गौड़ संस बिल्डर पर FIR:आवास-विकास का 350 करोड़ बकाया बिना कंप्लीशन सर्टिफिकेट के एक हजार से ज्यादा फ्लैट बेचे

गौड़ संस बिल्डर पर FIR:आवास-विकास का 350 करोड़ बकाया बिना कंप्लीशन सर्टिफिकेट के एक हजार से ज्यादा फ्लैट बेचे

उत्तर प्रदेश के जिला गाजियाबाद में गौड़ संस बिल्डर ने आवास-विकास परिषद से कंप्लीशन सर्टिफिकेट लिए बिना ही एक हजार से ज्यादा आवंटियों को फ्लैट पर कब्जा दे दिया।


आवास-विकास परिषद ने गौड़ संस पर अपना करीब साढ़े तीन सौ करोड़ रुपया बकाया बताया है। अनाधिकृत रूप से फ्लैट बेचने में आवास-विकास के जेई ने थाना विजयनगर में गौड़ संस के खिलाफ FIR दर्ज कराई है।सिद्धार्थ विहार सेक्टर-8 में है सिद्धार्थतम ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्ट

उप्र आवास-विकास परिषद वसुंधरा के जेई योगेंद्र कुमार के अनुसार, सेक्टर-8 में सिद्धार्थ विहार योजना विकसित है। इस भूखंड संख्या-8 BS-1 पर गौड़ संस बिल्डर के द्वारा गौड़ सिद्धार्थतम ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्ट का निर्माण किया गया है।


अब गौड़ संस के द्वारा यहां बने फ्लैट्स पर आवंटियों को कब्जा दिया जा रहा है जो कि पूरी तरह अवैध है। क्योंकि गौड़ संस के द्वारा आवास-विकास परिषद से अभी तक पूर्णता: प्रमाण पत्र नहीं लिया गया है। विजयनगर थाना पुलिस ने इस मामले में मैसर्स गौड़ संस इंडिया प्रालि के खिलाफ IPC सेक्शन- 188, 336 में FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।आवास-विकास ने पहले से लगा रखी है रजिस्ट्री पर रोक

आवास-विकास परिषद के अधिकारियों का कहना है कि जिस भूखंड पर ये हाउसिंग प्रोजेक्ट बन रहा है, उसका शुल्क वर्तमान दरों पर गौड़ संस ने जमा नहीं किया। उल्टा, यहां पर अपार्टमेंट खड़े कर दिए। इसका गौड़ संस पर करीब 350 करोड़ रुपए बकाया हैं।


बकाया रुपया चुकता न करना पड़े, इसलिए गौड़ संस ने आवास-विकास से अभी तक कंप्लीशन सर्टिफकेट नहीं लिया है। ऐसे में आवास-विकास पहले ही इस प्रोजेक्ट के फ्लैट्स की रजिस्ट्री पर रोक लगा चुका है।


बाकायदा प्रोजेक्ट पर इस चीज का बैनर लगाते हुए खरीदारों को आगाह भी किया गया है। ऐसे में जिन आवंटियों ने फिलहाल फ्लैट्स पर कब्जा लिया है, उन्हें बाद में दिक्कत आ सकती है।


गौड़ संस ने कहा- हमारा कोई बकाया नहीं

उधर, इस पूरे मामले में गौड़ संस प्रबंध तंत्र का कहना है कि आवास-विकास परिषद का इस प्रोजेक्ट पर कोई पैसा बकाया नहीं है। आवंटियों को कानूनी रूप से ही डीम्ड पजेशन दिया जा रहा है। ये मामला फिलहाल इलाहाबाद हाईकोर्ट में भी चल रहा है।

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