चीन के मुद्दे पर मोदी के मंत्रियों ने संभाला मौर्चा, पीयूष गोयल बोले- निचले स्तर पर राजनीति कर रही कांग्रेस

चीन के मुद्दे पर मोदी के मंत्रियों ने संभाला मौर्चा, पीयूष गोयल बोले- निचले स्तर पर राजनीति कर रही कांग्रेस

अरुणाचल प्रदेश के तवांग में भारत और चीन की सेना के बीच झड़प को लेकर विपक्ष जबरदस्त तरीके से केंद्र की मोदी सरकार पर हमलावर है। विपक्ष साफ तौर पर संसद में इस मुद्दे को लेकर चर्चा की मांग कर रहा है। संसद में आज भी हंगामा जारी रहा। इन सबके बीच सरकार विपक्ष के सवालों के जवाब में पलटवार करते दिखाई दे रही है। खुद मोदी सरकार के मंत्रियों ने विपक्ष के खिलाफ मोर्चा संभाल लिया है। राज्यसभा में सदन के नेता और केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने भी कांग्रेस और विपक्षी दलों पर जबरदस्त तरीके से निशाना साधा है। पीयूष गोयल ने विपक्ष खासतौर कांग्रेस पार्टी पर बहुत ही निचले स्तर की राजनीति करने का आरोप लगा दिया है। 

अपने बयान में पीयूष गोयल ने कहा कि कई ऐसे संवेदनशील विषय होते हैं जिसपर UPA सरकार के दौरान भी चर्चा नहीं की जाती थी। इस बार भी रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सदन में स्पष्ट रूप से अपना बयान रखा। उन्होंने आगे कहा कि मैं समझता हूं कि उसके बाद इस विषय को विराम देना चाहिए था लेकिन कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हमारी सेना को हतोत्साहित कर रहे हैं। इसके साथ ही उन्होंने राहुल गांधी के बयान पर भी पलटवार किया। गोयल ने कहा कि राहुल गांधी ने जिस प्रकार के बयान दिए उससे मैं समझता हूं कि सेना का मनोबल टूटता है। उन्होंने कहा कि यह देश के सर्वोत्तम हित में है कि सुरक्षा के संवेदनशील मामले और लोकतांत्रिक मूल्यों और संसद के कामकाज को बनाए रखने के लिए, विपक्ष को संसद के सुचारू कामकाज की अनुमति देनी चाहिए

इससे पहले केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने कहा कि तवांग पर हमसे सवाल करने से पहले, राहुल गांधी को जवाब देना चाहिए, क्या वह चीनी अधिकारियों के साथ थे, जबकि भारतीय सेना डोकलाम मुद्दे पर चीन के सैनिकों से लड़ रही थी? क्या उन्होंने उस समय हमारी सेना पर सवाल उठाया था? क्या राजीव गांधी फाउंडेशन ने चीनी अधिकारियों से फंडिंग ली? दूसरी ओर कांग्रेस के पवन खेड़ा ने कहा कि यहाँ क्या गलत है? आप जवाब दें पीएम मोदी चीन से क्यों डरते हैं? वह उनके सामने अपना मुँह क्यों नहीं खोलता? उन्होंने साफ तौर पर कहा कि वह उन्हें क्लीन चिट क्यों देते हैं और हमारे ही जवानों के बलिदान को नकारते हैं और उनका अपमान करते हैं।

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