BSF यूं पस्त कर रही सीमा पर हवाई आतंक:पंजाब को जकड़ रहा है नार्को टेररिज्म, सुरक्षाबल रोकने के लिए इनोवेटिव तरीके अपना रहा

BSF यूं पस्त कर रही सीमा पर हवाई आतंक:पंजाब को जकड़ रहा है नार्को टेररिज्म, सुरक्षाबल  रोकने के लिए इनोवेटिव तरीके अपना रहा

उस मुल्क की सरहद को कोई छू नहीं सकता, जिस मुल्क की सरहद की निगहबान हैं आंखें…! लेकिन भारत-पाक बॉर्डर पर बीएसएफ के जवान आंखें फिल्म के इस गीत के मायनों को और मुकम्मल बना रहे हैं। सरहद पार से बढ़ रहे नए खतरे से निपटने के लिए उनकी आंखें तो निगहबान हैं हीं, उनके कान भी दुश्मन की हर चाल नाकाम कर रहे हैं। पंजाब में सीमा पार से ड्रग और हथियार लेकर आ रहे ड्रोंस की गतिविधियां इतनी बढ़ गई हैं कि जवान 24 घंटे न सिर्फ इस नए खतरे से लड़ रहे हैं, बल्कि वे दुश्मनों के नापाक इरादों को बुरी तरह से मात भी दे रहे हैं।

हाड़ कंपा देने वाली सर्दी और जीरो विजिबिलिटी धुंध में भले ही उनकी आंखें जवाब दे देती हों, लेकिन उनके कान हर समय सक्रिय रहते हैं। ड्रोन की जरा सी भी आहट पर वे पलक झपकने जितनी फुर्ती से एक्शन में आ जाते हैं।

कुछ न दिखे तब भी ढूंढ निकालते हैं विदेशी ड्रोन

एलएमजी से लैस एंटी ड्रोन स्क्वॉड से लेकर सर्चिंग टीम तक को तुरंत अलर्ट किया जाता है। जैमर से ड्रोन नहीं गिरते तो अंधाधुंध फायरिंग कर उसे गिराने की कोशिश की जाती है। जवान एक पल भी जाया नहीं होने देते, क्योंकि जानते हैं वे दुश्मन की तकनीक से लड़ रहे हैं। आसमान में कुछ दिखाई नहीं देता, तब भी कान गवाही देते हैं कि सीमा पार से कुछ हलचल है, तो वे अलर्ट हो जाते हैं। मोर्टार बम से रोशनी करते हैं, ताकि आसमान की हर हलचल देख सकें।

इसी मुस्तैदी से बड़ी संख्या में ड्रोन देश की सीमा से लौटने पर मजबूर हुए। दुश्मन लगातार पैंतरा बदल रहा है। जवानों की पैनी निगाहों से बचने के लिए वे ड्रोन की लाइट बंद करना, कम आवाज के ड्रोन भेजना और रेडियम पट्टी लगाने जैसे तरीके अपनाने लगे हैं। ताकि लोकेशन टारगेट तक आसानी से पहुंचा जा सके। जवानों ने भी इस चालाकी को समझ लिया। वे पीछा करने लगे तो ड्रोन ही नहीं टारगेट भी पहुंच में आने लगे। बीएसएफ ने देश में बैठे ऐसे कई तस्करों का सुराग लगाया, जो लगातार अवैध गतिविधियां चला रहे थे।

ड्रोन गिराने वाली टीम को दिया जाता है 1 लाख रुपए

हौसला अफजाई के लिए ड्रोन गिराने वाली टीम को 1 लाख रुपए इनाम भी दिया जाता है। फिर भी पिछले दो साल से बीएसएफ ही नहीं, देश की सुरक्षा के लिए भी यह चुनौती बढ़ती जा रही है। तरनतारन व अमृतसर जिले के संवेदनशील गांवों में ये गतिविधियां ज्यादा हैं। इन्हीं क्षेत्रों में पहले सीमा पार से हेरोइन व हथियारों की सबसे ज्यादा तस्करी होती थी। सीमा पार से ड्रोन के जरिए ड्रग और हथियार गिराने का सिलसिला जारी है। नए साल के जितने दिन बीते हैं, उससे ज्यादा गतिविधियां यहां अब तक हो चुकी हैं। ड्रोन से हेरोइन के पैकेट के साथ अब पिस्टल भी मिल रही हैं।

अब हेक्सा ड्रोन भेज रहे, ज्यादा हथियार-सामान उठाने में सक्षम

सीमा पर एकाएक ड्रोन की मूवमेंट क्यों बढ़ गई? पंजाब ही निशाने पर क्यों? इन सवालों के जवाब भी बॉर्डर पर जाकर हमें मिले। बीएसएफ अफसर बताते हैं कि सीमा पार से ड्रोन का यह खतरा दो-तीन साल में ही ज्यादा बढ़ा। जम्मू में एक ड्रोन के पकड़े जाने के बाद पहली बार बीएसएफ को इस नए खतरे का अहसास हुआ। 2019-20 में पंजाब में ड्रोन की मूवमेंट दिखी और 2022 आने तक इसमें करीब 200 फीसदी की बढ़ोतरी हो गई। दो साल में 210 से ज्यादा ड्रोन सीमा पार से आते दिखे। इनमें से 25 से अधिक ड्रोन जवानों ने गिरा डाले। जम्मू, पंजाब, राजस्थान और गुजरात के 2,289 किमी लंबे इंटरनेशनल बॉर्डर पर सबसे ज्यादा ड्रोन गतिविधियां पंजाब के सरहदी इलाकों में हुई।

2023 में 10 ड्रोन आते दिखे, 75 फीसदी गतिविधियां पंजाब में

2020 में 77 ड्रोन, 2021 में 104 और 2022 में 311 ड्रोन गतिविधियां हुईं। साल 2023 के जनवरी के 15 दिन में 10 ड्रोन आते दिखाई दिए। इनमें 75 फीसदी गतिविधियां पंजाब में हुईं। चीन, तुर्की और अमेरिका मेड ड्रोन भारतीय सीमा में भेजे जा रहे हैं। भारत की जवाबी कार्रवाई की सीमा पार बैठे तस्करों को जब भनक लगी तो, उन्होंने पहचान छिपाने के लिए भारत जैसे ड्रोन तक बनाने शुरू कर दिए। सीमा पर एक ऐसा ड्रोन भी पकड़ा गया, जो दिखने में बिल्कुल भारतीय ड्रोन जैसा ही था, लेकिन यह ज्यादा क्षमता वाला था।

क्षमता का सीधा मतलब है कि वह ज्यादा ड्रग और हथियार सप्लाई कर सकता है। पहले दो-तीन किलो वजन उठाने वाले ड्रोन आते थे। अब हेक्सा ड्रोन आ रहे हैं, जो ज्यादा वजन उठाते हैं। सीमा पार बैठे तस्कर इतने शातिर हैं कि जब अमृतसर और गुरदासपुर सेक्टर की ओर सख्ती होती है तो वे फिरोजपुर सेक्टर की ओर सक्रिय हो जाते हैं।

पंजाब ही निशाने पर क्यों, सीमा पर इसका भी जवाब

बीएसएफ ने मल्टी लेयर पैट्रोलिंग और ड्रोन नाके बना दिए हैं। फिर भी छोटे ड्रोन ज्यादा चुनौती बने हुए हैं, क्योंकि वे कब आकर चले जाते हैं, यह अनुमान लगाना बहुत मुश्किल है। पंजाब ही निशाने पर क्यों...? सीमा पर इसका भी जवाब मिलता है। सीमा पार लगातार यह कोशिश होती है कि पंजाब को डिस्टर्ब रखा जाए। पंजाब में ड्रग की खपत बहुत ज्यादा है। पिछले 2 दशक में युवा ड्रग के ऐसे दलदल में फंस चुके हैं कि इससे निकलना मुश्किल हो रहा है। देखते ही देखते ड्रग के साथ हथियारों की भी मांग बढ़ने लगी।

ड्रग की एक-एक कंसाइनमेंट लाखों रुपए में है। ड्रोन से भेजे जाने के पीछे एक वजह यह भी है कि यह तरीका ज्यादा सुगम और सस्ता लगता है। एक ड्रोन की कीमत करीब 1 लाख रुपए है और ड्रग और हथियार की डिलीवरी लाखों में। घुसपैठ में खतरा कहीं ज्यादा था और तस्करों को वह महंगा सौदा लगता था, क्योंकि बीएसएफ ऐसे लोगों को तुरंत पकड़ लेती है या एनकाउंटर कर देती है।

कोशिश...विलेज डिफेंस कमेटी बनाकर ग्रामीणों को कर रहे जागरूक

बीएसएफ गुरदासपुर सेक्टर के डीआईजी प्रभाकर जोशी बताते हैं, पंजाब को अस्थिर करने के लिए दुश्मन देश हथकंडे अपनाता रहा है। नार्को टेररिज्म को बढ़ावा देना, आतंकी फंडिंग और देश के भीतर बैठे कुछ लोगों को बरगलाकर मंसूबे पूरे करना उसकी रणनीति है। पर उसे हर बार मुंह की खानी पड़ रही है। कड़ाके की सर्दी, प्रचंड गर्मी और भारी बारिश में भी हजारों जवान दिन-रात बॉर्डर पर मुस्तैद हैं। इनके अलावा सीमा भवानियां भी देश की रक्षा में अहम योगदान दे रही हैं। वे बताते हैं, हमने पुलिस के साथ मिलकर उन दुश्मनों पर कार्रवाई की है जो देश में रहकर देश विरोधी गतिविधियों में लगे हैं। इसके अलावा विलेज डिफेंस कमेटी बनाकर ग्रामीणों को जागरूक किया जा रहा है। सूचना देने पर 1 लाख रुपए तक इनाम रखा गया है। कोशिशें सफल हो रही हैं।


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