हाईकोर्ट की तल्ख टिप्प्णी गंगा प्रदूषण पर:पूछा-अधिकारी गंगा की सफाई कर नहीं पा रहे या करना ही नहीं चाहते, सुनवाई आज दोबारा होगी

 हाईकोर्ट की तल्ख टिप्प्णी गंगा प्रदूषण पर:पूछा-अधिकारी गंगा की सफाई कर नहीं पा रहे या करना ही नहीं चाहते, सुनवाई आज दोबारा होगी

गंगा प्रदूषण मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गुरुवार को तल्ख टिप्पणी की। हाईकोर्ट ने पूछा कि जिम्मेदार अफसर गंगा की सफाई कर नहीं पा रहे हैं या करना ही नहीं चाहते। कोर्ट ने सरकार का पक्ष रखने के लिए महाधिवक्ता को तलब किया है। मामले में आज दोबारा कोर्ट सुनवाई करेगा।

हर विभाग के हलफनामे में था विरोधाभास

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक नवंबर को भी मामले में सुनवाई की थी। कोर्ट में प्रस्तुत किए गए विभिन्न विभागों के हलफनामों में विरोधाभास पाया था। इसको देखते हुए महाधिवक्ता को सभी की तरफ से एक हलफनामा दाखिल करने और स्थिति स्पष्ट करने का आदेश दिया था।

गुरुवार को इस मामले की जब हाईकोर्ट की मुख्य न्यायाधीश राजेश बिंदल, जस्टिस मनोज कुमार गुप्ता और जस्टिस अजीत कुमार की पूर्णपीठ ने जनहित याचिका पर सुनवाई शुरू की। इस दौरान अपर महाधिवक्ता अजीत कुमार सिंह सरकार का पक्ष रखने आए। इस पर कोर्ट ने सख्त नाराजगी जाहिर की और सुनवाई टालते हुए कहा कि महाधिवक्ता स्वयं आएं।

कोर्ट ने पूछा, गंगा के जल की शुद्धता के मामले में क्या किया?

कोर्ट ने सरकार की तरफ से पेश हुए अपर महाधिवक्ता अजीत कुमार सिंह से गंगा के शुद्धीकरण पर स्थिति जाननी चाही। कोर्ट ने पूछा कि गंगाजल की शुद्धता के मामले में क्या किया गया? अपर महाधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि कोर्ट के आदेश के तहत उन्होंने गंगा में गिर रहे नाले टैप्ड करा दिए हैं। इसके अलावा मेला क्षेत्र को पॉलीथिन मुक्त करने के लिए करवाई की जा रही है।

इस पर जनहित याचिका दाखिल करने वाले एडवोकेट विजय चंद्र श्रीवास्तव सुनीता शर्मा व शैलेश सिंह ने अपना पक्ष रखा। एडवोकेट विजय चंद्र श्रीवास्तव का कहना था कि 6 जनवरी से माघ मेला शुरू हो रहा है। कोर्ट के आदेश के बावजूद गंगा में स्नान के लिए पर्याप्त पानी नहीं है। गंगा का पानी गंदा है। पौष पूर्णिमा पर पहले स्नान पर्व के लिए लाखों श्रद्धालु आ चुके हैं। दो दिन पूर्व प्रदेश के मुख्य सचिव दुर्गाशंकर मिश्र और डीजीपी देवेंद्र सिंह चौहान मेला क्षेत्र की तैयारियां परखीं पर गंगा जल में प्रदूषण की जांच नहीं कराई। इससे ऐसा लगता है शासन और प्रशासन इस मामले में बिल्कुल भी चिंतित नहीं है। कल्पवासी गंदे और काले पानी में स्नान करने को मजबूर हैं। मुख्य सचिव से इस बारे में पूछा जाना चाहिए।

एडवोकेट शैलेश सिंह ने कहा कि 21 जनवरी 2021 के अपने आदेश में कोर्ट ने गंगा कल की शुद्धता, एसटीपी और ड्रेनेज में सुधार के लिए कहा था। महाधिवक्ता ने अनुपालन रिपोर्ट हलफनामे के रूप में प्रस्तुत की है। इसे कोर्ट ने रिकॉर्ड पर लेते हुए महाधिवक्ता को शुक्रवार को खुद उपस्थित होने का आदेश दिया है। इस मामले की सुनवाई आज भी होगी।

नालों का गंदा पानी सीधे गंगा में जा रहा

न्याय मित्र वरिष्ठ अधिवक्ता अरुण कुमार गुप्ता ने कहा कि गंगा की स्वच्छता के नाम पर अधिकारी केवल पैसे खर्च कर रहे हैं। उन्होंने कोर्ट को बताया कि सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स की शोधन क्षमता से दोगुना पानी आ रहा है। 60 फीसदी सीवर ही सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से जोड़े गए हैं। नालों के बायोरेमिडियल शोधन की अधूरी प्रणाली से खानापूरी की जा रही है।

उन्होंने कहा कि राजापुर, नैनी सहित कई ट्रीटमेंट प्लांट से फ्लो 120 एमएलडी आ रहा है, जबकि क्षमता 60 एमएलडी की है। कोर्ट को बताया कि एसटीपी से भी पानी शोधित नहीं हो पा रहा है। माघ के दौरान केवल 4000 क्यूसेक पानी छोड़ने से गंगा का जल शुद्ध नहीं हो पाएगा।

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