दवा, पेंशन मिली या नहीं-सरकार घर-घर जाकर पूछेगी?राजस्थान में पहली बार बनी ऐसी अथॉरिटी, हर जिले में ऑफिस खुलेगा, बनेंगी टीमें

 दवा, पेंशन मिली या नहीं-सरकार घर-घर जाकर पूछेगी?राजस्थान में पहली बार बनी ऐसी अथॉरिटी, हर जिले में ऑफिस खुलेगा, बनेंगी टीमें

आपको मुफ्त राशन मिल रहा है या नहीं?

कोई फ्री राशन के बदले पैसा तो नहीं मांग रहा है?

अस्पताल में दवाई फ्री मिल रही है या नहीं?

डॉक्टर बाहर की पर्ची को नहीं लिख रहे हैं?

अब ये सवाल सरकार के अफसर ग्राउंड लेवल पर जाकर आम जनता से पूछेंगे। केवल कागजी कार्रवाई नहीं होगी। मौके पर ही ऑनलाइन रिपोर्ट बनकर उस डिपार्टमेंट के पास पहुंचेगी जिसे खुद सीएम गहलोत हेंडल करते हैं। मकसद है दवा, पेंशन, राशन जैसी योजनाओं को जिस उद्देश्य से शुरू किया गया था, उनका फायदा आप तक पहुंचा या नहीं?

प्रदेश में पहली बार सरकारी योजनाओं की ऑडिट के लिए ऐसी अथॉरिटी बनाई गई है जो IAS अधिकारी की देखरेख में काम करेगी। हर जिले की अलग टीम बनेगी और दफ्तर भी खुलेगा। टीम से जुड़े मेंबर स्कीम में किसी भी प्रकार की शिकायत मिलने पर हाथों हाथ रिपोर्ट बनाकर सबमिट करेंगे।

यह ऑडिट दो तरह से होगी। पहली सोशल ऑडिट जिसमें देखा जाएगा कि जो काम होना था वो हुआ या नहीं। दूसरी होगी परफॉर्मेंस ऑडिट जिसमें यह पता लगाया जाएगा कि जिस उद्देश्य से स्कीम या प्रोजेक्ट शुरू किया गया था, वो पूरा हुआ या नहीं।

इस अथॉरिटी का काम कैसे होगा, इससे आम आदमी को क्या फायदा मिलेगा? भास्कर टीम ने इस काम के लिए बनी सोशल एंड परफॉर्मेंस ऑडिट अथॉरिटी के आयुक्त नरेश ठकराल और वित्त विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अखिल अरोरा से जाना...

स्कीम्स की ऑडिट के लिए पहली बार बनी अथॉरिटी

सरकार ने इस काम के लिए अलग से अथॉरिटी बनाई है। इस अथॉरिटी के जरिए यह पता लगाया जाएगा कि जनता से जुड़ी योजनाओं और विभागों के काम का लोगों को कितना फायदा मिल रहा है? कहां गड़बड़ हो रही है?

इस अथॉरिटी में अतिरिक्त आयुक्त और सहायक आयुक्त की नियुक्ति भी कर दी गई है। यह अथॉरिटी फाइनेंस डिपार्टमेंट के अंडर में काम करेगी, जो फिलहाल खुद मुख्यमंत्री के पास है। अथॉरिटी अपनी ऑडिट रिपोर्ट फाइनेंस डिपार्टमेंट के मुखिया को सौंपेगी।

नरेश ठकराल का कहना है कि आने वाले दिनों में हम संभाग और जिला स्तर पर ऑफिस शुरू कर देंगे। यह अथॉरिटी खुद के स्तर पर काम तो करेगी ही, साथ ही फिक्स सैलरी पर एक्सपट्‌र्स का भी सहयोग लेगी। योजनाओं के हिसाब से अथॉरिटी तय कर सकेगी कि अपनी टीम बनाकर ऑडिट कराई जाए या एक्सपट्‌र्स से टाइअप करके ऑडिट कराई जाए। अभी अथॉरिटी के रूल्स और मैन्युअल बनाए जा रहे हैं।

मौके से ही ऑनलाइन रिपोर्ट सबमिट करेगी ऑडिट टीम

शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, बिजली, पानी सहित सरकार के सभी विभागों की ऑडिट के लिए पूरे साल का कैलेंडर तय किया जाएगा और इसके हिसाब से सोशल और परफोर्मेंस ऑडिट होगी। जो भी टीम जिस विभाग की योजना या प्रोजेक्ट की ऑडिट करने के लिए जाएगी, वह मौके से ही अपनी रिपोर्ट सबमिट करेगी। ऑडिट के बाद तत्काल उसकी रिपोर्ट सबमिट होने से तथ्यों में गड़बड़ी करने का संबंधित विभाग को कोई मौका ही नहीं मिलेगा।

एडिट नहीं हो सकेगी रिपोर्ट

ऑनलाइन रिपोर्ट सबमिट करने के लिए ऑडिट मैनेजमेंट सिस्टम बनाया गया है। इस रिपोर्ट को एक बार सबमिट होने के बाद कोई भी एडिट नहीं कर सकेगा। हर डिपार्टमेंट की प्रचलित स्कीम को लेकर कुछ खास प्रश्न तैयार किए जाएंगे, जिनका जवाब ऑडिट टीम आम लोगों से लेकर मौके पर ही उसे सब्मिट कर देगी। फिर जिस विभाग से संबंधित स्कीम पर सवाल उठेगा, उसका जवाब उसी डिपार्टमेंट को देना होगा। यह रिपोर्ट अथॉरिटी के संबंधित अफसरों तक तत्काल पहुंचेगी और जो भी फैसले लेने होंगे तत्काल लिए जा सकेंगे।

सरकार को भी मिलेंगे इन सवालों के जवाब

मुख्यमंत्री चिरंजीवी योजना की परफॉर्मेंस क्या है? इसमें किस लेवल पर सुधार की गुंजाइश है? महात्मा गांधी इंग्लिश मीडियम स्कूल की परफॉर्मेंस क्या है? जिस आबादी को फायदा पहुंचाने के लिए सड़क बनाई, क्या वह अपना उद्देश्य पूरा कर पाई? ये ऐसे सवाल है जिनका अभी सरकार के पास कोई निश्चित और वास्तविक जवाब नहीं है। अथॉरिटी की वर्किंग शुरू होने के बाद सरकार के पास सभी योजनाओं की वास्तविक स्थिति का पता रहेगा।

अब तक ऑडिट के नाम पर सिर्फ कागजों की जांच

अब तक सरकारी काम की ऑडिट के नाम पर सिर्फ कागजों की जांच होती थी। इसमें देखा जाता था कि टेंडर शर्तों के अनुसार राशि खर्च हुई या नहीं। लेकिन अब प्रत्येक विभाग से होने वाले विकास कार्यों और सरकार की आम जनता के लिए लागू की गई तमाम योजनाओं से आम लोगों को मौके पर मिले लाभ का आंकलन होगा।

आम आदमी को क्या फायदा होगा?

मान लीजिए किसी गांव में 3 करोड़ के बजट पर सड़क तो बन गई लेकिन ठेकेदार ने कई कमियां छोड़ दी। ऑडिट टीम मौके पर पहुंचकर उस प्रोजेक्ट को हर एंगल पर जांचेगी। लोगों से बात करेगी यहां क्या कमी लग रही है। अगर किसी ने कोई कमी छोड़ दी है, तो संबंधित विभाग के पास उसका नोटिस जाएगा। गड़बड़ी पाए जाने पर संबंधित के खिलाफ एक्शन भी होगा। अगर किसी को किसी स्कीम से लेकर व्यक्तिगत परेशानी हो रही है तो उसका हल भी निकाला जाएगा। इससे हर प्रोजेक्ट, हर स्कीम को पूरा करने के लिए अधिकारियों में जवाबदेही बनेगी। साथ ही सरकार को भी पता चलेगा कि उनकी स्कीम का वास्तविक फायदा मिल भी रहा है या नहीं।

अथॉरिटी की खास बातें

पब्लिक से जुड़े शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, बिजली, पानी जैसे सभी 50 से ज्यादा विभागों की ऑडिट रिपोर्ट तैयार होगी।

अथॉरिटी पूरे सालभर का एक्शन प्लान तैयार करेगी कि कहां-कब कौनसी तारीख को कौनसे डिपार्टमेंट की रिपोर्ट बनानी है।

30 से ज्यादा सरकारी स्कीम और उनकी परफॉर्मेंस का ब्यौरा सरकार के पास पहुंचेगा।

अभी तक सोशल ऑडिट केवल मनरेगा में ही होती थी। लेकिन अब इसी अथॉरिटी के अंडर में हर डिपार्टमेंट में लागू ऑडिट होगी।

पहले केवल विभाग के अधिकारी ही मॉनिटरिंग से लेकर ऑडिट करते थे। अब अथॉरिटी के सदस्य अलग से अपनी रिपोर्ट बनाएंगे।

जरूरत क्यों पड़ी?

अभी तक सरकार के पास अपनी योजनाओं की परफॉर्मेंस को आंकने का कोई फार्मूला नहीं था। केवल आंकड़ों से ही पता चलता था कि इतने लोगों के पास इतना राशन या दवाइयां पहुंची। लेकिन असल में योजना का इम्पैक्ट आम आदमी को मिला या नहीं, इसकी कोई रिपोर्ट नहीं आती थी। ऐसे में अब सरकार ने अलग से अथॉरिटी का गठन कर हल निकाला है।

इसके आधार पर सरकार तय करेगी कि किस योजना में सुधार की जरूरत है और कौनसी स्कीम को जारी रखने की जरूरत नहीं है। यह भी सामने आएगा कि गड़बड़ी कहां हुई और जिम्मेदार कौन है? अब तक सरकारी योजनाओं के वास्तविक फायदे का पता नहीं चलता था, अब हर योजना की स्थिति और उसके असर की स्थिति साफ हो जाएगी।

सरकार के कामों में सोशल और परफोर्मेंस ऑडिट का बड़ा महत्व

वित्त विभाग के एसीएस अखिल अरोड़ा ने बताया कि अब आसानी से पता लग सकेगा कि योजनाओं का लोगों में इंपैक्ट क्या है? योजनाएं धरातल पर किस तरह का परफोर्मेंस कर रही है। गवर्नमेंट के कई सारे काम ऐसे हैं जिनमें सोशल ऑडिट और परफोर्मेंस ऑडिट का बड़ा महत्व है। हमने दोनों को जोड़कर स्टेट लेवल की ऑडिट अथॉरिटी बनाई। इसमें सभी योजनाओं को जोड़ा जाएगा। सभी विभागों के काम इसके दायरे में आएंगे।






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