जहां 4 पुश्तें बीतीं,4 दिन बाद वो छत छिन जाएगी:कुशीनगर के 42 परिवारों को घर छोड़ने का नोटिस, प्रशासन बोला- फिर बुलडोजर चलेगा

जहां 4 पुश्तें बीतीं,4 दिन बाद वो छत छिन जाएगी:कुशीनगर के 42 परिवारों को घर छोड़ने का नोटिस, प्रशासन बोला- फिर बुलडोजर चलेगा

कुशीनगर जिले की पडरौना तहसील से 17 किमी दूर है नौतन हरदो गांव। यहां के करीब 250 लोग घबराए हुए हैं। ये डर है अपने घर से बेघर किए जाने का, जहां वो पुश्तों से रह रहे हैं। दरअसल, 15 दिसंबर 2022 को कुशीनगर जिला प्रशासन ने गांव के 42 परिवारों को घर खाली करने का नोटिस भेजा। इस नोटिस में घरों को अवैध कब्जा बताया गया। इसके बाद सड़क किनारे बनी साबिर अली की 2 दुकानें ढहा दी गईं। अब बुलडोजर वापस लौट चुके हैं, लेकिन सिर्फ 20 जनवरी तक के लिए।

जिन परिवारों को नोटिस मिला, उनमें से कुछ ने हमें सरकारी पट्टे के कागज दिखाए। इनमें से 90% लोग मजदूर हैं, इनके पास कोई रिकॉर्ड नहीं है। ये सभी गांव की बंजर जमीन पर झोपड़ियों में रह रहे हैं। चार पुश्तों से गांव में रह रहे लोगों को क्यों बेघर किया जा रहा है? बेदखली के बाद क्या इन परिवारों को कहीं और बसाया जाएगा

नौतन हरदो: 20 जनवरी तक की मोहलत और बेघर होने का दर्द

ग्राम समाज की जमीन पर कब्जे का ये विवाद 3 साल पुराना है। आरोप था कि गांव की लगभग 2 एकड़ जमीन पर 42 परिवारों ने कब्जा किया है। इनमें 40 मुस्लिम और 2 यादव बिरादरी के लोग शामिल हैं। सितंबर 2020 में ये मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट गया। कोर्ट ने अरोपियों को अपना पक्ष रखने का समय दिया। अरोपी हाजिर नहीं हुए। 10 दिसंबर 2021 को यूपी हाईकोर्ट ने आदेश दिया- परिवारों को साक्ष्य पेश करने का समय दिया जाए, जवाब न मिलने पर अवैध निर्माण खाली कराए जाए।

15 दिसंबर को गांव में राजस्व विभाग की टीम पहुंची। जमीन खाली करने का नोटिस चिपकाया। 24 दिसंबर को गांव में बुलडोजर पहुंचे, साबिर अली सिद्दीकी की दुकानें गिराई गईं। गांववालों ने विरोध किया। जिला प्रशासन ने कार्रवाई पर 20 जनवरी तक रोक लगा दी। लेकिन 42 परिवारों के लिए ये तारीख दहशत की वजह बनी हुई है।

जिस दुकान से पेट पालते थे, उस पर बुलडोजर चला दिया

तहसीलदार की बेदखली नोटिस आने के बाद सबसे पहली कार्रवाई साबिर अली के खिलाफ हुई। सड़क किनारे उनकी 2 दुकानें ढहा दी गईं। उनके मुताबिक, दुकान में रखा फ्रिज और कूलर भी तोड़ दिया गया।

टूटा हुआ फ्रिज दिखाते हुए साबिर अली कहते हैं, मेरी बहू गर्भवती है, उसकी दवा लाने कसया गया था। जब वापस लौटा तो देखा कि मेरी दुकान में तोड़फोड़ हुई है। दीवार गिरा दी गई है और अंदर रखा सामान तोड़ डाला गया। गांववालों ने मुझे बताया कि लेखपाल के साथ कुछ लोग आए थे। उन्होंने बुलडोजर से इमारत गिरा दी। उसमें चावल, चीनी, दाल, राशन-गुटखा सब रखा हुआ था। सब बर्बाद हो गया।

साबिर के मुताबिक, गांव में 1984 में चकबंदी हुई थी। उसके पहले से वो यहां रह रहे हैं। जिस दुकान को गिराया गया वो रोड से 10 फीट पीछे है और बंजर भूमि में नहीं आती है। फिर भी लेखपाल ने बिना सूचना दिए उसे ढहा दिया। हमने साबिर से दुकान के पेपर मांगे तो उन्होंने न में सिर हिला दिया।

सहाबुद्दीन के पास सरकारी पट्टा, फिर भी मिला नोटिस

सहाबुद्दीन के पास जमीन से जुड़े कागज हैं, लेकिन बेदखली नोटिस में उनकी संपत्ति का जिक्र है। घर के मालिकाना हक से जुड़े पेपर दिखाते हुए सहाबुद्दीन कहते हैं, 2009 में हमने अपनी जमीन का सरकारी पट्टा रजिस्टर करवाया, इसके कागज भी हमारे पास हैं। लेकिन दिसंबर में आई नोटिस में हमारी जमीन की गाटा संख्या भी थी। हमारे परिवार की दूसरी पीढ़ी इस जगह रह रही है। अब प्रशासन इसे बंजर बता रहा है।

हाईकोर्ट का फैसला सहाबुद्दीन की समझ से परे है। उनका कहना है कि वो अपने जमीन के कागज डीएम को दिखाएंगे। अपनी जमीन बचाने के लिए लड़ते रहेंगे।

हमारे दादा-परदादा यहां रहे, अब कह रहे घर खाली कर दो

तैबुन निसा के मुताबिक उनका परिवार 80 साल से गांव में रह रहा है। बावजूद इसके लेखपाल उन्हें घर खाली करने का नोटिस देकर गए। अलाव तापती तैबुन कहती हैं, हम लोग बहुत गरीब हैं...साहब। मजदूरी करके घर चलाते हैं। हमारे दादा-परदादा भी यहीं रहते थे लेकिन हमारी जमीन को अवैध बताकर लेखपाल मकान खाली करने का नोटिस देकर गए हैं।

नोटिस मिलने के बाद तैबुन और उनका परिवार परेशान है। उनके बेटे जमीन बचाने के लिए तहसील के चक्कर काट रहे हैं। हमने जमीन के कागज दिखाने के लिए कहा, तो तैबुन ने बताया कि इंतखाब के कागज बेटे के पास है, वो लिखा-पढ़ी के लिए तहसील गया है।

हमने गांव के आसफ अली, अफसरी खातून, कमरुद्दीन, मुईनुद्दीन, रफिउल्लाह और अब्दुल कय्यूम से बात की। इन सभी के नाम नोटिस आई थी। लोगों का कहना है कि वे आजादी के पहले से गांव में रह रहे हैं।

42 परिवारों के समर्थन में आई कांग्रेस

नौतन हरदो में बुलडोजर कार्रवाई के बाद कांग्रेस नेता अजय कुमार लल्लू ग्रामीणों से मिलने पहुंचे। उन्होंने बताया कि कुछ लोगों के पास पट्टे के कागज हैं और कुछ के पास नहीं हैं। ये लोग बंजर जमीन पर बरसों से रह रहे हैं। परिवारों को न्याय दिलवाने के लिए उन्होंने डीएम और राज्य स्तर पर बात करने का अश्वासन दिया है।

लेखपाल बोले- जमीन उनकी है तो सबूत पेश करें

नौतन हरदो गांव के लोगों ने लेखपाल ब्रम्ह प्रसाद पर घरों में तोड़फोड़ का आरोप लगाया। हमने इस पूरे मामले पर उनसे बात की। ब्रम्ह प्रसाद ने बताया, जो लोग कह रहे हैं कि वे 4 पुश्तों से गांव में रह रहे हैं। उनके पास अभी वक्त है, अगर जमीन उनकी है तो कोर्ट में सबूत पेश करें। जमीनों की जांच में ये पाया गया है कि ये लोग चकबंदी के बाद से यहां पर कब्जा कर रह रहे थे। जब तक शिकायत नहीं हुई, कोई मुद्दा नहीं था। अब वकील अहमद की शिकायत पर कार्रवाई हो रही है।

रिजर्व लैंड पर बनी अवैध संपत्तियां धारा-67 के तहत हटेंगी

कुशीनगर के अपर जिलाधिकारी देवी दयाल वर्मा ने बताया कि जो संपत्तियां रिजर्व लैंड पर हैं, उन्हें हाईकोर्ट के आदेश पर धारा-67 के तरह बेदखल किया गया है। इसमें जो लोग शामिल थे। उन्हें न्यायालय में साक्ष्य पेश करने का समय दिया गया था। सरकारी जमीन पर जिनके मकान बने हुए हैं, वह सभी हटेंगे।

जिनके पास रहने की जगह नहीं, उन्हें बेदखल नहीं किया जाएगा

कुशीनगर जिले के पडरौना के तहसीलदार सुमित सिंह ने बताया, जिला प्रशासन के निर्देश पर सभी तहसीलों की बंजर जमीनों को खाली कराया जा रहा है। ग्राम नौतन हरदो में भी इसी क्रम में कार्रवाई हुई है। दरअसल, जिन लोगों को बेदखल किया जा रहा है, वो गांव में ही दूसरी जगह कब्जा कर रह रहे थे। जिनके पास रहने की जगह नहीं है, उन्हें बेदखल नहीं किया जाएगा।

पडरौना तहसील के लेखपाल विक्रांत के मुताबिक, ठंड बढ़ने के कारण 20 जनवरी तक बेदखली की कार्रवाई रोकी गई है। इसके बाद फिर से अवैध निर्माण हटाया जाएगा। क्या बेदखली के बाद इन लोगों को कहीं और शिफ्ट किया जाएगा? हमारे इस सवाल पर उन्होंने कहा, अभी इस बारे में कोई जानकारी नहीं मिली है।


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