4 साल बाद भी नियुक्तियों के इंतजार में कांग्रेसी, कभी कोविड-19 तो कभी बगावत, चुनाव-यात्रा के कारण अटकती रही नियुक्तियां

4 साल बाद भी नियुक्तियों के इंतजार में कांग्रेसी, कभी कोविड-19 तो कभी बगावत, चुनाव-यात्रा के कारण अटकती रही नियुक्तियां

राजस्थान से भारत जोड़ो यात्रा गुजरने के बाद कांग्रेस में एक बार फिर कार्यकर्ताओं की उम्मीदें जग गई हैं। पिछले 4 साल से राजनीतिक और संगठनात्मक नियुक्तियों की बाट जोह रहे नेताओं को अब पार्टी से आखिरी उम्मीद है। माना जा रहा है कि चुनावी साल होने के चलते अब जल्द ही संगठनात्मक नियुक्तियों के साथ-साथ यूआईटी-प्राधिकरण सहित शेष बचे निगम-बोर्ड में राजनीतिक नियुक्तियां भी की जाएंगी।

हर पांच साल में सरकार बनने के बाद राजनीतिक नियुक्तियां की जाती हैं। इसके अलावा 3 साल में संगठन में फेरदबल भी होता है, लेकिन वर्तमान सरकार में राजनीतिक नियुक्तियों की पहली सूची ही सवा तीन साल बाद जारी हुई। उसके कुछ समय बाद दूसरी सूची जारी हुई। प्रदेश के 14 यूआईटी में तो अब तक चेयरमैन की कुर्सियां ही खाली हैं। इसके अलावा जयपुर, जोधपुर और अजमेर प्राधिकरणों के अध्यक्षों सहित अन्य कई पद भी खाली पड़े हैं।

पीसीसी सहित जिला संगठन का भी नहीं हुआ विस्तार

विधानसभा चुनाव के बाद ही प्रदेश सहित कई जिलों में जिलाध्यक्ष बदले जाने थे। कार्यकारिणियां भी नई बननी थी। इसके अलावा 2020 के मानेसर एपिसोड के बाद पीसीसी की पूरी कार्यकारिणी भंग कर दी गई थी। उसके बाद से अब तक संगठन का विस्तार नहीं हो पाया है। कई जिलों में अध्यक्ष बदले गए, लेकिन ज्यादातर जिलों में अब भी कई सालों से निवर्तमान जिलाध्यक्ष और ब्लॉक अध्यक्ष ही जिम्मेदारियां संभाल रहे हैं।

इस तरह बार-बार टलती गई नियुक्तियां

लोकसभा-निकाय चुनाव और कोविड-: विधानसभा चुनाव के बाद मई 2019 में लोकसभा चुनाव आ गए। वहीं नवंबर 2019 में प्रदेशभर में निकाय चुनाव हो गए। इसके बाद अप्रैल 2020 में 3 सीटों पर राज्यसभा चुनाव आ गए। इसी बीच कोविड-19 आ गया। कोविड-19 के चलते राजनीतिक नियुक्तियां सरकार की प्राथमिकता से दूर चली गई। 2021 तक यह दौर चलता रहा।

बगावत ने संगठन के रास्ते भी रोके-: जुलाई 2020 में जब पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट और उनके समर्थक विधायकों ने बगावत की तो पूरा का पूरा संगठन और उसकी कार्यकारिणी भंग करनी पड़ी। पायलट और समर्थकों को वापस तो बुला लिया गया, लेकिन तनानती और गुटबाजी का एपिसोड 2021 तक चलता रहा। इसके चलते पीसीसी में नई कार्यकारिणी नहीं बनी।

उप चुनाव और मंत्रिमंडल विस्तार-: 2021 में पहले मई में 3 और फिर अक्टूबर में 2 सीटों पर उप चुनाव हुए। इसके साथ ही कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए चुनाव की घोषणा भी हुई। नवंबर 2021 में मंत्रिमंडल विस्तार भी हुआ। इन सभी बड़ी घटनाओं के चलते एक बार फिर राजनीतिक नियुक्तियां और संगठन विस्तार टल गया। इस बीच लगातार कभी गहलोत-पायलट के बीच अनबन तो कभी सुलह की खबरें आती रही।

चिंतन शिविर, गुजरात चुनाव और यात्रा-: 2022 की शुरुआत यूपी सहित 5 राज्यों के चुनाव से हुई। पूरी पार्टी इन्हीं चुनावों में लगी थी, ऐसे में नियुक्तियां फिर टल गई। इसके बाद मई में कांग्रेस का राष्ट्रीय चिंतन शिविर राजस्थान में उदयपुर में हुआ। करीब 1.5 महीने तक कांग्रेस नेता इसी में लगे रहे। इसके कुछ समय बाद ही कांग्रेस अध्यक्ष पद के चुनाव की सुगबुगाहट शुरू हो गई। इसमें राजस्थान के सीएम गहलोत का अध्यक्ष पद के लिए नाम आते ही नई चर्चाएं शुरू हुई।

जब लगने लगा कि गहलोत अध्यक्ष और पायलट सीएम बनेंगे और फिर एक बार राजस्थान में सब कुछ सही हो जाएगा, तभी नया भूचाल आ गया। 25 सितंबर को कांग्रेस के विधायकों ने इस्तीफा दे दिया। गहलोत राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने से पीछे हट गए। इसी बीच गुजरात-हिमाचल चुनाव आ गए। दोनों राज्यों के चुनाव खत्म हुए कि भारत जोड़ो यात्रा राजस्थान आ गई। इन सभी इवेंटस ने एक बार फिर संगठन और राजनीतिक नियुक्तियों को खिसका दिया।

आचार संहिता में अब 10 महीने शेष

राजस्थान में दिसम्बर 2023 में चुनाव होने हैं। इसकी आचार संहिता अक्टूबर में लग जाएगी। ऐसे में इसमें महज 10 महीने का समय शेष रहा है। इसे देखते हुए अब कांग्रेस के लिए ये नियुक्तियां जल्द से जल्द करना चुनौती होगा। वहीं नियुक्ति की उम्मीद लगाए बैठे नेता और कार्यकर्ताओं के लिए भी यह अंतिम मौका है।

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