करणी सेना कार्यकर्ता रातभर भोपाल के जंबूरी मैदान पर डटे:ठंड में सोए खुले आसमान के नीचे, संगठन प्रमुख समेत 5 कार्यकर्ता भूख हड़ताल पर

करणी सेना कार्यकर्ता रातभर भोपाल के जंबूरी मैदान पर डटे:ठंड में सोए खुले आसमान के नीचे, संगठन प्रमुख समेत 5 कार्यकर्ता भूख हड़ताल पर

आर्थिक आधार पर आरक्षण समेत 21 मांगों को लेकर भोपाल के जंबूरी मैदान पर रविवार सुबह शुरू हुआ करणी सेना का महा आंदोलन देर रात भी जारी है। दिनभर के प्रदर्शन के बाद रात होने पर भी आंदोलनकारी मैदान पर डटे है। हालांकि दोपहर के तुलना में रात के दौरान भीड़ कम नजर आई। इधर करणी सेना परिवार के प्रमुख जीवन सिंह शेरपुर समेत 5 कार्यकर्ता भूख हड़ताल पर बैठे हैं। उन्होंने कहा कि मांगें पूरी होने तक हमारा आंदोलन जारी रहेगा। कुछ कार्यकर्ताओं ने कहा कि यह आंदोलन दिल्ली के किसान आंदोलन की तरह होगा।

इससे पहले करणी सेना परिवार ने मांगें नहीं मानने पर विधानसभा घेराव की चेतावनी दी थी, हालांकि बाद में प्रशासन के अधिकारियों ने उनसे बातचीत का समय मांगा, जिसके बाद फिलहाल प्रस्तावित विधानसभा घेराव टाल दिया गया है। विधानसभा घेराव की चेतावनी के बाद वहां सुरक्षा बढ़ा दी गई है।

जीवन सिंह ने कहा है कि भूख हड़ताल पर सिर्फ 5 लोग बैठेंगे। उन्होंने मंच से कहा कि जिसे जाना हो वो खुशी से जा सकता है, लेकिन कहीं भी तोड़फोड़ और उद्दंडता नहीं होनी चाहिए। उन्होंने किसी भी तरह की हिंसा नहीं करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि आंदोलन लगातार जारी रहेगा।

कार्यकर्ताओं के बीच मंच पर ही सोए जीवन सिंह

आंदोलन की अगुवाई कर रहे जीवनसिंह शेरपुर मंच पर ही खुले आसमान के नीचे कंबल ओढ़ कर सोए हैं। सिर, कार्यकर्ता की गोद में रखा है। उनके नजदीक ही अनशन कर रहे दूसरे चार अन्य कार्यकर्ता भी कंबल ओढ़ कर सोए हैं। मंच से करीब 200 मीटर दूर दो बड़े पंडाल बने हैं। इन पंडाल को टेंट हाउस ऑपरेटर ने सामान रखने के लिए बनाया था। अब यहां आंदोलन में शामिल होने प्रदेश के दूसरे शहरों और देश के दूसरे राज्यों के कार्यकर्ता सोते रहे। वहीं, कई कार्यकर्ता मंच के आसपास मैदान में अलाव तापते रहे।

मंच के नीचे बिस्तर लगा कर सोए

आंदोलन में शामिल हुए करीब 20 कार्यकर्ता मंच के नीचे बिस्तर लगा कर सोते रहे। इसके लिए इन कार्यकर्ताओं ने मंच की बल्लियों के बीच अपने बिस्तर लगाए हैं, ताकि सर्द हवाओं से बचा जा सके।

जीवन सिंह ने कहा कि हमने मांगें पूरी करने के लिए 4 बजे तक का समय दिया था। इस पर सरकार ने हमसे समय मांगा है। हमने उन्हें समय दिया है। इसके साथ ही हम अपना अनशन शुरू कर रहे हैं। हम यहीं बैठेंगे। तब तक मैदान नहीं छोड़ेंगे, जब तक मांगे पूरी नहीं होंगी।

पांच राज्यों से कार्यकर्ता पहुंचे

प्रदर्शन में मध्यप्रदेश के अलावा हरियाणा, राजस्थान, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ से भी करणी सेना के कार्यकर्ता पहुंचे हैं। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ता माई के लाल और जय भवानी के नारे लगाते नजर आए। प्रदर्शन के लिए शनिवार रात से ही लोग भोपाल के जंबूरी मैदान पर जुटना शुरू हो गए थे। सुबह होते होते पूरा मैदान करणी सेना के कार्यकर्ताओं से भर गया। पुलिस ने जंबूरी मैदान की ओर जाने वाले रास्तों का ट्रैफिक डायवर्ट कर दिया। भारी भीड़ से कई जगहों पर जाम की स्थिति बनी।

मिलने पहुंचे पुलिस अधिकारी

एडिशनल डीसीपी रामस्नेही मिश्रा करणी सेना के प्रतिनिधिमंडल से बात करने पहुंचे। इस दौरान जीवन सिंह शेरपुर से कहा कि राज्य सरकार का प्रतिनिधिमंडल बातचीत के लिए आने के लिए तैयार है। इस पर शेरपुर ने कहा कि हमें आश्वासन नहीं चाहिए, लिखित में आदेश चाहिए। ऐसा व्यक्ति हमसे मिलने आए जो कुछ लिखित में दे सके।

उन्होंने कहा कि जो मंत्री मांगों को पूरा कर सकें, उन्हें लागू कर सकें वो आएं या मुख्यमंत्री शिवराज सिंह को आना होगा। शेरपुर के मुताबिक हमारे लिए कोई फेवरेट नहीं है और न ही दुश्मन है। हमें आश्वासन नहीं, बल्कि काम चाहिए। ये भी बताएं कि हमारी मांगों को कैसे मानेंगे, कैसे लागू करेंगे, सभी 21 मांगों पर लिखित आदेश भी चाहिए।

मांगें नहीं मानीं तो उतरेंगे राजनीति में

करणी सेना परिवार के प्रमुख जीवन सिंह शेरपुर ने कहा कि हमारी मांगें नहीं मानी तो हम राजनीति में उतरने से भी परहेज नहीं करेंगे। सवर्णों, पिछड़ा वर्ग का साथ भी हमें मिल रहा है। हम व्‍यवस्था में सुधार के लिए यह आंदोलन कर रहे हैं।

इससे पूर्व शनिवार को करणी सेना के प्रदेश मीडिया प्रभारी प्रदीप राजपूत ने बताया कि इस आंदोलन के पहले अचानक क्षत्रिय समागम का आयोजन कर सर्व समाज की आवाज को दबाने का प्रयास किया गया। आंदोलन में कई समाजों के लोग शामिल हो रहे हैं। हमारे आंदोलन को दबाने के लिए जंबूरी मैदान के आसपास शेड की चादरें लगाई गईं। लोग भोजन का प्रबंध करके आए हैं। वहीं करणी सेना परिवार के योगेंद्र सिंह ने कहा कि आंदोलन को रोकने के लिए सरकार ने तमाम प्रयास किए। आयोजन की अनुमति बड़ी मुश्किल से मिली। कई जिलों में बसों के परमिट नहीं दिए गए, इसलिए जिला स्तर पर भी आंदोलन करना पड़ रहा है।


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