KGMU: शिक्षक भर्ती पर विवाद; आरक्षण का फंसा पेंच, आर्थिक कोटे में ज्यादा पद देने का आरोप

KGMU: शिक्षक भर्ती पर विवाद; आरक्षण का फंसा पेंच, आर्थिक कोटे में ज्यादा पद देने का आरोप

KGMU यानी किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी में शिक्षक भर्ती को लेकर विवाद शुरू हो गया हैं। आरोप हैं कि विज्ञापन में EWS यानी आर्थिक रूप से कमजोर कोटे में तय से ज्यादा पद दे दिए गए। राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग से इसकी शिकायत की गई है।

आयोग ने KGMU रजिस्ट्रार से जवाब मांगते हुए 18 जनवरी को तलब किया हैं। ऐसे में भर्ती प्रक्रिया बाधित होने की आशंका हैं। पिछले साल जुलाई में शिक्षकों के 200 पदों पर भर्ती के लिए विज्ञापन निकाला था। इस बीच NAAC इवैल्यूएशन के लिए टीम भी विश्वविद्यालय परिसर का दौरा करेगी। अहम बात यह हैं कि मूल्यांकन में शिक्षकों की संख्या पर भी मार्किंग होती हैं। ऐसे में जानकार इसको लेकर रेटिंग में गिरावट होने की आशंका भी जता रहे हैं।

यह हैं पूरा मामला

दरअसल KGMU के अनुसूचित जाति जनजाति चिकित्सा शिक्षक एसोसिएशन ने भर्ती प्रक्रिया में आरक्षण के नियमों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए आयोग से शिकायत की थी। एसोसिएशन के महासचिव डॉ. हरीराम का आरोप है कि EWS कोटे में 10% से ज्यादा आरक्षण दिया गया है, जिससे अन्य आरक्षित वर्ग के पद कम हो गए हैं। उनके अनुसार 220 में से सिर्फ 111 पद नए हैं। बाकी बैकलॉग भर्ती के हैं। ऐसे में EWS कोटा सिर्फ 111 पदों पर ही होना चाहिए, लेकिन KGMU ने इस कोटे में 23 पद कर दिए हैं। यह नियमों के खिलाफ है।

EWS कोटे में डॉक्टरों का मिलना मुश्किल

केजीएमयू ने पिछली बार शिक्षकों के 256 पदों पर भर्ती के लिए विज्ञापन निकाला था। इसमें गरीब सवर्णों के लिए 15 पद आरक्षित थे, लेकिन यूनिवर्सिटी को इस कोटे के तहत एक भी चिकित्सक नहीं मिल सका था। इसके अलावा KGMU में असिस्टेंट प्रोफेसर पद पर भर्ती के लिए पीजी डिग्री के साथ तीन साल सीनियर रेजीडेंट के पद पर काम करने की अनिवार्यता है। ईडब्ल्यूएस कोटे में आने के लिए अभ्यर्थी की कुल पारिवारिक आय आठ लाख रुपये सालाना से कम होनी चाहिए। डॉक्टर के रूप में सीनियर रेजीडेंट को एक लाख से ज्यादा वेतन मिलता है।

इस लिहाज से उसे सालाना 8 लाख रुपये से ज्यादा वेतन मिलता है। इसमें पारिवारिक आय जुड़ने पर यह रकम और ज्यादा हो जाती है। निजी अस्पताल में भी इस क्राइटेरिया के डॉक्टर को एक लाख रुपये से ज्यादा वेतन मिलता है। ऐसे में न्यूनतम अर्हता पूरी करते ही अभ्यर्थी EWS कोटे से बाहर हो जाता है। यही कारण हैं कि इस कोटे में भर्ती की राह मुश्किल है।

इनकी सुनिए -

विश्वविद्यालय में नियम विरुद्ध कोई भर्ती नही की जाएगी। विधिक राय लेकर ही आगे बढ़ा जाएगा। भर्ती प्रक्रिया भी पूरी की जाएगी।

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