अखिलेश का पैदल मार्च बीच में रोका गया, योगी बोले- UP में अराजकता के लिए जगह नहीं

अखिलेश का पैदल मार्च बीच में रोका गया, योगी बोले- UP में अराजकता के लिए जगह नहीं

लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानमंडल के मानसून सत्र की आज हंगामेदार शुरुआत रही। सदन में जहां हंगामे का आलम रहा वहीं सड़क पर भी विपक्ष आग बबूला नजर आया। सत्र की शुरुआत से पहले समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने पार्टी विधायकों और कार्यकर्ताओं के साथ विधानसभा तक मार्च निकालने का प्रयास किया जिसे बीच में ही रोक दिया गया। उधर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि राज्य के 25 करोड़ लोगों के हितों के लिए डबल इंजन की सरकार बिना भेदभाव के कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि विभिन्न चुनौतियों का सामना करते हुए भी यहां अभाव और अराजकता के लिए जगह नहीं है। योगी आदित्यनाथ ने राज्य सरकार के ख़िलाफ़ समाजवादी पार्टी के विधानसभा तक पैदल मार्च के बारे में पूछे जाने पर कहा कि किसी भी दल और व्यक्ति को लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने में कहीं कोई बुराई नहीं है लेकिन समाजवादी पार्टी से यह उम्मीद करना कि वह किसी नियम या किसी शिष्टाचार को माने यह केवल एक कपोल कल्पना ही कही जा सकती है।

उधर उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा है कि समाजवादी पार्टी जिसे मार्च का नाम देकर विरोध प्रदर्शन कर रही है वो जनता के हितों से जुड़ा हुआ है ही नहीं। उन्होंने कहा कि अगर उन्हें जनता से जुड़े किसी मुद्दे पर चर्चा करनी है तो सदन में करनी चाहिए जो कार्यवाही का हिस्सा बने। सरकार चर्चा के लिए तैयार है।

दूसरी ओर पुलिस का इस मुद्दे पर कहना है कि हमें पैदल यात्रा की जानकारी मिली थी। इसके लिए पूर्वानुमति नहीं मांगी गई थी। हमने उनको एक मार्ग निर्धारित करके दिया था जिससे यातायात और अन्य परेशानी नहीं होती लेकिन उन्होंने यह नहीं माना। ज्वाइंट कमिश्नर लॉ एंड ऑर्डर, लखनऊ पीयूष मोर्डिया ने कहा कि हमारे पास उनको रोकने के अलावा कोई अन्य उपाय नहीं था।

उधर पैदल मार्च को बीच में ही रोके जाने से नाराज अखिलेश यादव विधानसभा के बाहर ही धरने पर बैठ गये और योगी सरकार पर विभिन्न मोर्चों पर विफल रहने का आरोप लगाया। इस दौरान अखिलेश यादव ने कहा कि सरकार लगातार महंगाई बढ़ा रही है और जनता महंगाई में पिस गई है। अखिलेश यादव ने कहा है कि उत्तर प्रदेश में कुछ हिस्सों में बाढ़ और कुछ हिस्सों में सूखा है। उन्होंने कहा कि सरकार ने किसानों को इससे हुए नुकसान पर कोई राहत नहीं दी है। लम्पी वायरस से हजारों हजार गायों की जान जा चुकी हैं सरकार उन जानवरों की देखभाल के लिए भी कुछ नहीं कर पाई है।

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