आर्सेनिक वाला पानी बना देगा कैंसर रोगी! देश के इन राज्यों में ज्यादा खतरा, बिहार भी है शामिल

आर्सेनिक वाला पानी बना देगा कैंसर रोगी! देश के इन राज्यों में ज्यादा खतरा, बिहार भी है शामिल

पटना: बिहार और असम के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए एक शोध में पाया गया है कि पीने के पानी के माध्यम से आर्सेनिक (Arsenic) के संपर्क में आने वाले लोगों में पित्ताशय (Gall bladder) के कैंसर का खतरा अधिक होता है. आर्सेनिक के तत्व भूजल (Ground water) में भी पाए जाते हैं. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और यूरोपीय संघ (EU) द्वारा इसे कैंसर कारक तत्वों की सूची में रखा गया है, लेकिन बिहार और असम की तरह कई जिले हैं, जहां ऐसे पानी को पिया जा रहा है, जिसमें आर्सेनिक की मात्रा मौजूद है.

अमेरिकन एसोसिएशन फॉर कैंसर रिसर्च के कैंसर एपिडेमियोलॉजी, बायोमार्कर और प्रिवेंशन जर्नल में हाल ही में प्रकाशित एक पेपर में पाया गया है कि भूजल में (1.38-8.97 माइक्रोग्राम प्रति लीटर) औसत आर्सेनिक कॉन्सेंट्रेशन के संपर्क में आने वाले लोगों को पित्ताशय के कैंसर का 2 गुना अधिक जोखिम था, जबकि इससे उच्च आर्सेनिक स्तर यानी (9.14-448.39 माइक्रोग्राम प्रति लीटर) के संपर्क में आने वालों में पित्ताशय की थैली के कैंसर का 2.4 गुना अधिक जोखिम था.

यह अध्ययन भारत के दो आर्सेनिक प्रभावित राज्यों असम और बिहार में सेंटर फॉर एनवायर्नमेंटल हेल्थ (CEH), पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन ऑफ इंडिया (PHFI), सेंटर फॉर क्रॉनिक डिजीज कंट्रोल (CCDC), डॉ भुवनेश्वर बरूआ कैंसर संस्थान (BBCI) के वैज्ञानिकों द्वारा किया गया था. महावीर कैंसर संस्थान और अनुसंधान केंद्र (MCSRC), पटना और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान- खड़गपुर, लंदन स्कूल ऑफ हाइजीन एंड ट्रॉपिकल मेडिसिन (LSHTM) के सहयोग से अध्ययन एक अस्पतालों में किया गया था, जहां असम-बिहार के अधिक मरीज थे.

इस अध्ययन के निष्कर्ष बताते हैं कि कम-मध्यम स्तर पर पीने के पानी में आर्सेनिक का संपर्क पित्ताशय की थैली के कैंसर के लिए संभावित जोखिम का कारक हो सकता है. महावीर कैंसर संस्थान में अनुसंधान विभाग के प्रमुख और बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष अशोक कुमार घोष ने बताया कि उच्च जोखिम वाली आबादी यानी जो जहरीले आर्सेनिक की चपेट में है, उसकी निगरानी होनी चाहिए.

बिहार में भूजल के आर्सेनिक संदूषण के बारे में पूछे जाने पर, घोष ने कहा, ‘आर्सेनिक- पटना, बक्सर, मनेर, भोजपुर और भागलपुर सहित गंगा नदी बेल्ट के साथ कई जिलों में फैला हुआ है. वास्तव में, बिहार के 38 में से 18 जिलों में भूजल ने 10 पीपीबी से अधिक आर्सेनिक स्तर दिखाया है, जो कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) द्वारा निर्धारित स्तर से अधिक है.’

बीबीसीआई के चिकित्सा अधिकारी और अध्ययन के सहायक डॉ मणिग्रीव कृष्णत्रेय ने कहा, “पीने के पानी में आर्सेनिक के निम्न स्तर के लंबे समय तक संपर्क में रहने से त्वचा का रंग फीका पड़ सकता है, हाई ब्लड प्रेशर, हृदय रोग, नसे सुन्न पड़ने के साथ अन्य  बीमारियों का जोखिम बढ़ जाता है. अब तो पित्ताशय की थैली के कैंसर का खतरा भी शामिल हो गया है. यह जरूरी है कि पीने के पानी से आर्सेनिक को हटाने के लिए सार्वजनिक स्वास्थ्य हस्तक्षेप होना चाहिए. असम और बिहार के स्थानिक क्षेत्रों में इनकी आवश्यकता है. आर्सेनिक प्रदूषण से निपटने से कई स्वास्थ्य परिणामों का बोझ कम करने में मदद मिल सकती है.”

डॉ. पूर्णिमा प्रभाकरन, निदेशक, पर्यावरणीय स्वास्थ्य केंद्र, पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन ऑफ इंडिया , ने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि कैसे यह अध्ययन जल जीवन मिशन-2024 और समान स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल के सतत विकास लक्ष्यों के साथ संरेखित है.

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