उत्तर कोरिया ने लगातार दूसरे दिन दागी बैलिस्टिक मिसाइल, सियोल ने जताया परमाणु परीक्षण का डर

उत्तर कोरिया ने लगातार दूसरे दिन दागी बैलिस्टिक मिसाइल, सियोल ने जताया परमाणु परीक्षण का डर

सियोल: दक्षिण कोरिया की सेना का कहना है कि उत्तर कोरिया ने शुक्रवार को पूर्वी सागर में एक और अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल दागी. दो दिनों में प्योंगयांग की तरफ से यह दूसरी बार मिसाइल लॉन्च किया गया है. सियोल का कहना है कि उत्तर कोरिया ने हाल के दिनों में एक रिकॉर्ड-ब्रेकिंग लॉन्चिंग जारी रखी है, जिसने परमाणु परीक्षण के डर को बढ़ा दिया है. दक्षिण कोरिया के जॉइंट चीफ ऑफ स्टाफ ने मिसाइल लॉन्च की सूचना दी, लेकिन मिसाइल के प्रकार या रेंज के बारे में तुरंत विस्तार से नहीं बताया. उत्तर कोरिया ने हाल ही में तब समुद्र में सैकड़ों तोपों के गोले दागे थे, जब दक्षिण कोरिया और संयुक्त राज्य अमेरिका पूर्वी सागर में सैन्य अभ्यास कर रहे थे, जिनमें से कुछ में जापान भी शामिल था.

एक दिन पहले भी उत्तर कोरिया ने पूर्वी सागर में बैलिस्टिक मिसाइलदागी थी. प्योंगयांग की ओर से यह लॉन्चिंग उस बयान के 2 घंटे बाद ही की गई थी, जिसमें उसने कहा था कि अमेरिका अपने सहयोगियों के साथ क्षेत्र में सुरक्षा उपस्थिति बढ़ाने का प्रयास कर रहा है और इसके जवाब में कठोर सैन्य प्रतिक्रिया की चेतावनी दी थी. यह कहते हुए कि वाशिंगटन एक जोखिम मोल ले रहा है, जिसका उसे पछतावा होगा. इस वर्ष उत्तर कोरिया ने रिकॉर्ड संख्या में ऐसे परीक्षण किए हैं, जो संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों द्वारा प्रतिबंधित हैं. उसके मिसाइल और परमाणु हथियार कार्यक्रमों पर प्रतिबंध है.

इससे पहले गुरुवार को उत्तर कोरिया के विदेश मंत्री चो सोन ह्यू Choe Son Hue ने चेतावनी दी थी कि हाल ही में उत्तर कोरिया पर अमेरिका-दक्षिण कोरिया-जापान शिखर सम्मेलनसमझौते से कोरियाई प्रायद्वीप पर तनाव अधिक बढ़ जाएगा. चो का बयान रविवार को कंबोडिया में अपने दक्षिण कोरियाई और जापानी समकक्षों के साथ राष्ट्रपति जो बाइडन के त्रिपक्षीय शिखर सम्मेलन में उत्तर कोरिया की पहली आधिकारिक प्रतिक्रिया थी. अपने संयुक्त बयान में तीनों नेताओं ने उत्तर कोरिया के हालिया मिसाइल परीक्षणों की कड़ी निंदा की और प्रतिरोध को मजबूत करने के लिए मिलकर काम करने पर सहमति व्यक्त की थी. बाइडन ने दक्षिण कोरिया और जापान की परमाणु हथियारों सहित पूरी क्षमता के साथ रक्षा करने की अमेरिकी प्रतिबद्धता की फिर से पुष्टि की थी.

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