प्रयागराज: बिना कोचिंग के भाई-बहन बन गए PCS अफसर

प्रयागराज: बिना कोचिंग के भाई-बहन बन गए PCS अफसर

उत्तर प्रदेश, लोक सेवा आयोग की पीसीएस-2021 की परीक्षा में प्रयागराज के मेजा के 2 होनहार भाई-बहन भी सफल हुए। सिविल इंजीनियरिंग में बीटेक विवेक कुमार सिंह ने मेरिट लिस्ट में 8वां स्थान हासिल किया। वहीं उनकी छोटी बहन संख्या ने 12वां पायदान पर रहीं।


चयन के बाद विवेक सिंह ने कि कहा कि हमने बचपन से ही सिर्फ प्रशासनिक अफसर बनने का सपना देखा था। जो आज पूरा हो गया। साथ में बहन भी पहले ही प्रयास में सफल हो गई है, तो घर में जश्न का माहौल है।


सेल्फ स्टडी से दूसरे प्रयास में क्रेक किया एग्जाम

जो लोग ये सोचते हैं कि बिना कोचिंग और महंगी फीस दिए PCS और IAS अफसर नहीं बना जा सकता है। उनके लिए मेजा के तेंदुआ कला गांव के विवेक कुमार सिंह और संख्या सिंह की सफलता एक नजीर है। विवेक कुमार सिंह कोई कोचिंग नहीं की थी। सेल्फ स्टडी और ग्रुप डिस्कसन को अपना हथियार बनाया। हम दोनों आपस में ही डिफरेंट टॉपिक्स पर डिस्कस किया करते थे। इससे जो टॉपिक मेरा कमजोर हाेता था। वो तैयार हो जाता है। मेरी बहन संख्या भी अपने कमजोर टॉपिक्स पर हमसे पढ़ लिया करती थी।


नैनी के माधव ज्ञान केंद्र से की है पढ़ाई

कृष्ण कुमार सिंह और प्रतिमा सिंह के बेटे विवेक कुमार सिंह ने नैनी के माधव ज्ञान केंद्र से 10वीं की पढ़ाई की है। इसके बाद प्रयागराज के ज्वाला देवी इंटर कालेज के इंटर किया और 2019 में गाजियाबाद के आरकेजीआईटी से सिविल इंजीनियरिंग में बीटेक की पढ़ाई की। बीटेक करने के बाद अपने लक्ष्य के मुताबिक विवेक ने प्रशासनिक सेवाओं की तैयारी फोकस्ड हाेकर शुरू की।


2020 में 10 नंबर से चूक गए थे विवेक

विवेक ने बताया कि उन्होंने पीसीएस 2021 में उनका विषय भूगोल था व मीडियम हिंदी। 2020 की पीसीएस परीक्षा में भी उन्हें सफलता की पूरी उम्मीद थी पर 10 नंबर से उनका चयन रुक गया था। यही कारण है कि पीछे की गलतियों को सुधारते हुए पीसीएस-2021 में हमने पूरा जोर लगा दिया था। जहां कमजोर थे उनको फोकस्ड होकर तैयारी की और परिणाम आपके सामने है।


बहन ने पहले प्रयास में पाई सफलता

बहन संख्या सिंह ने भी 12वीं तक की पढ़ाई माधव ज्ञान केंद्र से की है। इसके बाद उन्हाेंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से 2020 में बीए पास किया। दो साल की लगातार और स्ट्रैटजी के तहत पढ़ाई की और अपने पहले ही प्रयास में यूपीपीएससी में सफलता हासिल कर ली। विवेक का कहना है कि बचपन से ही प्रशासनिक अधिकारी बनने का ख्वाब देखा था। अब भाई-बहन दोनों के सफल होने के बाद परिवार में जश्न का माहौल है।

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