ऊना के शहीद अमरीक पंचतत्व में विलीन:पैतृक गांव गणु मंदवाड़ा में दी गई अंतिम विदाई, बेटे ने सेल्यूट, पत्नी ने हाथ जोड़ किया नमन

ऊना के शहीद अमरीक पंचतत्व में विलीन:पैतृक गांव गणु मंदवाड़ा में दी गई अंतिम विदाई, बेटे ने सेल्यूट, पत्नी ने हाथ जोड़ किया नमन

हिमाचल के ऊना जिले के शहीद अमरीक सिंह आज पंचतत्व में विलीन हो गए। उन्हें उनके पैतृक गांव गणु मंदवाड़ा में अंतिम विदाई दी गई। शहीद को बेटे अभिनव ने मुखाग्नि देकर दुनिया से विदा किया। वहीं पूरा गांव और रिश्तेदार शमशान घाट स्वर्गधाम में शहीद को श्रद्धांजलि देने जुटा।

अंतिम संस्कार के दौरान लगातार शहीद अमर रहे के नारे लगे। शहीद को सबसे पहले बेटे अभिनव ने श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए सेल्यूट किया। इसके बाद पिता धर्मपाल ने बेटे को श्रद्धांजलि दी। इसके साथ ही गगरेट के SDM सोमिल गौतम, जिला कांग्रेस अध्यक्ष रणजीत राणा और गगरेट के पूर्व विधायक राजेश ठाकुर ने भी श्रद्धासुमन अर्पित किए।

आखिरी बार चेहरा देख बेहोश हो गई मां

शहीद का पार्थिव शरीर करीब 10 बजे घर पहुंचा। जैसे ही पार्थिव देह घर पहुंची, परिवार में चीख पुकार मच गई। शहीद की पत्नी रूचि, बेटा अभिनव, मां ऊषा देवी, पिता धर्मपाल सिंह, बड़े भाई अमरजीत सिंह और छोटे भाई हरदीप सिंह पार्थिव शरीर को देख बिलख-बिलख कर रोए।

शहीद अमरीक सिंह का चेहरा आखिरी बार देखते ही उनकी पत्नी और मां बेसुध हो गईं। दोनों को रिश्तेदारों और आस पड़ोस के लोगों ने ढांढस बंधाया। कुछ देर पार्थिव देह अंतिम दर्शनों के लिए रखी गई और इस दौरान ही परिवार की तरफ से अंतिम संस्कार की सभी रस्में पूरी की गईं।

6 दिन बाद घर पहुंचा पार्थिव शरीर

पंचायत प्रधान भूपिंद्र सिंह ने बताया कि मंगलवार को अमरीक हादसे का शिकार हुए। माछिल सेक्टर में 3 दिन पार्थिव शरीर रखा रहा। ख्रराब मौसम के कारण इसे एयरलिफ्ट नहीं किया जा सका। शुक्रवार को सेना के जवानों ने शव को दूसरी पोस्ट तक पहुंचाया। शनिवार सुबह सेना ने शव को वहां से श्रीनगर एयरलिफ्ट किया। श्रीनगर में अमरीक के शव का पोस्टमार्टम किया गया। रविवार सुबह अमरीक के शव को श्रीनगर से जम्मू पहुंचाया गया, जहां से शव हवाई जहाज से चंडीगढ़ भेजा गया। रविवार शाम शव चंडीगढ़ पहुंचा और वहां से सड़क मार्ग से ऊना लाया गया।

2001 में सेना में भर्ती हुए थे अमरीक सिंह

बता दें कि गणु मदवाड़ा के 39 वर्षीय हवलदार अमरीक सिंह की मंगलवार देरशाम जम्मू कश्मीर के कुपवाड़ा में हुए सड़क हादसे में शहीद हो गए। अमरीक सिंह 2001 में सेना में भर्ती हुए थे। वह जम्मू कश्मीर के माछिल सेक्टर में तैनात थे। वह अपने पीछे माता ऊषा देवी, पिता धर्मपाल सिंह, पत्नी रूचि और बेटा अभिनव को छोड़ गए हैं। अमरीक सिंह 2001 में 14 डोगरा रेजीमेंट में भर्ती हुए थे। वह 3 भाइयों में मझले थे। उनका बेटा अभिनव छठी कक्षा की पढ़ाई कर रहा है।


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