आजमगढ़-रामपुर फार्मूले पर निकाय चुनाव लड़ेगी BJP पसमांदा मुस्लिम-यादव वोटर का अंतिम टेस्ट यही चुनाव

आजमगढ़-रामपुर फार्मूले पर निकाय चुनाव लड़ेगी BJP पसमांदा मुस्लिम-यादव वोटर का अंतिम टेस्ट यही चुनाव

यूपी निकाय चुनाव को बीजेपी आजमगढ़ और रामपुर लोकसभा उप-चुनाव के फार्मूले पर लड़ेगी। पूरा फोकस पसमांदा मुस्लिमों और यादव वोटर्स पर है। अपने सिंबल पर उम्मीदवारों को चुनाव लड़वाकर बीजेपी घर-घर तक नए सिरे से पहुंचना चाहती हैं। प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी ने ब्लू प्रिंट पार्टी पदाधिकारियों को जारी किया है। इसमें सपा के गढ़ में शिकस्त देने का प्लान तैयार किया गया है।


पसमांदा मुस्लिम-यादव का अंतिम टेस्ट

वरिष्ठ पत्रकार परवेज अहमद बताते हैं निकाय चुनाव के जरिए बीजेपी पसमांदा मुस्लिम और यादव वोट बैंक में मजबूत पैठ बनाना चाहती है। वह एक तरीके से निकाय चुनाव में टेस्ट करेगी कि पसमांदा मुसलमान भाजपा के साथ आ सकता है या नहीं। वही यादव वोट बैंक को कैसे सपा से भाजपा में लाया जा सकता है। शिवपाल के सपा से अलग होने का यादव वोटर्स पर असर भी पता चलेगा।


भाजपा बैठक में 7 अहम फैसले


नगर निगम, नगर पालिका, नगर पंचायत के सभी पदों के चुनाव बीजेपी अपने सिंबल पर लड़ेगी। उम्मीदवारों को बीजेपी सिंबल बांटेगी।

सभी 17 नगर निगम, 200 नगर पालिका परिषदों के साथ अधिकांश नगर पंचायतों में भगवा फहराने का लक्ष्य रखा है।

15 दिन में 3 करोड़ लोगों तक भाजपा का पहुंचने का प्लान है। 17 सितंबर से 2 अक्टूबर तक सेवा सप्ताह चलेगा।

11-12 सितंबर को जिला स्तर पर और 14-15 सितंबर तक मंडल स्तर की बैठक हो। सभी नगरीय निकायों में चुनाव संयोजक नियुक्त किए जाने है। हर वार्ड पर बैठक 25 सितंबर तक होगी।

मतदाता सूची पुनरीक्षण कार्यक्रम में बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों को अभियान में ज्यादा से ज्यादा लोगों के नाम मतदाता सूची में जुड़वाने हैं।

सेवा पखवाड़े के जरिए ही निकाय चुनाव के लिए माहौल तैयार किया जाएगा। पीएम मोदी व्यक्तित्व पर प्रदर्शनी लगाई जाएगी।

भाजपा पं. दीनदयाल उपाध्याय का जन्मदिन 25 सितंबर को है। प्रदेश के 1.60 लाख से अधिक बूथों पर मनाया जाएगा।

योगी 2.0 कैबिनेट में एकमात्र मुस्लिम मंत्री पसमांदा समुदाय से

यूपी में बीजेपी पार्टी के अल्पसंख्यक चेहरे मोहसिन रजा के अनुसार, "पसमांदा मुसलमान दलित और पिछड़ा वर्ग से हैं। इनमें मुस्लिम समुदाय का 75 से 80% हिस्सा है। सैयद, शेख, पठान उच्च जाति के मुसलमान हैं, जबकि अल्वी, सैनी, दर्जी, बढ़ई और बंकर पसमांदा मुसलमान हैं। हम पसमांदा समुदाय को ये बताने की कोशिश कर रहे हैं कि बीजेपी उनके लिए काम कर रही है।


योगी 2.0 में दानिश आजाद अंसारी को कैबिनेट में शामिल किया गया। वो एकमात्र मुस्लिम मंत्री हैं। योगी 1.0 की कैबिनेट में मुस्लिम मंत्री मोहसिन रजा थे। वो अगड़े मुस्लिम समुदाय से थे। इस बार पार्टी की इसी रणनीति के तहत मोहसीन रजा का पत्ता काट दिया था। बीजेपी अंदरखाने पसमांदा मुस्लिम समाज के बीच अपनी इमेज बदलना चाहती है।


34 मुस्लिम विधायक में से 30 पसमांदा

यूपी विधानसभा चुनाव 2022 में चुने गए 34 मुस्लिम विधायकों में से 30 पसमांदा मुस्लिम हैं। पसमांदा में वे लोग शामिल हैं, जो सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक रूप से पिछड़े हुए हैं। पसमांदा देश में मुस्लिम समुदाय का बहुमत बनाते हैं। एक पसमांदा नेता के अनुसार, पसमांदा मुस्लिम समुदाय के हिस्से के रूप में कई जातियों की पहचान की गई है, इनमें अंसारी, मंसूरी, कासगर, राईन, गुजर, घोसी, कुरैशी, इदरीसी, नाइक, फकीर, सैफी, अल्वी और सलमानी शामिल हैं।


विधानसभा के बाद योगी का पहला बड़ा इम्तेहान

नगर निगम, नगर पालिका और नगर पंचायत के अध्यक्ष व पार्षद चुनाव 2022 यूपी विधानसभा चुनाव के बाद योगी सरकार के लिए पहला बड़ी परीक्षा मानी जा रही है। बीजेपी किसी भी प्रकार से कोई चूक निकाय चुनाव में नहीं करना चाहती।


सूबे की 14 नगर निगमों पर काबिज बीजेपी की नजर इस बार सभी 17 निगमों पर अपना मेयर बनाने की है। इसके साथ ही बड़ी नगर पालिका परिषदों को भी हर हाल में जीतते हुए एक-एक पालिका और नगर पंचायत पर ताकत झोंकने के लिए कहा गया है।


2022 में यूपी की 734 नगर निकायों में चुनाव होने हैं। 2017 में 16 नगर निगम, 198 नगर पालिका और 438 नगर पंचायतों में चुनाव कराए गए थे। वहीं इस बार 17 नगर निगम, 200 नगर पालिका और 517 नगर पंचायतों में चुनाव कराए जाएंगे। इन तमाम नगर निकायों में वार्डों के पार्षदों के लिए भी चुनाव होंगे। इसमें करीब 30 फीसदी सीटों पर मुस्लिम मतदाता काफी अहम और निर्णायक भूमिका में है। ऐसे में माना जा रहा है कि बीजेपी मुस्लिम बहुल शहरी निकाय सीटों पर कुछ मुस्लिमों को उतारने का दांव चल सकती है।


बीजेपी हर चुनाव के बहुत मजबूती से लड़ती है

वरिष्ठ पत्रकार परवेज अहमद बताते हैं इस बार का निकाय चुनाव 2024 के लोकसभा से पहले बीजेपी का टेस्ट है। रामपुर और आजमगढ़ लोकसभा उप-चुनाव की तरीके से 2024 में बीजेपी मजबूती दिखाएगी। बीजेपी हर चुनाव के बहुत मजबूती से लड़ती है यही उनकी सबसे अहम ताकत भी मानी जाती है।


इसलिए सिंबल पर चुनाव लड़ा कर वह 2024 में गांव-गांव तक अपने सिंबल को पहुंचाना चाहती है। एंटी इनकंबेंसी का भी माहौल बीजेपी को झेलना पड़ सकता है। मगर, जिस तरीके से कानून-व्यवस्था और 2022 के विधानसभा चुनाव में महिलाओं का वोट मिला था। उसका फायदा भी होगा।


मुस्लिम बाहुल्य वाली सीटों पर बीजेपी को मिली थी हार

निकाय चुनाव में बीजेपी का सपा के गढ़ कन्नौज, मैनपुरी, इटावा, रामपुर, आजमगढ़ सहित कुछ नगर पालिकाएं जीतने पर खास फोकस रहेगा। नगर निकाय चुनाव 2017 में नगर निगम, नगर पालिका, नगर पंचायत के अध्यक्ष और पार्षद की 12,644 सीटों में से बीजेपी 8,038 उम्मीदवार खड़े किए थे। इसमें से करीब 33% ही सीटें जीत सकी थी। मुस्लिम वोटर निर्णायक भूमिका वाली सीटों पर बीजेपी को हार का मुंह देखना पड़ा था।


मुस्लिम बहुल अलीगढ़ और मेरठ नगर निगम के मेयर सीट बसपा जीतने में सफल रही थी जबकि सहारनपुर में बीजेपी को बहुत मामूली वोटों से जीत मिली थी। ऐसे ही पश्चिमी अमरोहा, बिजनौर, नजीबाबाद, रामपुर, मुजफ्फरनगर सहित तमाम मुस्लिम बहुल नगर पालिका सीटों पर बीजेपी को करारी मात झेलनी पड़ी थी।


ऐसे ही पूर्वांचल में भी बीजेपी को मुस्लिम बहुल शहरी निकाय सीटों पर हार झेलनी पड़ी थी। इसकी वजह यह है कि शहरी क्षेत्रों में मुस्लिम मतदाताओं की संख्या 40 से 60 फीसदी तक हैं। ऐसे में बीजेपी नई रणनीति पर काम कर रही है। संगठन और सरकार दोनों स्तर पर बीजेपी ने रणनीति बनाई है।

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