पूर्वोत्तर में BJP के लिए घर बचाने की चुनौती:त्रिपुरा में आसान नहीं वापसी, नगालैंड-मेघायल में कद बढ़ाने का टारगेट

पूर्वोत्तर में BJP के लिए घर बचाने की चुनौती:त्रिपुरा में आसान नहीं वापसी, नगालैंड-मेघायल में कद बढ़ाने का टारगेट

भाजपा के लिए त्रिपुरा में जीत दोहराने के साथ नगालैंड और मेघालय में गठबंधन के जरिए सत्ता बचाना बड़ी चुनौती साबित होगी। तीनों राज्यों की 180 सीटों के चुनाव नतीजे 2024 लोकसभा चुनाव के लिए पूर्वोत्तर का सियासी मिजाज भी बताएंगे। त्रिपुरा में भाजपा के लिए अपना घर बचाना आसान नहीं होगा।

नगालैंड में अब तक सत्तारूढ़ गठबंधन की जूनियर पार्टनर भाजपा कद बढ़ाना चाहेगी। वहीं, मेघालय में कोनारड संगमा की एनपीपी और भाजपा ने चुनाव बाद गठबंधन के संकेत दिए हैं। तृणमूल के मुकुल संगमा मुकाबले को रोचक बनाएंगे।

त्रिपुरा में सीएम को बदल भाजपा खेल चुकी दांव

बांग्लादेशी घुसपैठियों के मुद्दे और एकजुट हिंदू वोट बैंक के जरिए त्रिपुरा में बीजेपी सत्ता में आई। फिर मई 2022 में एंटी इन्कम्बैंसी से निपटने के लिए भाजपा ने सीएम बिप्लब देब को हटाकर माणिक साहा को सीएम पद सौंप दिया। त्रिपुरा में भाजपा को इस चुनाव में वोट शेयर बढ़ाना होगा।

2018 में बीजेपी को त्रिपुरा में मिली थीं 36 सीटें

उधर, कांग्रेस और वाम गठबंधन की तैयारी में है। त्रिपुरा के पूर्व राजपरिवार के प्रद्युत देव बर्मन की टिपरा मोठा पार्टी और आदिवासी अधिकार पार्टी आईपीएफटी भी मैदान में है। 2018 के विधानसभा चुनाव में त्रिपुरा की 60 सीटों में से भाजपा ने 36 पर जीत हासिल की थी। वहीं, सीपीएम को 16 और आईपीएफटी को 8 सीटें हासिल हुई थी।

16 और 17 जनवरी को दिल्ली में बीजेपी के राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक हुई। इसमें तय किया गया कि मध्य प्रदेश, कर्नाटक और त्रिपुरा में पार्टी मौजूदा मुख्यमंत्री के नेतृत्व में ही चुनाव लड़ेगी। बैठक में यह भी तय किया गया है कि सरकार की ओर से कोई भी बड़ा फैसला लेने से पहले संगठन प्रमुख को विश्वास में जरूर लिया जाए।

चुनावी राज्यों में नहीं बदला जाएगा सीएम

भाजपा के एक वरिष्ठ नेता का कहना है कि चुनावी राज्यों के सीएम या नेता विपक्ष को बदला नहीं जाएगा, लेकिन सीएम अपने मंत्रिमंडल और पार्टी अध्यक्ष अपनी टीम में बदलाव कर सकते हैं। छत्तीसगढ़ और राजस्थान जैसे राज्यों में जहां भाजपा विपक्ष में है, वहां सीएम का चेहरा घोषित कर चुनाव में जाना है या फिर सामूहिक नेतृत्व में चुनाव लड़ना है, इसका फैसला चुनाव से कम से कम छह महीने पहले ही कर लिया जाएगा। त्रिपुरा और कर्नाटक विधानसभा के चुनाव नतीजे आने के बाद सीएम चेहरे को लेकर विचार-विमर्श शुरू हो सकता है।

तीनों ही राज्यों में 2 मार्च को आएंगे नतीजे

बता दें कि चुनाव आयोग ने 18 जनवरी को त्रिपुरा, नगालैंड और मेघालय में विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान किया। त्रिपुरा में 16 फरवरी जबकि नगालैंड और मेघालय में 27 फरवरी को वोटिंग होगी। तीनों ही राज्यों में 2 मार्च को मतगणना होगी।


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