युवाओं का जीवन उजाड़ कर सट्टा बाजार बदस्तूर हो रहा गुलज़ार , कानून की पकड़ से दूर अब भी असल गुनहगार

युवाओं का जीवन उजाड़ कर सट्टा बाजार बदस्तूर हो रहा गुलज़ार , कानून की पकड़ से दूर अब भी असल गुनहगार

बरसों पहले लॉटरी पर रोक लगाकर सरकार ने ना केवल सट्टा बाजार को तगड़ी चोट पहुंचाई थी बल्कि इससे बर्बाद होने वाले परिवारों को और बर्बाद होने से भी बचा लिया था । लॉटरी का कारोबार करने वाले सटोरिये यूँ तो खुद ही करोड़पति हो चुके थे पर आमदनी बंद होने के चलते कोई नई जुगाड़ तलाशने में जुट गए थे ।

ऐसी ही एक जुगाड़ तलाशी हरदोई जिले के सट्टा किंग कहे जाने वाले कौशल मामा ने ।  चंद सालों में ही गरीबों मजदूरों को लूटकर बना धनकुबेर महज कुछ सालों में गरीबों मजदूरों और युवाओं का खून चूसकर करोड़ों की चल अचल संपत्ति का मालिक बना सट्टा किंग कौशल मामा सट्टा मटका ही नहीं क्रिकेट मैच पर भी दांव लगवाकर लोगों को चूना लगाने में जुटा है।यही नहीं मामा शहर के युवाओं को भी प्रलोभन देकर बर्बाद कर रहा है।मामा ने अपने गैंग के जरिए मटका सट्टा के काम को तो आगे बढ़ाया ही साथ ही क्रिकेट मैच में भी सट्टा लगवाना शुरू कर दिया।

मामा और उसके गुर्गों मोनू पाल स्कोडा,टुनटुन,सुनील,राजू और भूरी ने शहर के युवाओं को बर्बाद करने का बीड़ा उठा रखा है।दरअसल शहर के युवाओं को यह प्रलोभन देते हैं कि क्रिकेट मैच पर सट्टा लगाने वाले खिलाड़ी लाकर दो जितने का सट्टा लगेगा उसका तीन परसेंट लगवाने वाले को दिया जाएगा।ऐसे में अब मामा के सिंडिकेट में मामा के प्रमुख गुर्गों के साथ ही मामा ने शहर के युवाओं को भी इस धंधे में शामिल करना शुरू कर दिया है,लिहाजा युवाओं का भविष्य अंधकार मय होता जा रहा है।

मामा ने तो इस काले कारोबार के जरिए गरीबों का खून चूस कर अवैध कार्यों से अर्जित किए गए करोड़ों रुपए से कैनाल रोड पर रॉयल होटल के पड़ोस में मकान,सहारा इंडिया बैंक के पास सड़क पर बेशकीमती जमीन खरीद ली जिसमे निर्माण कार्य जारी है।फायर स्टेशन के सामने गली में,चन्दीपुरवा व रेलवे लाइन के किनारे और गरीबपुरवा में करोड़ों रुपए कीमत के मकान खरीदे और बनवाये साथ ही करोड़ों रुपए कीमत की बेशकीमती जमीन और आवासीय प्लाट और कारें खरीदीं यही नहीं मामा ने अपने गुर्गे मोनू पाल को भी स्कोडा जैसी लक्जरी कारें खरीद कर दीं।

मामा के डंक से युवा मजदूर और तमाम लोग बर्बाद हो गए, तमाम लोग सट्टे बाजों के चक्कर में पड़ कर आत्महत्या भी कर चुके हैं।चालाक मामा ने यह संपत्तियां अपने नाम से नहीं बल्कि अपने परिवार के लोगों और अपने गुर्गों के नाम से खरीदी हैं। हालिया दिनों में समाचार पत्रों और चैनलों की सुर्खियां बनने के बाद मामा अपने खास गुर्गे मोनू पाल स्कोडा समेत अन्य गुर्गों के साथ पुलिस के डर से फरार हो गया था लेकिन अब कुछ दिन फरारी काटने के बाद मामा और उसका गैंग शहर में फिर से दाखिल हो चुका है।मामा जिंदपीर चौराहे पर रहने वाले अपने खास गुर्गे और कुछ पुलिस कर्मियों के साथ घूमने वाले सटोरिए की मदद से डैमेज कंट्रोल में जुटा है और कोशिश की जा रही है कि पुलिस मामा और उसके गैंग पर शिकंजा ना कसे।

ऐसे में अब जिम्मेदारों को बड़ा प्रलोभन देने की कोशिश की जा रही है।मामा और उसके गुर्गे जिम्मेदारों की ड्योढ़ी पर माथा रगड़ने के लिए तैयार है।ऐसे में लोगों का कहना है कि क्या पुलिस मामा के काले कारोबार को खत्म करने में अक्षम है या जानबूझकर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही।यह प्रश्न लोगों के लिए एक पहेली बना हुआ है इसका जवाब तो मामा दे सकता है या फिर पुलिस। कुछ बरस पहले रेलवेगंज में रेलवे स्टेशन के निकट कौशल गुप्ता मामा पान की गुमटी लगाता था।कहते हैं कि तरक्की के लिए पढ़ा लिखा होना जरूरी होता है,मामा पढ़ा लिखा तो था नहीं लेकिन कढ़ा जरूर था।जल्द अमीर बनने की चाहत में कौशल गुप्ता मामा ने शॉर्टकट अपनाया और जरायम की दुनिया का रास्ता अख्तियार किया।लोगों को पान में कत्था और चूना लगाकर उनको स्वाद देने के लिए मशहूर मामा मटका और क्रिकेट सट्टा के काले कारोबार में उतर गया और आम जनमानस को ही चूना लगाने लगा।सूत्र बताते हैं कि सबसे पहले मामा ने जिंदपीर चौराहे से अपने सट्टे के इस काले कारोबार की बुनियाद रखी थी,जिसके बाद रेलवेगंज,नई बस्ती,अरुणा पार्क, गिप्सनगंज,झबरापुरवा,आजादनगर, धर्मशाला रोड,लखनऊ चुंगी समेत शहर के तमाम जगहों पर मामा ने सट्टे का काला कारोबार शुरू कर दिया और अपनी जड़ें जमा लीं।ऐसा नहीं कि मामा जब अपने काले कारोबार को गति दे रहा था तो जिम्मेदार अनजान थे बल्कि कुछ तो उसके आगे नतमस्तक थे तो कुछ ने बखूबी अपना फर्ज निभाया और उसके काले कारोबार पर अंकुश लगाने की कोशिश भी की और कड़ी कार्रवाई भी की। तत्कालीन एसपी अनुराग वत्स ने शिकायतों के बाद मामा के काले कारोबार पर अंकुश लगाया था,उनके जिले में रहने तक उसका कारोबार बंद रहा लेकिन जैसे ही उनका तबादला हुआ मामा अपने धंधे में फिर से लग गया।

कुछ जिम्मेदारों के साथ गठजोड़ मामा को यहां तक ले आया और चंद सालों में ही वह करोड़ों की संपत्ति का मालिक बन गया।मामा पढ़ा लिखा तो था नहीं लेकिन होशियारी उसकी रंग रंग में थी।उसने गरीबों का खून चूस कर करोड़ों रुपया कमाया लेकिन प्रॉपर्टी अपने परिवार के लोगों के नाम खरीदी ताकि मामा पर कोई सीधी उंगली ना उठा सके।ऐसे में जिम्मेदारों के रहमों करम पर मामा का धंधा खूब फला फूला और चंद सालों में ही मामा,उसका परिवार और गुर्गे बगैर किसी व्यापार के करोड़ों की संपत्ति के मालिक बन गये। आपको बता दें कि जुएं और सट्टे में हारकर,नाबालिग बच्चे,युवा बेरोजगार और दिहाड़ी मजदूर अपना भविष्य बर्बाद कर लेते हैं,जिसका अंजाम युवा पीढ़ी और गरीबों के परिवार को भुगतना पड़ता है लेकिन सट्टेबाज माफिया को तो सिर्फ रुपयों से मतलब है।हद तो इस बात की है कि जिम्मेदार पुलिस भी महज दिखावे की कार्रवाई करती है।पुलिस की हालिया 4 युवाओं पर 13 जी की कार्रवाई तो यही साबित करती है जबकि मामा और उसके खास गुर्गों पर पुलिस अभी भी मेहरबान है और मामा का काला कारोबार बदस्तूर जारी है।बस सिर्फ काम करने का तरीका बदला है,पहले पर्ची से सट्टा मटका लगाया जाता था और अब पर्ची की फोटो खींचकर व्हाट्सएप से भेजी जाती है।लिहाजा अब तकनीक के इस युग में व्हाट्सएप सट्टेबाजों का नया हथियार बन गया है। 

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