लिखा है- बुरा जो देखन मैं चला मिला बुरा न मिलिया कोय, जो खोजा मन आपना मुझसे बुरा न कोय।

यहां की संचालिका सरिता उदासी का कहना है कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब को हमने नम आंखों से विदा किया। हम ग्रंथ साहिब को विदा कर दुखी हैं। बाबा जी के लिए हमारे मन में बहुत स्नेह और आदर भाव है। जितना हमसे आदर होता था हम करते थे। सभी का जैसा फरमान आया वैसा ही हमने किया।

वे बताती हैं कि पिछले कई वर्षों से उनके यहां श्री गुरु ग्रंथ साहिब थे। जब वे ज्यादा पुराने हो गए थे तो वे गुरुद्वारा इमली साहिब में जमा कर दिए थे। फिर वे दूसरे गुरु ग्रंथ साहिब मंदिर के लिए लेकर आए थे।

सिद्धांत सागर ग्रंथ और श्रीमद् भागवत महापुराण रखी

सरिता उदासी का कहना है कि जिस स्थान पर उन्होंने श्री गुरु ग्रंथ साहिब रखे थे, अब वहां पर सिद्धांत सागर ग्रंथ और श्रीमद् भागवत महापुराण रखी है। अब इनका ही पाठ किया जा रहा है। जब उनसे पूछा गया कि अगर आपको श्री गुरु ग्रंथ साहिब वापस दिए जाएंगे तब वे क्या करेंगी तो उनका स्पष्ट कहना था कि वापस लेने पर वे विचार करेंगे, समाज के साथ जाएंगे। जैसा निर्णय आएगा वे भी वैसा ही करेंगी।

अब तक 92 श्री गुरु ग्रंथ साहिब हो चुके हैं जमा

दिसम्बर और जनवरी के महीने में निहंगों का एक समूह पार्श्वनाथ नगर और राजमहल कॉलोनी में स्थिति सिंधी मंदिरों में पहुंचा था। यहां उन्होंने श्री गुरु ग्रंथ साहिब को जिन हालत में देखा उसके बाद उन्होंने मंदिर के कर्ताधर्ताओं को श्री गुरु ग्रंथ साहिब को सही तरीके से रखने की सलाह भी दी थी। राजमहल कॉलोनी में तो वे श्री गुरु ग्रंथ साहिब अपने साथ ही लेकर चले गए थे। इस मामले के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद ये मामला देशभर में फैल गया।

सिंधी समाज के लोगों को इसका पता चला तो उन्होंने आपस में बैठक की, समाज के संतों के साथ चिंतन-मनन किया। इसमें ये तय किया गया कि वे गुरु ग्रंथ साहिब जमा करा देंगे। 11 जनवरी को ही शहर के विभिन्न हिस्सों से समाजजन संतों के साथ ऐतिहासिक गुरुद्वारा इमली साहिब पहुंचे और वहां पर श्री गुरुग्रंथ साहिब को जमा कराया। अब तक 92 श्री गुरुग्रंथ साहिब को गुरुद्वारे में जमा कराया जा चुका है। हालांकि ये पूरा मामला इंदौर में अभी भी चर्चाओं में है। इस मामले में सिंधी समाज के महामंडलेश्वर हंसराम महाराज (भीलवाड़ा) द्वारा आगे का निर्णय लिया जाएगा।

इंदौर में सिंधी समाज के मंदिर-आश्रमों से 90 से ज्यादा गुरुग्रंथ साहिब (सिखों का सबसे पवित्र ग्रंथ) को अचानक लौटा दिए जाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। समाज ने कहा है कि गुरुग्रंथ साहिब को अब हमारे मंदिरों-आश्रमों में पुन: विराजित करना है या नहीं, इसका फैसला हमारे संत ही करेंगे।

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