अब नहीं लगाने पड़ेंगे दफ्तरों के चक्कर: पेंशनर्स घर बैठे ही दे सकेंगे जिंदा होने का प्रमाण, सरकार बना रही है मोबाइल एप

अब नहीं लगाने पड़ेंगे दफ्तरों के चक्कर: पेंशनर्स घर बैठे ही दे सकेंगे जिंदा होने का प्रमाण, सरकार बना रही है मोबाइल एप

राजस्थान में सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं से जुड़े 94 लाख लोगों को सरकार बड़ी सुविधा देने जा रही है। पेंशनर्स को अपने जीवित होने का प्रमाण देने के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। सरकार ऐसा मोबाइल एप बना रही है जिसके जरिए पेंशनर्स घर बैठे ही अपने जीवित होने का प्रमाण दे सकेंगे। पेंशनर्स को मोबाइल एप पर साल में एक बार अपना जन आधार नंबर और सामान्य जानकारी फीड करके सिर्फ चेहरा स्कैन करना होगा। ऐसा करने के बाद सरकार उनकी अगले साल की पेंशन रिन्यु कर देगी।

हर साल नवंबर-दिसंबर में सभी पेंशनर्स को अपने जीवित होने का प्रमाण सरकार को देना होता है। उनको यह बताना पड़ता है कि वे जीवित हैं और पेंशन के हकदार हैं। इसके लिए पेंशनर्स को या तो ई-मित्र कियोस्क पर जाना पड़ता है या एसडीओ कार्यालय जाकर बायोमेट्रिक के जरिए थंब इप्रेशन देना होता है। इसके बाद ही उनका वेरिफिकेशन होता है। इस वेरिफिकेशन के आधार पर वे अगले साल की पेंशन के लिए योग्य माने जाते हैं। यह प्रकिया पूरी करने के बाद ही सरकार पेंशनर्स की हर साल जनवरी में पेंशन रिन्यु करती है।

बायोमेट्रिक मशीन पर बुजुर्गों के अंगूठा निशान नहीं आते

सामाजिक न्याय विभाग के सेक्रेटरी डॉ. समित शर्मा ने बताया कि प्रदेश में करीब 94 लाख लोगों को सामाजिक सुरक्षा पेंशन दी जा रही है। इसमें वृद्धावस्था पेंशन, निशक्तजन पेंशन, एकल नारी पेंशन और लघु व सीमांत किसान योजना के वृद्धजनों को मिलाकर लगभग 82 लाख लाभार्थी शामिल हैं। इसके अलावा करीब 12 लाख लोग वे शामिल हैं जिनको केंद्र सरकार की तीन योजनाओं (वृद्धावस्था, विधवा और निशक्तजन) के तहत पेंशन मिलती हैं। केंद्र की योजनाओं में राज्य सरकार अपने हिस्से की राशि पेंशन के रूप में देती है। अभी पेंशनर्स का हम बायोमेट्रिक सिस्टम के आधार पर हर साल सत्यापन करते हैं कि वे जीवित हैं और पेंशन के लिए अगले साल के लिए हकदार हैं।

डॉ. समित शर्मा के अनुसार पेंशनर्स के वेरिफिकेशन के लिए अभी दो तरीके अपनाए जाते हैं। या तो उनको ईमित्र पर जाकर अपना वेरिफिकेशन कराना होता है या जिन स्थानों पर ईमित्र की सुविधा नहीं है, वहां उनको एसडीएम या बीडीओ के आफिस जाकर फिजिकल वेरिफिकेशन कराना होता है। चूंकि योजना से जुड़े लोग या तो बुजुर्ग हैं या निशक्त अथवा महिलाएं। ऐसे में उनको वेरिफिकेशन के लिए घर से आने- जाने में काफी दिक्कत होती है। ज्यादा उम्र के लोगों के अंगूठे के निशान बायोमेट्रिक मशीन कई बार लेती भी नहीं है। इससे परेशानी और बढ़ जाती है।

डॉ. शर्मा के अनुसार पेंशनर्स का कई बार समय पर वेरिफिकेशन नहीं होने पर उनकी पेंशन बंद हो जाती है। वापस शुरू करने के लिए पेंशनर्स को अनावश्यक चक्कर लगाने पड़ते हैं। मोबाइल एप के जरिए फेस स्कैनिंग तकनीक का इस्तेमाल कर हम राजस्थान में पेंशनर्स का वेरिफिकेशन शुरू करने जा रहे हैं। यह पेंशनर्स के लिए जीवन प्रमाण आसानी से उपलब्ध कराने में बड़ा कदम साबित होगा। इससे पेंशनर्स और सरकारी मशीनरी दोनों की वर्किंग आसान हो जाएगी।

26 जनवरी से सुविधा शुरू होगी

सामाजिक न्याय विभाग ने इसके लिए पिछले दिनों आईटी विभाग को टेक्निकल सहयोग के लिए पत्र लिखा था। पेंशनर्स की सुविधा के लिए आईटी विभाग में मोबाइल एप बनाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। आईटी विभाग की ओर से बनाए जा रहे मोबाइल एप के जरिए पेंशनर्स को फिजिकल वेरिफिकेशन की सुविधा संभवत: 26 जनवरी से शुरू होगी।

एप के लिए पेंशनर्स का खुद का मोबाइल जरूरी नहीं

एप डाउनलोड करने के लिए पेंशनर्स के लिए जरूरी नहीं कि उनका खुद का मोबाइल नंबर हो। वे परिवार के किसी भी सदस्य के मोबाइल पर यह एप डाउनलोड करवाकर अपना वेरिफिकेशन कर सकेंगे। जैसे ही एप पर पेंशनर्स अपना जनआधार नंबर लिखेंगे उनकी पूरी डिटेल दिखेगी। इसमें फेस स्कैन के लिए विंडो खुलेगी जिस पर पेंशनर्स को अपना चेहरा स्कैन करना होगा। मात्र कुछ सेकंड में पेंशनर्स का वेरिफिकेशन हो जाएगा।

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