नकारा-निकम्मा पर थरूर बोले- साथियों के लिए सोचकर बोलना चाहिए:कहा- मैंने अपने विरोधियों को भी नहीं कहे ऐसे शब्द

नकारा-निकम्मा पर थरूर बोले- साथियों के लिए सोचकर बोलना चाहिए:कहा- मैंने अपने विरोधियों को भी  नहीं कहे ऐसे शब्द

सीएम अशोक गहलोत के सचिन पायलट को नकारा-निकम्मा कहने काे कांग्रेसी सांसद शशि थरूर ने गलत ठहराया है। उन्होंने कहा- जब हम अपने साथियों के बारे में बोल रहे हैं तो सोच समझकर बोलना चाहिए।

मुझे राजनीति में 14 साल का वक्त हो गया है। मैंने किसी के बारे में कभी भी ऐसा कुछ कहने या उकसाने की कोशिश नहीं की। मैं राजनीति में कभी भी कीचड़ कुश्ती नहीं करना चाहता। यही सोचकर मैंने काफी इश्यूज को अवॉइड किया। थरूर शनिवार को जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल (जेएलएफ) में एक सवाल का जवाब दे रहे थे।

थरूर ने कहा कि मैं अपने साथियों से यही रिक्वेस्ट करता हूं कि अपने ही भाई-बहनों के बारे में ऐसे कहना अच्छा नहीं है। हमें अपने मतभेदों को मिटाने की कोशिश करनी चाहिए। लोगों के अलग-अलग विचार भी हो सकते हैं। इसे कहने के दूसरे तरीके भी हो सकते हैं। मैं भी चाहूंगा कि पार्टी के अंदर हमें एक-दूसरे से प्रेम से रहना चाहिए। मैंने अपने विरोधियों को भी ऐसे शब्द नहीं कहे।

सांसद ने कहा- मैंने पिछले 21 सालों से किताब नहीं लिखी है। क्योंकि मैं राजनीति और देश से जुड़े महत्वपूर्ण विषय में काम कर रहा हूं। यही कारण है कि मुझे रोमांस के बारे में भी लिखने का मौका नहीं मिल पाया। जब आप सभी मुझे राजनीति से बाहर भेज देंगे, तब रोमांस और दूसरे मुद्दों पर लिखने की कोशिश करूंगा। वैसे भी मुझे रोमांस पर लिखने और नोबेल को लेकर कई चिट्ठियां मिलती है। ऐसे में वक्त मिलने पर इस पर जरूर लिखूंगा।

सवाल खड़े करना ज्यूडिशियरी को दबाने का संकेत नहीं

ज्यूडिशियरी पर उठ रहे सवालों पर थरूर ने कहा- सवाल पूछना ज्यूडिशियरी को दबाने का संकेत नहीं है। मेरा मानना है कि संविधान ने ज्यूडिशियरी को स्वतंत्र और स्वायत्त स्टेटस दिया है। मुझे लगता है सत्ता में बैठे लोगों की ओर से यह सिद्धांत नहीं अपनाया जा रहा है। उनके पास वास्तव में ज्यूडिशियरी पर प्रेशर बनाने की क्षमता है। ऐसे में ज्यूडिशियरी को मजबूत करने की जरूरत है। जहां भी ज्यूडिशियरी के अधिकारों और संविधान की बात आएगी, हमें उसकी रक्षा के लिए बोलना चाहिए।

पार्टी में दो राय हो सकती है, लेकिन सभी BJP के खिलाफ

थरूर ने कहा- हमारे देश में कोई भी पार्टी हो। उसके अंदर सबकी एक जैसी राय नहीं है। BJP में भी हर विषय पर हर व्यक्ति की एक ही राय नहीं है। मेरा मानना है कि लोकतंत्र में दो लोगों की राय में फर्क हो सकता है। अगर आपकी विचारधारा एक है और आप एक ही मकसद के लिए लड़ रहे हैं, तो अंत में कौन लीड करेगा। यह तो पार्टी को तय करना पड़ेगा।

कोई न कोई मतभेद सभी जगह होते हैं

उन्होंने कहा- BJP में कौन-कौन नेतृत्व कर रहे हैं। कांग्रेस में कौन-कौन नेतृत्व कर रहे हैं। इसका मतलब ये नहीं है कि दूसरे लोग भी अपने आप को कामयाब नहीं मानते हैं। अभी वो लोग अधिकार में नहीं है। किसी भी पार्टी में अंदरूनी लड़ाई मेरे ख्याल में हकीकत है। कुछ न कुछ, कोई न कोई मतभेद सभी जगह होते हैं। उन्होंने कहा कि हमारी पार्टी में सभी की सोच अलग हो सकती है। सभी कांग्रेसी नेता बीजेपी के खिलाफ हैं।


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