किडनी डैमेज 30 साल से कम युवाओं का हो रहा:ज्यादा नुकसान पहुंचा रहा पेन किलर, लाइफ स्टाइल में गड़बड़ी पड़ रही भारी

किडनी डैमेज 30 साल से कम युवाओं का हो रहा:ज्यादा नुकसान पहुंचा रहा पेन किलर, लाइफ स्टाइल में गड़बड़ी पड़ रही भारी

लखनऊ के न्यू हैदराबाद कॉलोनी के रहने वाले 23 साल के जय (परिवर्तित नाम) को एक दिन जानकारी हुई कि उनके ब्लड में क्रिएटिनिन लेवल बहुत हाई है। जब तक SGPGI में इलाज के लिए एक्सपर्ट्स चिकित्सकों के पास पहुंचते। तक तक सप्ताह में दो बार डायलिसिस करवाना मजबूरी बन चुका था।

उन्हें डॉक्टरों ने ट्रांसप्लांट की सलाह दी। बाहर डोनर की तलाश करने के बाद जब कोई नही मिला तो मां किडनी देने को तैयार हुई। इस बीच जय ने कहा कि एक बार यूपी से बाहर के डॉक्टरों से भी परामर्श ले लेना चाहिए। दिल्ली के लिए रिजर्वेशन करवाया घर से निकलने से 2 पहले ही मौत हो गई। डॉक्टरों ने कहा कि दोनों किडनी डैमेज थी। नियमित दवा लेने में भी लापरवाही की। समय से ट्रांसप्लांट होता तो जान बच जाती।

4 साल तक SGPGI चला इलाज

बड़ी टेलीकॉम कंपनी में बतौर इंजीनियर तैनात 29 साल के राज (परिवर्तित नाम) को किडनी में इन्फेक्शन का पता चला। लगभग 4 साल तक SGPGI में इलाज किया। तब तक क्रिएटिनिन लेवल नार्मल से थोड़ा ज्यादा रहा पर स्टेबल था। इस बीच लापरवाही बरतने लगे 6 महीने तक SGPGI की दवाई खाना बंद कर दिया। किसी की सलाह मानकर हिमांचल में तिब्बती पद्धति से उपचार कराने चले गए।

हालत ज्यादा बिगड़ी तो गंभीर स्थिति में लाकर SGPGI में भर्ती किया गया। हर 3 दिन में डायलिसिस होने लगी। पिता ने किडनी दिया। ट्रांसप्लांट सफल रहा, शादी भी हुई और अब एक बेटे भी हैं। रूटीन चेकअप के लिए अब समय से जाते हैं।

डॉ. अनीश बताते है कि 30 साल से कम के युवाओं में किडनी की बीमारी ज्यादा हो रही है। दर्द से राहत दिलाने वाली दवाएं भविष्य में खतरनाक साबित होती हैं। लंबे समय से जिस व्यक्ति दर्द से आराम मिलने वाली किसी भी दवाएं खाता है तो इसका असर किसी न किसी बॉडी ऑर्गन पर जरूर पड़ता हैं।

उन्होंने बताया कि अस्पताल की OPD में ऐसे मरीज ज्यादा आ रहे हैं। जिनके हाथ पैर में काफी दर्द होता हैं। वायरल फ्लू के कारण ऐसे मरीजों की संख्या ज्यादा बढ़ गई हैं। जिस समय पर वायरल फ्लू फैला था। उस समय मरीज की रिपोर्ट नॉर्मल आ रही थी। मगर सारे लक्षण डेंगू, चिकनगुनिया और मलेरिया के थे। ऐसे में जितने भी मरीज वायरल फ्लू की चपेट में आए। उनको इस तरीके समस्या हो रही हैं।

ऐसे में वह मरीज दर्द से आराम पाने के लिए बिना डॉक्टर के परामर्श के कॉम्बिफ्लेम, क्रोसिन जैसी राहत देने वाली मेडिसिन का सेवन कर लेते हैं। यह दवाएं भले ही दर्द से काफी राहत देती हैं। मगर, इन दवाइयों का असर काफी खतरनाक होता हैं। अस्पताल में रोजाना दो से तीन केस ऐसे आते हैं। जिनको इन दवाइयों का रिएक्शन हुआ होता हैं।

डॉ. अनीश बताते है कि किसी भी दवा के साथ एंटीबायोटिक इसलिए दिया जाता है। ताकि वह जो दवा खा रहा है। उसका रिएक्शन थोड़ा कम हो जाए। मरीज को पेट में जलन, एसिडिटी, उलझन जैसी समस्या न हो। ऐसे में बिना किसी डॉक्टर के परामर्श के दवा नहीं लेनी चाहिए। अगर हाथ पैर में भी दर्द हो रहा है तो पहले डॉक्टर से परामर्श लें। डॉक्टर द्वारा दी गई दवाइयों का ही सेवन करने की कोशिश करें।

इसके अलावा दर्द की दवा कितनी मात्रा में लेनी है, यह पूरी तरह से रोगी के वजन, लिंग, आयु और पिछले चिकित्सकीय इतिहास पर निर्भर करता हैं। यह खुराक मरीज की परेशानी और दवा देने के तरीके पर निर्भर करती हैं। वहीं, गर्भवती महिलाओं पर इसका प्रभाव मध्यम होता हैं। लंबे समय तक अगर कोई व्यक्ति दर्द की दवा खाता है तो इसका असर लिवर, हार्ट और किडनी पर पड़ता हैं। अगर किसी व्यक्ति को एलर्जी, रक्तस्राव, गुर्दे की बीमारी जैसी कोई समस्या हैं। तो उसे दर्द की दवा नहीं लेनी चाहिए।

अब कैसे खुद को किडनी की बीमारी से दूर -

नियमित व्यायाम करें

डॉ.अनीश श्रीवास्तव कहते हैं कि हमेशा स्वस्थ रहने के लिए रोजाना व्यायाम करने की सलाह देते हैं। संतुलित आहार लेना भी जरूरी है। किडनी को स्वस्थ रखने के लिए रोजाना व्यायाम करें। इससे हाई ब्लड प्रेशर कंट्रोल में रहता है। यह मेटाबॉलिज्म भी बढ़ाता है।

खूब सारा पानी पिएं

किडनी को स्वस्थ रखने के लिए रोजाना पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं। पानी पीने से शरीर से विषैले पदार्थ बाहर निकल जाते हैं। यह शरीर को हाइड्रेट भी रखता हैं। यह किडनी के लिए भी फायदेमंद साबित होता है। इसके लिए रोजाना कम से कम 3 लीटर पानी पिएं।

अधिक दर्द निवारक दवाएं न लें

दवा के ओवरडोज से किडनी पर बुरा असर पड़ सकता है। अक्सर लोगों को सामान्य सिरदर्द और थकान के लिए दर्द निवारक दवाओं का सहारा लेते हैं। ऐसा बिल्कुल न करें। बहुत अधिक जरूरत न हो तो दवा बिल्कुल न लें।

यह हैं बड़े कारण हैं -

मेडिकल रीजन यानी शरीर की संरचना और मेटाबोलिक वर्किंग (क्रोनिक ग्लोमेरुलोनेफ्राईटिस)।

डायबिटीज या अनकंट्रोल बीपी या फिर दोनों का होना।

किडनी में स्टोन या फिर किसी अन्य इन्फेक्शन होने पर की गई सर्जरी के बाद भी कई बार किडनी डैमेज होने की शिकायत आती हैं।

पेन किलर या कुछ विशेष दवाइयों के सेवन से।

कंजेनिटल यानी जन्मजात कारणों से भी किडनी फेल हो सकती हैं।

लाइफ स्टाइल में बदलाव और इससे जुड़ी समस्याओं के कारण भी कम उम्र के लोगों में किडनी डैमेज होना पाया गया हैं।

अब जान लीजिए किडनी डैमेज होने के संभावित लक्षण

फेस में सूजन आना।

पैरों में सूजन।

कमजोरी लगना।

हीमोग्लोबिन में कमी।

किडनी ट्रांसप्लांट का एडवांस सेंटर बना SGPGI

SGPGI में साल 2022 में इमरजेंसी मेडिसिन और रीनल ट्रांसप्लांट के डेडिकेटेड सेंटर शुरुआत हुई। इसकी अहमियत को समझते हुए खुद सीएम योगी ने इसका इनॉग्रशन किया था। निदेशक प्रो.आरके धीमन कहते हैं कि किडनी के तेजी बढ़ते मरीजों और ट्रांसप्लांट की जरूरत के चलते इस साल हमारा लक्ष्य एडवांस रीनल ट्रांसप्लांट में हर सप्ताह 5 किडनी ट्रांप्लान्ट करने का हैं। इसके लिए सभी कदम उठाए जा रहे हैं।

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