एथलीट बनने के लिए पिता के सामने की थी भूख हड़ताल रूपल चौधरी ने झटका कांस्य पदक

एथलीट बनने के लिए पिता के सामने की थी भूख हड़ताल रूपल चौधरी ने झटका कांस्य पदक

भारत की रूपल चौधरी ने कोलंबिया के कैली में चल रही विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप में महिलाओं की 400 मीटर में कांस्य पदक जीता है। रूपल ने गुरुवार को 51.85 सेकेंड के व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ समय के साथ तीसरा स्थान हासिल किया। इसमें ग्रेट ब्रिटेन की येमी मेरी ने 51.50 सेकंड के साथ गोल्ड मेडल जीता जबिक 51.71 सेकंड के साथ केन्या की दमारिस मुतुंगा ने रजत पदक हासिल किया।


रूपल ने अंतरराष्ट्रीय दौरे पर लगातार दूसरा पदक जीता है। इसस पहले उन्होंने 4X400 मिश्रित रिले टीम स्पर्धा में भी भारत को रजत दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उन्होंने 3 मिनट और 17.76 सेकेंड के समय के साथ एक नया एशियाई रिकॉर्ड स्थापित करके दूसरा स्थान हासिल किया था। परिवार में जश्न का माहौल है तो वहीं कोच विशाल सक्सेना व अमिता सक्सेना भी काफी खुश है।


रूपल के पिता एक छोटे किसान है। बचपन से ही रूपल ने एक पेशेवर एथलीट बनने का सपना देखा था। पिछले साल द न्यू इंडियन एक्सप्रेस को दिए एक इटंरव्यू में रुपल ने बताया था कि मैं हमेशा एक एथलीट बनना चाहती थी और 2016 में अपने पिता ओमवीर सिंह से मैनें ये बात शेयर की। जब मैं अपनी नौवीं कक्षा की अंतिम परीक्षा पास करने के बाद मेरे पिता ने मुझे मेरठ के कैलाश प्रकाश स्टेडियम में ले जाने का वादा किया।हालाँकि वो जगह मेरे गाँव शाहपुर जैनपुर से लगभग 18 किमी दूर है। छोटे किसान होने के कारण वह अपना वादा पूरा नहीं कर सके।मैं तीन दिनों तक भूख हड़ताल पर बैठी रही जिसके बाद मेरी मां ममता ने उन्हें डांटा और मेरे पिता को मुझे स्टेडियम ले जाने के लिए मजबूर किया

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