मानगढ़ स्मारक: आदिवासी बहुल 200 विधानसभा सीटों पर होगा असर: 4 राज्यों के बीच बनेगा विकास प्राधिकरण

मानगढ़ स्मारक: आदिवासी बहुल 200 विधानसभा सीटों पर होगा असर: 4 राज्यों के बीच बनेगा विकास प्राधिकरण

आदिवासियों के तीर्थ स्थल के रूप में प्रसिद्ध हो चुके राजस्थान के बांसवाड़ा जिले में स्थित मानगढ़ के पहाड़ पर केन्द्र सरकार 4 राज्यों के बीच एक विकास प्राधिकरण बनाना चाहती है। इसके लिए पहाड़ पर राजस्थान सरकार से जमीन मांगी गई है।

केंद्र सरकार का संस्कृति मंत्रालय चार राज्यों राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश का संयुक्त विकास प्राधिकरण बनाने पर काम कर रहा है। सोमवार को इस तरह के निर्देश चारों राज्यों को केंद्र सरकार के मंत्रालय की ओर से दिए गए हैं। साथ ही राजस्थान व गुजरात से स्मारक के लिए जमीन मांगी गई है व विकास में महाराष्ट्र व मध्यप्रदेश का सहयोग मांगा है।

राजस्थान सरकार ने इसकी तैयारियां शुरू कर दी है। अभी चल रहे गुजरात चुनावों में ही नहीं बल्कि राजस्थान, तेलंगाना, छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र में अगले एक-डेढ़ वर्ष में होने वाले चुनावों में आदिवासी बहुल 200 विधानसभा सीटों पर मानगढ़ का मुद्दा सीधा असर डालने वाला है।

हाल ही एक नवंबर को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मानगढ़ में राजस्थान, गुजरात, मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्रियों की मौजूदगी में एक सभा में कहा था कि मानगढ़ पर एक भव्य स्मारक बनना चाहिए। इसके लिए गुजरात, मध्यप्रदेश, राजस्थान के साथ महाराष्ट्र को भी सहयोग करना चाहिए।

उस कार्यक्रम में राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत ने मानगढ़ को राष्ट्रीय स्मारक बनाने की मांग की थी, हालांकि प्रधानमंत्री मोदी ने वो मांग तो नहीं मानी थी, लेकिन अब चार राज्यों के बीच एक विकास प्राधिकरण बनाने के निर्देश केन्द्र सरकार ने दे दिए हैं। केन्द्र सरकार के स्तर पर संस्कृति मंत्रालय यह काम देख रहा है, जिसके मंत्री राजस्थान से ही अर्जुन राम मेघवाल हैं।

यह प्राधिकरण मानगढ़ स्मारक को भव्य रूप देगा और वहां आदिवासी शहीदों व उनके नेता गोविंद गुरू के जीवन पर आधारित एक म्यूजियम भी वहां बनाया जाएगा। एक नवंबर की सभा के बाद ही राजस्थान सरकार ने तैयारियां शुरू कर दी थीं। सूत्रों का कहना है कि गुजरात चुनावों के समाप्त होते ही विकास प्राधिकरण का काम शुरू हो जाएगा।

मानगढ़ के लिए नई कार्ययोजना बनाने के लिए सरकार जुटी तैयारियों में

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने हाल ही आदिवासियों की श्रद्धा के पावन स्थल मानगढ़ धाम को भव्य रूप देने के लिए राजस्थान, गुजरात, मध्यप्रदेश व महाराष्ट्र को एक साथ कार्ययोजना बनाने के लिए कहा था। अब उसी कार्ययोजना को मूर्त रूप देने के लिए मानगढ़ विकास प्राधिकरण बनाने की तैयारी की जा रही है।

सीएम गहलोत ने कहा था उन्हें श्रेय न मिले इसलिए मोदी ने टाली थी राष्ट्रीय स्मारक की घोषणा

गहलोत ने तो मानगढ़ की सभा से जयपुर लौटने के बाद एक कार्यक्रम में यहां तक कहा था कि चूंकि उन्होंने दो बार मोदी को पत्र लिखकर मानगढ़ को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने की मांग की थी, इसलिए मोदी ने फिलहाल इस फैसले को टाल दिया क्योंकि वे समझते हैं कि इससे कांग्रेस और उन्हें (गहलोत को) राजनीतिक फायदा मिलेगा। गुजरात चुनाव एक महीने बाद होने हैं और वहां करीब 25 विधानसभा सीटों पर आदिवासियों की बहुलता है और गहलोत वहां कांग्रेस के स्टार प्रचारक और सीनियर ऑब्जर्वर की जिम्मेदारी निभा रहे हैं।

गहलोत ने कहा था मानगढ़ राष्ट्रीय स्मारक बन कर ही रहेगा

सीएम गहलोत ने हाल ही बयान दिया था कि चाहे जो हो जाए मानगढ़ आज नहीं तो कल सही, लेकिन राष्ट्रीय स्मारक बनेगा जरूर। आदिवासियों का यह पावन धाम राष्ट्रीय स्मारक बन कर रहेगा। गहलोत अक्सर कहते हैं कि उनके बयान के मायने होते हैं। ऐसे में राजनीतिक जानकारों का मानना है कि गहलोत के पास कोई ना कोई पुख्ता जानकारी है, जिसके चलते उन्होंने कहा था कि मानगढ़ राष्ट्रीय स्मारक बन कर रहेगा।

तीन राज्यों के मुख्य सचिवों से मोदी ने ली थी मानगढ़ पर विस्तृत जानकारी

मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक बनाने के हाल ही राजस्थान, मध्यप्रदेश और गुजरात के मुख्य सचिवों से स्वयं प्रधानमंत्री मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बातें की थीं। राजस्थान की मुख्य सचिव ऊषा शर्मा ने प्रधानमंत्री को मानगढ़ के विषय में अब तक राजस्थान सरकार के स्तर पर किए गए कार्यों की जानकारी दी थी। प्रधानमंत्री ने तीनों राज्यों के मुख्य सचिवों से राज्य सरकारों के मानगढ़ धाम को लेकर किए जा रहे प्रयासों और आगे की योजनाओं की जानकारी भी ली थी।

विधानसभा की 200 और लोकसभा की 50 सीटों पर सीधा प्रभाव:

मानगढ़ को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करना कोई मामूली मुद्दा नहीं है। गुजरात में महीने भर बाद चुनाव है। उसके करीब एक-दो वर्ष के भीतर राजस्थान, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ कर्नाटक, तेलंगाना, महाराष्ट्र के विधानसभा और देश के लोकसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में प्रधानमंत्री मोदी आदिवासियों को एक ही जगह से साध लेने को तत्पर हैं।

इन राज्यों में विधानसभा की 200 और लोकसभा की लगभग 50 सीटें ऐसी हैं जो प्रत्यक्ष रूप से आदिवासी बहुल हैं। इनके अतिरिक्त इन सभी राज्यों में 50-60 प्रतिशत सीटें ऐसी हैं, जहां अप्रत्यक्ष रूप से आदिवासी मतदाताओं की अच्छी-खासी उपस्थिति है।

मानगढ़ का इतिहास

मानगढ़ धाम बांसवाड़ा जिले में स्थित है। यह एक पहाड़ी पर बना हुआ है। पहाड़ी का एक हिस्सा गुजरात में और एक हिस्सा राजस्थान में शामिल है। इस पहाड़ी क्षेत्र में गोविंद गुरू नामक आदिवासी नेता ब्रिटिश हुकुमत के खिलाफ स्वतंत्रता का आंदोलन चला रहे थे।

तब 19 नवंबर-1913 को इसी धाम पर ब्रिटिश सरकार ने उन्हें व उनके आदिवासी साथियों को घेर लिया था। यहां अंग्रेजों ने 1500 आदिवासियों का सामूहिक नरसंहार किया था। उन्हीं की याद में मानगढ़ धाम बना हुआ है। गोविंद गुरू को जीवित पकड़ कर बंदी बना लिया गया था।

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17 नवंबर 1913 को अंग्रेजों ने अचानक निहत्थे आदिवासियों पर फायरिंग शुरू कर दी। 1500 से ज्यादा आदिवासी मारे गए। मानगढ़ की पहाड़ी खून से लाल हो गई। इतिहासकारों और स्थानीय लोगों का कहना है कि ये जलियांवाला हत्याकांड से भी बड़ा नरसंहार था। इसके बावजूद लोगों को मानगढ़ नरसंहार के बारे में जितनी जानकारी होनी चाहिए, उतनी है नहीं। इतिहास ने कभी इस नरसंहार को जगह नहीं दी

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