लखनऊ: 4 स्कूली बच्चों ने कबाड़ से बना दी DSF टेक्नोलॉजी वाली 5G इलेक्ट्रिक कार

लखनऊ: 4 स्कूली बच्चों ने कबाड़ से बना दी DSF टेक्नोलॉजी वाली 5G इलेक्ट्रिक कार

यूपी की राजधानी लखनऊ के 8 से 14 साल के 4 स्कूली बच्चों ने 3 पॉल्यूशन फ्री इलेक्ट्रिक कारें डेवलप कर दी हैं। खोज इतनी बड़ी है कि नेशनल ज्योग्राफिक से लेकर डिस्कवरी चैनल तक स्टोरी कवर करने के लिए बच्चों से संपर्क साध रहे हैं। यूपी सरकार ने तो बच्चों के सम्मान में विधानसभा को सजवा दिया और सम्मानित किया।

दरअसल, इन बच्चों ने DFS यानी डस्ट फिल्ट्रेशन सिस्टम को तैयार कर ये इलेक्ट्रिक कारें बनाई हैं। खासियत ये है कि कारें चलेंगी तो पॉल्यूशन नहीं करेंगी बल्कि पॉल्यूशन को सोखेंगी। ये कार देश के जाने माने रोबोटिक एक्सपर्ट 29 वर्षीय मिलिंद राज के डिफेंस रिसर्च सेंटर में रखी हुई है। दैनिक भास्कर उसी रिसर्च सेंटर में पहुंचा। बच्चों से कार डेवलपमेंट की पूरी प्रोसेस को डिटेल में जाना।

आइए, आपको भी वो अनोखी कारें दिखाते हैं जो बच्चे खुद चला रहे हैं। कारें तैयार कैसे हुईं इसकी पूरी प्रोसेस बच्चों की जुबानी जानते 

कार जितनी चलेगी एनवायरनमेंट उतना ही क्लीन होगा

11 साल के यंग साइंटिस्ट गर्वित सिंह ने बताया, हमारी कार में एक स्पेशल फीचर है- DFS यानी डस्ट फिल्ट्रेशन सिस्टम। गाड़ी जितनी चलेगी अपने आस-पास के 5 से 7 फीट रेडियस के पॉल्यूशन खत्म कर देगी। धूल और धुएं को पूरी तरह सोख लेगी। कार पूरी तरह से इलेक्ट्रिक है इसलिए खुद पॉल्यूशन भी नहीं करती। इससे प्रदूषण से होने वाली बीमारियों में भी कमी आएगी।

दरअसल, DFS के अंदर एक फिल्टर और एक स्क्विरल केज मोटर है जो पोल्यूटेड एयर को शक करती है। फिल्टर उस हवा को प्यूरिफाई पानी साफ करने का काम करता है। हमने ऊपर की तरफ एक ग्रिल फिट किया है जो साफ हवा को एनवायरनमेंट में रिलीज करता है। साथ ही कारों में 5G फीचर भी है जिसकी मदद से हम एक दो बटन से ऑपरेट कर सकते हैं। आगे पीछे कर सकते हैं

विश्व की पहली पॉल्यूशन फ्री कार बनाने में खर्च हुए 1 लाख

आर्यव ने कहा, जब हमने इस कार को डेवलप करने का काम शुरू किया तो हमारे दिमाग में ये बात थी कि ऐसी कार बनाएंगे जिसे हर कोई खरीद कर पाए। हम देश के हर घर में पॉल्यूशन फ्री इलेक्ट्रिक कार चाहते हैं। 5 से 6 फीट लंबी ये कारें बनाने में करीब 3-4 लाख रुपए खर्च हुए हैं। एक कार में 1 लाख रुपए से ज्यादा का खर्च आया है।

हमारी कार सोलर हाइब्रिड डी एफ एस एवं अल्ट्रावायलेट टेक्नोलॉजी वाली कार है। ये कार नेट जीरो एमीशन करती है। फेक्ट्रियों से निकलने वाले पॉल्यूशन को भी एब्जॉर्ब कर लेती है। कारों में स्टीयरिंग, अच्छे ब्रेक्स, एक्सीलेरेटर, लाइट्स, आरामदायक सीटें और आसानी से चलने के लिए वाहनों में मोटोराइज्ड गियर लगाए गए हैं।

एक बार के चार्ज में चलेगी 110 किलोमीटर, पेटेंट भी होंगी

अलग-अलग डिजाइन से तैयार की गई ये कारें एक सीटर से लेकर तीन सीटर तक हैं। क्लासिक और मॉडर्न डिजाइन की इन गाड़ियों में 100 वाट इलेक्ट्रिक ड्राइव सिस्टम के लिए BLDC यानी ब्रश लेस डायरेक्ट करंट मोटर लगाया गया है। एक बार चार्ज होने पर ये कारें 110 किमी तक का सफर तय कर सकती हैं।

कबाड़ से इलेक्ट्रिक कार बनाने में लगे डेढ़ साल

इन छोटे बच्चों ने साल 2021 के मई-जून महीने में कार डेवलप करने की शुरुआत की थी। पॉल्यूशन फ्री सिस्टम डेवलप करने के बाद उन्होंने कार के ढांचे पर काम किया। इस काम में उनकी मदद मिलिंद राज ने की। उन्होंने रीयूजेबल यानी बेकार पड़ी पुरानी चीजों से यूजफुल मटेरियल का चुनाव किया।

कार बनाने में रॉड, स्टील शीट समेत कई चीजों का इस्तेमाल किया गया। डेढ़ साल की दिन-रात की मेहनत के बाद कार बन कर तैयार हुई। मिलिंद ने बताया, कार बनाते वक्त बच्चों ने वेल्डिंग का काम भी खुद ही किया है। बच्चों के ये नन्हें हाथ आर्क और गैस दोनों तरह की वेल्डिंग कर लेते हैं। बस, सुपरविजन और सेफ्टी का ध्यान मैने रखा।

अब कार बनाने के आईडिया से लेकर उसे पूरा करने तक के बच्चों के सफर की बात पर चलते हैं…एंटी कोरोना ड्रोन बनाने वाले मशहूर रोबोटिक साइंटिस्ट मिलिंद राज के बारे में भी जानेंगे।

प्रोजेक्ट का मास्टरमाइंड गर्वित, एलन मस्क से प्रभावित

पॉल्यूशन फ्री कार डेवलपर गर्वित सिंह की उम्र अभी 11 साल है। वन्यजीव रक्षा में रुचि है और रोबोटिक साइंस के मास्टर बन चुके हैं। गर्वित ने बताया, जब मैं 7 साल का था तब न्यूज में देखता था। दुनिया के साथ हमारा देश भी पॉल्यूशन से परेशान है। दिल्ली के बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं। सबसे ज्यादा पॉल्यूशन कारों की वजह से हो रहा है। इसलिए सरकार ऑड-ईवन लागू किया है।

ये देख कर मैं परेशान हुआ फिर मैंने एलन मस्क के बारे में सुना कि वो दुनिया को पॉल्यूशन फ्री करने के लिए इलेक्ट्रिक कारें बना रहे हैं। यहां से मुझे आइडिया आया कि क्यों न ऐसी कार डेवलप करूं जो पॉल्यूशन ना करे बल्कि पॉल्यूशन को खत्म कर दे। फिर साल 2016 में फेसबुक पर मुझे और मेरी मम्मी को रोबोटिक एक्सपर्ट मिलिंद राज सर मिले। हमने उनसे कांटेक्ट किया।

8 से 14 साल के बच्चों ने फॉरएवर नाम की टीम बनाई

मिलिंद राज से मिलने के बाद गर्वित ने साइंस में रुचि रखने वाले अपने दोस्तों से बात की। स्टूडेंट श्रेयांश मेहरोत्रा और विराज मेहरोत्रा भी इस तरह की कार डेवलप करना चाह रहे थे। विराज ने अपने छोटे भाई जय को भी इस प्रोजेक्ट में शामिल किया। सबने मिलकर फॉरएवर नाम की टीम बनाई और मिलिंद राज की मेंटरशिप में काम शुरू किया।

आइए, इन 4 बच्चों के बारे में जान लेते हैं….

1. गर्वित सिंह: उम्र 12 साल। 7वीं कक्षा में पढ़ते हैं। वन्यजीव रक्षा एवं रोबोटिक्स साइंस में दिलचस्पी है। मां आर्टिस्ट हैं। पार्किंक से जुड़ा बिजनेस करते हैं।

2. श्रेयांश मेहरोत्रा: उम्र 14 साल। 9वीं कक्षा में पढ़ते हैं। नवाचार, पर्यावरण रक्षा, विज्ञान एवं आर्टिफिकल इंटेलीजेंस में दिलचस्पी है। मां होम मेकर हैं। पिता जी रिटेल व्यापारी हैं।

3. विराज मेहरोत्रा: उम्र 11 साल। 6वीं कक्षा में पढ़ते हैं। पर्यावरण की रक्षा और विज्ञान एवं टेक्नालॉजी में विशेष रुचि है। इनकी मां डॉक्टर हैं। पिता जी का रिटेल का बिजनेस है।

4. आर्यव मेहरोत्रा: विराज के छोटे भाई हैं। उम्र 8 साल। कक्षा 4 में पढ़ते हैं। रोबोटिक्स में रुचि है।

APJ अब्दुल कलाम ने मिलिंद को ड्रोन मेन ऑफ इंडिया नाम दिया

कार बनाने वाले बच्चों के मेंटर मिलिंद राज ने बताया कि लखनऊ में उनका ड्रोन रिसर्च सेंटर है। वो केंद्रीय रक्षा मंत्रालय के लिए भी काम करते हैं। देश के बॉर्डर डिफेंस के लिए उन्होंने कई ड्रोन्स बनाए हैं। पाकिस्तान की तरफ से आए, पकड़े गए ड्रोन्स को भी यही डीकोड करते हैं। कोरोना के समय इन्होंने एक सेनेटाइज ड्रोन बनाया था जो काफी चर्चित हुआ।

दरअसल, ये ड्रोन ऐसी जगहों को मिनटों में सेनेटाइज कर देता था जहां कोरोना के सबसे ज्यादा केसेस होते थे। इस ड्रोन की वजह से कई पुलिस वाले कोरोना प्रभावित होने से बचे थे। अपने लखनऊ दौरे पर भारत के पूर्व राष्ट्रपति APJ अब्दुल कलाम ने मिलिंद को ड्रोन मेन ऑफ इंडिया नाम दिया था। जापान में इनके रोबोट्स पर एक डॉक्यूमेंट्री बन चुकी है। अमेरिकन मीडिया में भी इनके नाम का जिक्र अक्सर होता रहता है।

बच्चों के इस इनोवेशन के बारे मे मिलिंद ने कहा, ये कारें इन बच्चों के डेडिकेशन का नतीजा हैं। ये चारों यूपी के एलन मस्क हैं। नई टेक्नोलॉजी को डेवलप करने से लेकर कारों की वेल्डिंग और पेंटिंग का काम भी इन्होंने अपने हाथों से किया है। देश के हर बच्चे को इन नन्हें साइंटिस्ट से प्रेरणा मिलेगी।

कार बनाने वाले बच्चों के सम्मान में सजवाई गई विधानसभा

बीते सोमवार यूपी सरकार के मुख्य सचिव दुर्गा शंकर मिश्र ने बच्चों को विधानसभा बुलवाया। विधान सभा के सामने ही उनसे मुलाकात की, खुद कारें देखीं। बच्चों को पुरस्कृत भी किया। बच्चों के सम्मान में विधानसभा को एक्स्ट्रा लाइटों से सजाया भी गया था। दुर्गा शंकर ने कहा, ये नन्हें वैज्ञानिक आने वाले समय में बड़े वैज्ञानिक बनेंगे। इन्होंने दुनिया की सबसे सस्ती स्वदेशी इलेक्ट्रिक कारें बनाई हैं जो पॉल्यूशन भी खत्म करेंगी

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