हरीश चौधरी के बाद हरीश मीना की सीएम को चेतावनी: बोले- स्कूलों को बंद करने की योजना मेरी समझ से परे

हरीश चौधरी के बाद हरीश मीना की सीएम को चेतावनी: बोले- स्कूलों को बंद करने की योजना मेरी समझ से परे

सीएम अशोक गहलोत को एक के बाद एक कांग्रेस के ही विधायक घेर रहे हैं। ओबीसी आरक्षण की खामियों को दूर नहीं करने को लेकर सीएम तक को जिम्मेदार बताकर आंदोलन करने की चेतावनी देने वाले बायतु से विधायक हरीश चौधरी चर्चा में बने हुए हैं। अब दूसरे विधायक हरीश मीना ने गहलोत को पत्र लिखकर शिक्षा विभाग के कार्मिकों को लापरवाह ठहराया है। मीना ने सीएम को अगले विधानसभा सत्र में सरकार का विरोध करने की चेतावनी दी है।

यह चेतावनी तब दी है, जब 15-16 दिनों बाद राजस्थान में राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा प्रवेश करने वाली है। मीणा का विधानसभा क्षेत्र गुर्जर बाहुल्य क्षेत्रों में से एक है और यह कोटा, बूंदी, सवाईमाधोपुर, दौसा, टोंक के उन विधानसभा क्षेत्रों से छूता हुआ है, जहां से राहुल की यात्रा को गुजरना है।

हरीश मीना को राजस्थान की राजनीति में सचिन पायलट गुट का माना जाता है। हाल ही जब 25 सितंबर को यूडीएच मंत्री शांति धारीवाल के आवास पर पायलट के खिलाफ विधायक जुटे थे और 92 विधायकों ने इस्तीफा देकर आलाकमान के प्रतिनिधि बनकर आए वरिष्ठ पर्यवेक्षकों को बैरंग लौटा दिया था, तब हरीश उनमें शामिल नहीं थे।

हरीश मीणा, पायलट, वन मंत्री हेमाराम चौधरी, सैनिक कल्याण मंत्री राजेन्द्र सिंह गुढ़ा और विधायक दिव्या मदेरणा के साथ पर्यवेक्षकों के साथ अन्य विधायकों का इंतजार सीएम हाउस पर ही कर रहे थे।

हरीश मीना ने भास्कर को बताया कि सरकार ने खर्चे को कम करने के नाम पर स्कूलों को बंद करने की योजना बनाई है, जो पूरी तरह से गलत है। कल को खर्चा ज्यादा हो तो पानी, बिजली, अस्पताल, सड़क को बंद नहीं किया जा सकता है। वैसे ही शिक्षा भी ऐसा ही विषय है।

स्कूलों को बंद करने से हजारों गरीब छात्र-छात्राओं ने अपनी पढ़ाई छोड़ दी क्योंकि उनके घरों-ढाणी-गांव के आस-पास के स्कूल बंद हो गए। उन स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों के पद भी कम हो गए। नई भर्तियों में वे पद शामिल नहीं हैं। ऐसे में बेरोजगार शिक्षकों के लिए नौकरियों के अवसर भी कम हो गए हैं।

राजस्थान में यह दोहरी मार पड़ रही है। एक तरफ तो बच्चों को पढ़ने का अवसर नहीं मिल रहा और जो पढ़-लिख चुके हैं, उन्हें नौकरी नहीं मिल रही। मैंने अभी पत्र सीएम को लिखा है और मेल भी कर दिया है। कल कोशिश करूंगा कि सीएम और शिक्षा मंत्री डॉ. कल्ला से बातचीत करूं। कोई कार्रवाई अगर इस विषय में नहीं की गई, तो विधानसभा के अगले सत्र में सदन के भीतर ही इसका पुरजोर विरोध करूंगा।

विधायक मीना ने यह पत्र सीधे सीएम गहलोत को लिखा है। अब वे इस विषय में सीएम और शिक्षा मंत्री डॉ. कल्ला से मुलाकात भी करेंगे।

क्या लिखा है हरीश ने पत्र में

हरीश ने पत्र सीधे मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के नाम लिखा है, लेकिन उसकी एक कॉपी शिक्षा मंत्री बी. डी. कल्ला को भी भेजी है। पत्र सीधे कल्ला के बजाए सीएम को भेजना राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है।

हरीश ने पत्र में लिखा है कि प्रदेश में 10,584 प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों को विलय (खत्म करने) की तैयारी की जा रही है, जो शिक्षा विभाग के कार्मिकों की अकर्मण्यता को दिखाता है। स्कूलों को बंद करने की योजना मेरी समझ से परे है। स्कूलों में नामांकन बढ़ाने के प्रयास करने के बजाए गरीब बच्चों से उनके स्कूलों को छीनना गलत है। अगर विभाग की इस योजना को तुरंत निरस्त नहीं किया गया तो विधानसभा के अगले सत्र में पुरजोर विरोध किया जाएगा।

कभी भाजपा से सांसद थे पूर्व आईपीएस हरीश

हरीश मीना राजनीति में आने से पहले आईपीएस अफसर थे और वे 2009 से 2013 के बीच राजस्थान के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) के शीर्ष पद पर थे। तब भी राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ही थे। केन्द्र में उस वक्त कांग्रेस के नेतृत्व में यूपीए सरकार थी, जिसमें उनके भाई नमोनारायण मीणा वित्त राज्य मंत्री थे।

2014 में आईपीएस से रिटायह होकर उन्होंने भाजपा के टिकट से दौसा से सांसद का चुनाव लड़ा था और अपने ही भाई नमोनारायण मीणा के सामने वो चुनाव जीता था। नमोनारायण को कांग्रेस ने टिकट दिया था। बाद में 2018 में उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर देवली-उनियारा (टोंक) से विधानसभा का चुनाव लड़ा और जीते। वे सचिन पायलट के करीबी नेताओं में से गिने जाते हैं।

पिछले एक पखवाड़े में लगातार हो रहे गहलोत सरकार पर हमले

अब तक पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट, खाद्य व रसद मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास, सैनिक कल्याण मंत्री राजेन्द्र सिंह गुढ़ा, विधायक हरीश चौधरी, विधायक रामनिवास गवाड़िया, विधायक दिव्या मदेरणा, विधायक संयम लोढ़ा, विधायक भरत सिहं कुंदनपुर आदि ने विभिन्न मुद्दों को लेकर पिछले 15 दिनों में सीएम गहलोत पर हमला बोला है।

अनुशासनहीनता के मामले में शांति धारीवाल, महेश जोशी और धर्मेन्द्र राठौड़ पर अब तक कार्रवाई नहीं होने के लिए भी गहलोत को जिम्मेदार ठहराया गया है। सोशल मीडिया से लेकर प्रेस कांफ्रेंस कर गहलोत पर जो हमले किए जा रहे हैं, उन्हें लेकर राजनीतिक हलकों में खासी चर्चा प्रदेश में बनी हुई है।

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