जीती अंशिका ने मार्कशीट की 3 साल पुरानी लड़ाई:मार्कशीट स्कूल ने रजिस्ट्रेशन पर दूसरे को दे दी थी, UP बोर्ड ने रिजल्ट जारी किया

जीती अंशिका ने मार्कशीट की 3 साल पुरानी लड़ाई:मार्कशीट स्कूल ने रजिस्ट्रेशन पर दूसरे को दे दी थी, UP बोर्ड ने रिजल्ट जारी किया

शिक्षा माफिया ने हाईस्कूल में अंशिका के रजिस्ट्रेशन पर दूसरे छात्र को मार्कशीट दे दी थी। भ्रष्टाचार ने छात्रा के 3 साल बर्बाद कर दिए थे। उसे हाईस्कूल की मार्कशीट अभी तक नहीं मिली थी, जबकि वह 12वीं में पढ़ रही है। स्कूल उसे फिर से कक्षा 9 में पढ़ने को कह रहा था। खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया तो यूपी बोर्ड हरकत में आ गया। बोर्ड ने खबर का संज्ञान लेकर एक सप्ताह के भीतर अंशिका को क्षेत्रीय कार्यालय वाराणसी बुलाकर मार्कशीट दे दी है।

आइए अब समझते हैं पूरा मामला क्या था?

अम्बेडकर नगर के विकासखंड जहांगीरगंज में आने वाले एमआर फैजाने हलीम इंटर कॉलेज में अंशिका पांडेय ने 2019 में कक्षा 9 में एडमिशन लिया। इसके बाद कक्षाएं शुरू हो गईं। हाईस्कूल का प्री बोर्ड एग्जाम भी दिए। इसके बाद 2020 में कोरोना का प्रकोप बढ़ा तो हाईस्कूल की परीक्षा कैंसिल हो गई। सभी को हाईस्कूल में प्रमोट कर दिया गया। सभी का रिजल्ट आया पर अंशिका पांडेय का रिजल्ट ही नहीं आया।

अंंशिका पांडेय ने इसकी सूचना विद्यालय प्रबंधक अब्दुल समी को दिया तो उन्होंने बताया कि तुम्हारे मार्कशीट में गलतियां हैं, जो सुधार होने के लिए यूपी बोर्ड भेज दी गई हैं। सुधार होते ही आपको मार्कशीट मिल जाएंगी। तब से स्कूल प्रबंधन ने अंशिका को कभी कुछ कभी कुछ बहाना बनाकर भ्रम में रखा और 3 साल तक दौड़ाया।

3 साल बाद प्रबंधक ने कहा- अब तुम्हें फिर से कक्षा नौ में पढ़ना होगा

अंशिका पांडेय ने बताया कि बिना हाईस्कूल की मार्कशीट के 11वीं में मेरा एडमीशन भी ले लिया गया और रिजल्ट भी 11वीं का आ गया। मैं पास भी हो गई। 12वीं में मेरा बोर्ड का फॉर्म भी भरा गया, लेकिन हाईस्कूल की मार्कशीट का अभी तक पता नहीं था। स्कूल प्रबंधन ने 3 साल दौड़ाने के बाद नवंबर 2022 में मुझसे कहा कि तुम्हें फिर से कक्षा 9 में पढ़ना होगा। इसके बाद मजबूर होकर 12 दिसंबर 2022 को थाना राजे सुल्तानपुर में स्कूल प्रबंधक मोहम्मदअब्दुल समी, प्रधानाचार्य हफीजा खातून और क्लर्क सीताराम के खिलाफ भारतीय दंड संहिता 420, 467 और 468 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस ने अभी तक किसी को गिरफ्तार नहीं किया है। अब स्कूल प्रबंधक इलाहाबाद हाईकोर्ट में अरेस्ट स्टे की अर्जी डाली है।

यूपी बोर्ड के सचिव दिव्यकांत शुक्ला की पहल पर अंशिका का रिजल्ट जारी

अंशिका पांडेय ने माध्यमिक शिक्षा परिषद के वाराणसी क्षेत्रीय कार्यालय में क्षेत्रीय सचिव को भी पत्र लिखकर अपनी इस समस्या से अवगत कराया था पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। माध्यमिक शिक्षा परिषद के सचिव दिव्यकांत शुक्ला को इस बारे में  2 जनवरी को अंशिका पांडेय की समस्या का पता चला। उन्होंने तत्काल इसे गंभीरता से लेते हुए क्षेत्रीय सचिव वाराणसी को मामले की जांच कराने का आदेश दिया।

जांच में चता चला कि फर्जीवाड़ा कर अंशिका के रजिस्ट्रेशन नंबर पर एक और छात्र का रजिस्ट्रेशन किया गया है। इसी लिए यूपी बोर्ड ने अंशिका का रिजल्ट नहीं घोषित किया था। उसे विदहेल्ड कर दिया गया था। सचिव दिव्यकांत शुक्ला ने इसके बाद जांच रिपोर्ट के आधार पर अंशिका का हाईस्कूल का रिजल्ट घोषित करने का आदेश दिया। दिव्यकांत शुक्ला ने स्कूल एमआर फैलाने हलीम इंटर कॉलेज की भूमिका की भी जांच के आदेश दिए हैं। जो भी दोषी होगा उसके खिलाफ कार्रवाई होगी।

अब समझौते का दबाव, हाईकोर्ट में अरेस्ट स्टे का प्रार्थना पत्र

स्कूल प्रबंधक, प्रिंसिपल और स्टाफ ने पुलिस की गिरफ्तारी से बचने के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में अरेस्ट स्टे के लिए प्रार्थना पत्र दिया है। छात्रा अंशिका पांडे ने बताया, मार्कशीट मुझे नहीं मिली थी और मुझे विद्यालय के प्रबंधक अब्दुल समी तारीख पर तारीख देते रहे। 3 साल बीत जाने के बाद अब कर रहे थे कि तुम्हारी मार्कशीट नहीं मिल पाएगी, फिर से तुमको कक्षा नौ की परीक्षा देनी होगी। अब सुलह समझौता करने का दबाव बना रहे थे।

यूपी की अंशिका पांडेय 12वीं की छात्रा हैं। दो महीने बाद उनकी परीक्षा होने वाली है। लेकिन रानीमऊ की अंशिका ने जिस MR फैजाने हलीम इंटर कॉलेज में दाखिला लिया है, उसने कहा है कि अंशिका को फिर से 9वीं कक्षा में पढ़ना होगा। हैरान हो गए ना आप। अब जरा सोचिए कि साल भर पढ़ाई करने वाली अंशिका पर क्या बीत रही होगी।

दरअसल यह मामला 2020 में कोविड के कारण देश भर के स्कूलों के बच्चों को अगली कक्षा में प्रमोशन से जुड़ा है। अंशिका को भी तब हाईस्कूल में प्रमोट कर दिया गया था। लेकिन किसी कारण से उनकी हाईस्कूल की मार्कशीट नहीं आ पाई। इसके बाद अंशिका ने 11वीं में दाखिला लिया और पास भी हो गईं। अब इंटर की परीक्षा से ऐन पहले स्कूल उनकी हाईस्कूल की मार्कशीट देने के बजाय कह रहा है कि 9वीं से फिर पढ़ाई करें। अब अंशिका ने स्कूल मैनेजमेंट के खिलाफ पुलिस में केस दर्ज किया था ताकि वह बोर्ड परीक्षा दे सके।



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