फोटो के लिए 3 नेता बने 1 बच्चे के पिता, किस मंत्री को अपने साथ प्लेन में ले गए राहुल

फोटो के लिए 3 नेता बने 1 बच्चे के पिता, किस मंत्री को अपने साथ प्लेन में ले गए राहुल

सियासत में मन की बात कोई नहीं बताता, जो यह दावा करें तो समझो गड़बड़ है। इसके पीछे वजह भी है, क्योंकि असलियत बताने से सियासी रिश्ते बिगड़ने का डर रहता है और सामने वाला आपका हाईकमान हो तो वह भारी नुकसान भी कर सकता है।

इस वजह से नेता हाईकमान को मन की बात की जगह कर्णप्रिय बात कहने में ही भलाई समझते हैं। पिछले दिनों सत्ताधारी पार्टी के पावरफुल नेताजी ने यात्रा के दौरान नेताओं का मन टटोला। सबसे पावरफुल नेता ने प्रदेश के पावरफुल नेता से यात्रा और अपने बारे में फीडबैक मांगा।

पहले तो पावरफुल नेता ने कर्णप्रिय फॉर्मूला अपनाया, लेकिन सबसे पावरफुल नेता मन की बात सुनने पर अड़ ही गए। सबसे पावरफुल नेता को बताया गया कि बहुत ज्यादा जिद्दी और अनिश्चित मूड ये दो कमजोरियां हैं, जिन्हें ठीक किया जाना चाहिए। बात आई गई हो गई, अब देखते हैं दोनों बातों पर कितना गौर होता है?

मंत्री की लोकसभा चुनाव लड़ने की तमन्ना

सत्ता से जुड़े नेताओं के अपने अपने समीकरण हैं। हर नेता की अपनी सियासी ताकत और कमजोरियां हैं। अगले चुनावों को लेकर कई चिंता में हैं, लेकिन एक मंत्रीजी का कॉन्फिडेंस देखने लायक है। अपने बयानों की वजह से चर्चा में रहने वाले मंत्रीजी विधानसभा चुनावों की चिंता छोड़ लोकसभा चुनाव लड़ना चाहते हैं।

भारत जोड़ो यात्रा में मंत्रीजी ने इसका ऐलान भी कर दिया। मंत्रीजी को यात्रा का चीफ भी बना रखा है। सबसे पावरफुल नेता से बातचीत में भी मंत्रीजी ने इच्छा बता दी कि लोकसभा का टिकट दे देंगे तो केंद्रीय मंत्री को हरा दूंगा। अभी लोकसभा चुनाव में डेढ़ साल बाकी है।

कोई मंत्री इतने समय पहले अगर कॉन्फिडेंट होकर लोकसभा का टिकट मांगे तो कोई तो बात होगी। अब रिजल्ट और रियलिटी का तो पता नहीं लेकिन मंत्रीजी के कॉन्फिडेंस की सत्ताधारी पार्टी में सब जगह खूब चर्चा है।

राहुल एक मंत्री को प्लेन में साथ दिल्ली ले गए और लाए

सियासत में कौन कब पावरफुल हो जाए और कौन पावरलेस…कोई नहीं कह सकता। डेयरी की राजनीति पर पकड़ रखने वाले एक मंत्री की दिल्ली कमजोर मानी जाती थी। हाईकमान से सीधा संपर्क तो सपने से कम नहीं था, लेकिन भारत जोड़ो यात्रा ने नए समीकरण बना दिए।

डेयरी की राजनीति वाले मंत्री को यात्रा के मैनेजमेंट का काम मिला और यह एक अवसर बन गया। ठेठ देसी वेशभूषा वाले मंत्री से जब सबसे पावरफुल नेताजी की बात हुई तो डेयरी पॉलिटिक्स के मंत्री मन को भा गए। सबसे पावरफुल नेता को डेयरी पॉलिटिक्स का मंत्र ऐसा पसंद आया कि पहले तो मंत्री के नंबर सेव किए।

यात्रा के 100 दिन पूरे होने पर राजधानी में कल्चरल नाइट के बाद सबसे पावरफुल नेता रात में दिल्ली ले गए। कहानी यही से घूमती है। सबसे पावरफुल नेता जब दिल्ली गए तो चार्टर प्लेन में मंत्री को भी साथ ले लिया, रास्ते में खूब बातें हुई। डिनर ब्रेकफास्ट भी साथ हुआ।

चार्टर प्लेन से दिल्ली से वापस भी साथ लाए। अब अगर सबसे पावरफुल नेता किसी मंत्री को इतना भाव दे तो कोई तो कारण है। सभी इसी कारण की तलाश में जुट गए हैं, लेकिन इसके पीछे कोई न कोई सियासी संकेत तो छिपा हुआ है।

मंत्री पुत्र की शादी में पावर गेदरिंग को किसने रोका?

सत्ताधारी पार्टी के राष्ट्रीय नेता की यात्रा को लेकर नेताओं के अपने अपने गणित हैं। एक महिला मंत्री के लिए पावरफुल नेता की यात्रा असुविधा का कारण जरूर बन गई। जिस समय यात्रा की राजस्थान से शुरुआत हुई, उसी समय मंत्री पुत्र की शादी थी।

मंत्री ने मुख्यमंत्री और कैबिनेट के साथियों को न्यौते भेज रखे थे लेकिन कोई नहीं पहुंचा। अब पार्टी के सबसे पावरफुल नेता को नाराज करके साथी मंत्री के बेटे के रिसेप्शन में जाने का रिस्क कौन समझदार नेता उठाएगा? इसी वजह से मंत्री पुत्र की शादी पावर गेदरिंग बनने से रह गई, अगर टाइमिंग सही होती तो मंत्री-विधायकों की लाइन लग जाती।

नेताओं संग अफसरों का अनोखा फोटो सेशन

सियासत और ब्यूरोक्रेसी हमराही बनकर काम करें तभी राज करने का आनंद है, लगता है यह सार्वभौमिक सच्चाई दोनों ने स्वीकार कर ली है। सियासी यात्राएं सफल करने की जिम्मेदारी भी आजकल पुलिस और प्रशासन की बड़ी जिम्मेदारी बन गई है।

सत्ताधारी पार्टी की यात्रा में सियासत और ब्यूरोक्रेसी का हमराही कनेक्शन बहुत साफ देखा जा सकता था। एमपी बॉर्डर से लेकर हरियाणा बॉर्डर तक बड़े अफसरों ने हर पल ऑन द स्पॉट रहकर जिम्मेदारी संभाली। अब जब विदाई की बारी आई तो टॉप ऑफिसर्स भी मौजूद थे।

सत्ताधारी पार्टी के सबसे पावरफुल नेता और प्रदेश के मुखिया के साथ टॉप ऑफिसर्स ने फोटो भी खिंचवाए। अब ये फोटो कुछ जागरूक नागरिकों के पास भी पहुंच गए हैं। एक सीनियर अफसर का कमेंट था कि ड्यूटी तक तो ठीक था लेकिन यह ज्यादा हो गया।

अब सबकी अपनी अपनी पसंद है, लक्षमण रेखा का दायरा तो पहले मिट ही चुका है, इसलिए फोटो सार्वजनिक हो भी जाए तो क्या फर्क पड़ता है।

फोटो खिंचवाने के लिए तीन नेता बने एक बच्चे के पिता, बच्चे ने खोली पोल

प्रदेश में भारत जोड़ो यात्रा के 485 किलोमीटर के पैदल रूट में सियासी किस्सों और कहानियों की भरमार रही। इंसानी मनोविज्ञान के कई नए सबक भी देखने-सीखने को मिले। यात्रा में एक जगह ध्यान खींचने के लिए बच्चों को तख्तियां लेकर खड़ा किया।

सबसे पावरफुल नेता की निगाह जब बच्चे पर पड़ी तो रुक गए। पावरफुल नेता ने बच्चे के पिता को बुलाने के लिए कहा तो तीन स्थानीय नेता आ गए। एक बच्चे के तीन पिता सामने देख हर कोई हैरान रह गया। बच्चे के पिता को फोटो खिंचवाने बुलवाया था।

तीन नेता बच्चे के पिता बनकर आ गए कि चलिए इस सहारे ही सही फोटो तो आए, लेकिन तीन दावेदारों की वजह से गफलत हो गई। आखिर में बच्चे ने ही फैसला कर दिया, बच्चे को जब गोद एक्सचेंज करवाई गई तो वह असली पिता की गोद में गया, बाकी दो की तरफ देखा ही नहींं।

फोटो खिंचवाकर असली पिता बच्चे को लेकर चला गया लेकिन उन दो की हालत देखने लायक थी। इस तरह के नजारे सियासी कार्यक्रमों में ही देखने को मिल सकते हैं। सियासत का नेचर इसी तरह का है, जैसा बच्चे के दावेदार तीन पिताओं का था।

नए साल में ब्यूरोक्रेसी में फिर फेरबदल की तैयारी

नए साल में कुछ बदले न बदले, लेकिन ब्यूरोक्रेसी में कई चेहरे इधर से उधर होने तय हैं। एक जनवरी से आईएएस, आईपीएस, आईएफएस के प्रमोशन हो जाएंगे। प्रमोशन के बाद अफसरों को नई जगहों पर पोस्टिंग भी देनी होगी, इसकी अभी से तैयारियां शुरू हो गई हैं।

विधानसभा का बजट सत्र भी जनवरी के पहले सप्ताह में बुलाया जा रहा है। विधानसभा के बजट सत्र से पहले ब्यूरोक्रेसी में बदलाव की तैयारी है। कौन कहां जाएगा, कौन कहां उपयोगी है, इसका गणित बैठाया जा रहा है। बजट सत्र के बाद जम्बो फेरबदल भी होना है, क्योंकि चुनावों के हिसाब से वह फेरबदल काफी अहम होगा।

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